यमन संकट: चीनी दूत फू छोंग का UN सुरक्षा परिषद में तत्काल युद्धविराम का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू छोंग ने 9 अक्टूबर 2026 को UN सुरक्षा परिषद की यमन मुद्दे पर आयोजित खुली बैठक में यमन की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यथाशीघ्र युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की दिशा में लौटने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष के नकारात्मक दुष्प्रभाव बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और आसपास के देशों तक तेज़ी से फैल रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
फू छोंग ने बैठक में कहा कि हाल के समय में यमन में ज़मीनी हालात में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। यमन के पश्चिमी तट सहित कई मोर्चों पर भीषण लड़ाई छिड़ी है और युद्धक्षेत्र की स्थिति उच्च तीव्रता वाले टकराव के एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस संघर्ष के कारण भारी जानमाल का नुकसान हुआ है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
उन्होंने रेखांकित किया कि यमन की स्थिति एक नाज़ुक मोड़ पर आ पहुँची है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संघर्ष का कोई व्यावहारिक हल तलाशना ही होगा।
चीन की तीन-सूत्रीय माँग
फू छोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने तीन प्रमुख बिंदु रखे। पहला, यथाशीघ्र स्थिति को शांत किया जाए। दूसरा, राजनीतिक समाधान की दिशा में शीघ्र वापसी सुनिश्चित हो। तीसरा, अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का दृढ़तापूर्वक पालन किया जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब यमन दशक भर से अधिक समय से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट की दृष्टि से यह दुनिया के सबसे गंभीर क्षेत्रों में से एक बना हुआ है।
बाब अल-मंडेब और क्षेत्रीय असर
गौरतलब है कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जहाँ से लाखों बैरल तेल प्रतिदिन गुज़रता है। यमन में अस्थिरता का इस जलमार्ग पर सीधा असर पड़ता है, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच व्यापार को प्रभावित करता है। चीनी प्रतिनिधि की यह चिंता केवल मानवीय नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक भी है।
चीन की भूमिका और आगे की राह
फू छोंग ने स्पष्ट किया कि चीन सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क और संवाद बनाए रखेगा तथा अपने स्तर पर शांति वार्ता को प्रोत्साहित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि चीन यमन मुद्दे के राजनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा परिषद में चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में व्यापक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। UN में चीन की स्थायी सदस्यता और वीटो शक्ति को देखते हुए इस आह्वान का राजनयिक महत्व काफी अधिक है।