सीपीसी कैडर चयन के तीन मूल मानदंड: निष्ठा, सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने कैडर चयन और नियुक्ति की अपनी नीति में निष्ठा, सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी को तीन मूलभूत मूल्य मानदंडों के रूप में स्पष्ट रूप से स्थापित किया है। महासचिव शी चिनफिंग के सीपीसी निर्माण संबंधी विचारों में उच्च-गुणवत्ता वाली कैडर टीम के निर्माण को राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए अनिवार्य शर्त माना गया है।
तीन मानदंडों का महत्व
सीपीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ये तीनों मानदंड एक-दूसरे के पूरक हैं और नए युग में अच्छे अधिकारियों की परिभाषा को सटीक रूप से रेखांकित करते हैं। पार्टी के आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक विकास के मिशन को आगे बढ़ाने में इन मानदंडों की भूमिका केंद्रीय बताई गई है।
निष्ठा: दृढ़ विश्वास और शुद्ध आकांक्षा
'निष्ठा' का अर्थ है दृढ़ राजनीतिक विश्वास और शुद्ध मूल आकांक्षा बनाए रखना। इसके तहत अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सदैव लोगों की खुशहाली और राष्ट्र के पुनरुत्थान के सीपीसी के मिशन का पालन करें और पार्टी एवं जनता के मूलभूत हितों को सर्वोपरि रखें।
सत्यनिष्ठा: पारदर्शी और निष्पक्ष आचरण
'सत्यनिष्ठा' के मानदंड के अंतर्गत सार्वजनिक और निजी हितों के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक है। सीपीसी के अनुशासन और नियमों का कड़ाई से पालन करना, प्रलोभनों से बचना, पक्षपात न करना और व्यक्तिगत लाभ की तलाश न करना — ये इस मानदंड के प्रमुख पहलू हैं। सत्ता का निष्पक्ष प्रयोग और कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वाह इसके मूल में है।
जिम्मेदारी: लगन और व्यावहारिकता
'जिम्मेदारी' का तात्पर्य है लगन और व्यावहारिकता के साथ काम करना तथा सुधार संबंधी चुनौतियों, लोगों की समस्याओं और कठिन कार्यों का सामना करते समय पीछे न हटना। इसका अर्थ है जनता की तत्काल जरूरतों और चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाना।
चयन नीति और अस्वीकृति के मानदंड
सीपीसी के कर्मियों के चयन और नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं: यदि निष्ठा मानकों के अनुरूप नहीं है, तो चाहे उम्मीदवार कितना भी सक्षम हो, उसे नियुक्त नहीं किया जाएगा। यदि ईमानदारी में गंभीर खामियाँ हैं, तो उसे सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया जाएगा। केवल कानून का पालन करने वाला लेकिन औसत दर्जे का अधिकारी भी आधुनिक शासन की भारी जिम्मेदारी वहन करने में असमर्थ माना जाएगा।
गौरतलब है कि यह ढाँचा ऐसे समय में सामने आया है जब चीन अपने शासन तंत्र को दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप पुनर्गठित करने पर ज़ोर दे रहा है। इन मानदंडों का क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।