दक्षिण कोरिया: नेशनल असेंबली स्पीकर चो जोंग-सिक का संकल्प — 2028 से पहले संविधान संशोधन पूरा करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के नवनिर्वाचित नेशनल असेंबली स्पीकर चो जोंग-सिक ने 28 जुलाई 2026 को सोल में पदभार ग्रहण के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में संविधान संशोधन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संसद का कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस घोषणा को दक्षिण कोरियाई राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
द्विदलीय समिति का गठन होगा
स्पीकर चो ने कहा, 'संविधान सुधार पर चर्चा को अगले वर्ष गति देने के लिए द्विदलीय सहमति से एक विशेष संसदीय समिति बनाई जाएगी। मैं संविधान दिवस पर किए गए अपने वादे के अनुसार शांतिपूर्ण और दृढ़ तरीके से संविधान संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाऊंगा।' गौरतलब है कि चो ने 17 जुलाई 2026 को संविधान दिवस के अवसर पर भी यही प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
प्रस्तावित संशोधनों में क्या शामिल
कथित तौर पर प्रस्तावित संशोधनों में तीन प्रमुख बिंदु हैं — राष्ट्रपति की मार्शल लॉ घोषित करने की शक्तियों पर संसदीय नियंत्रण को मजबूत करना; 18 मई 1980 के लोकतांत्रिक आंदोलन की भावना को संविधान की प्रस्तावना में शामिल करना; और चुनाव प्रबंधन प्रणाली में व्यापक सुधार। ये प्रस्ताव दक्षिण कोरियाई लोकतंत्र के इतिहास में संवेदनशील माने जाते हैं।
3 दिसंबर को 'जन संप्रभुता दिवस' बनाने की पहल
स्पीकर चो ने यह भी घोषणा की कि वे 3 दिसंबर को आधिकारिक रूप से 'जन संप्रभुता दिवस' के रूप में नामित कराने का प्रयास करेंगे। यह तारीख पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा 2024 में मार्शल लॉ लागू करने के असफल प्रयास की वर्षगांठ है। चो के अनुसार, यह वह दिन था जब दक्षिण कोरियाई जनता ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाई।
राष्ट्रपति कार्यकाल और पुनर्चुनाव का सवाल
दक्षिण कोरिया के मौजूदा संविधान में राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष निर्धारित है और पुनर्चुनाव की अनुमति नहीं है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने अपने चुनाव अभियान में प्रस्ताव रखा था कि संशोधन के ज़रिये राष्ट्रपति को चार-चार वर्ष के दो कार्यकाल की अनुमति दी जाए। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि यदि संशोधन लागू हुआ तो वे स्वयं पुनर्चुनाव के पात्र नहीं होंगे। स्पीकर चो ने इस प्रश्न पर कहा कि यह निर्णय अंततः जनता का होगा।
उत्तर कोरिया संवाद पर संयमित रुख
कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की संभावनाओं पर चो ने संसद स्तर पर धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी की बजाय उत्तर कोरिया के साथ संवाद के रास्ते तलाशे जाएंगे। इससे पहले उन्होंने उत्तर कोरिया से मानवीय सहायता और कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान बिछड़े परिवारों के पुनर्मिलन जैसे मुद्दों पर बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत की अपील की थी। यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव लंबे समय से बना हुआ है।