दक्षिण कोरिया में न्यायिक सुधार: कैबिनेट ने अभियोजकों की जांच शक्ति खत्म करने वाला कानून मंजूर किया
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की कैबिनेट ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक न्यायिक सुधार कानून को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अभियोजकों (prosecutors) का सीधे आपराधिक मामलों की जांच करने का अधिकार लगभग समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस कदम को 'ज्यूडिशियल नॉर्मलाइजेशन' — यानी न्यायिक व्यवस्था को अधिक संतुलित और आधुनिक बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम — करार दिया।
मुख्य घटनाक्रम
कैबिनेट ने क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट में संशोधन को औपचारिक स्वीकृति दी, जो पिछले सप्ताह नेशनल असेंबली से पारित हुआ था। उल्लेखनीय है कि मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने इस विधेयक पर मतदान का बहिष्कार किया था। संशोधन के लागू होने के बाद भविष्य में अधिकांश आपराधिक मामलों की प्रत्यक्ष जांच पुलिस करेगी, जबकि अभियोजन पक्ष मुख्यतः मुकदमा चलाने और कानूनी कार्रवाई तक सीमित रहेगा।
राष्ट्रपति ली का पक्ष
कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति ली ने कहा, 'वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था में बदलाव का समय आ गया है, जिसमें अभियोजन पक्ष के पास जांच और अभियोजन, दोनों की व्यापक शक्तियाँ थीं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य इन दोनों अधिकारों को अलग-अलग संस्थाओं के बीच बाँटना है, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। राष्ट्रपति ने यह भी कहा, 'यह सुधार किसी संस्था को कमज़ोर करने के लिए नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसियों की शक्तियों में बदलाव कर न्यायिक प्रणाली को कमज़ोर कर रही है। विपक्ष ने राष्ट्रपति ली से विधेयक पर वीटो लगाने की माँग भी की थी, जिसे नकार दिया गया।
क्यों अहम है यह बदलाव
दक्षिण कोरिया में दशकों से अभियोजकों के पास जांच और मुकदमा चलाने — दोनों की शक्तियाँ एक साथ थीं। राष्ट्रपति ली के अनुसार, इस व्यवस्था का कभी-कभी दुरुपयोग हुआ है — कुछ मामलों को दबाने या लक्षित करने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया गया। यह सुधार इसी असंतुलन को ठीक करने का प्रयास है। गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीति में सत्ता और न्यायिक स्वायत्तता को लेकर तनाव चरम पर है।
आगे क्या होगा
कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह कानून अब लागू होने की प्रक्रिया में है। विपक्षी दल कानूनी और संसदीय रास्तों से इसे चुनौती देने की तैयारी में बताया जा रहा है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के क्रियान्वयन में पुलिस की क्षमता और संसाधन एक बड़ी परीक्षा होंगे।