4 अगस्त 2026
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दक्षिण कोरिया में न्यायिक सुधार: कैबिनेट ने अभियोजकों की जांच शक्ति खत्म करने वाला कानून मंजूर किया

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दक्षिण कोरिया में न्यायिक सुधार: कैबिनेट ने अभियोजकों की जांच शक्ति खत्म करने वाला कानून मंजूर किया

सारांश

दक्षिण कोरिया में दशकों पुरानी व्यवस्था बदल गई — अभियोजकों से जांच का अधिकार छिन गया। राष्ट्रपति ली जे म्युंग इसे 'ज्यूडिशियल नॉर्मलाइजेशन' बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे न्यायिक प्रणाली को कमज़ोर करने की कोशिश करार दे रहा है।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया की कैबिनेट ने 4 अगस्त 2026 को क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट संशोधन को मंजूरी दी।
संशोधन के तहत अभियोजकों का सीधे आपराधिक जांच करने का अधिकार लगभग समाप्त होगा; अधिकांश जांच अब पुलिस करेगी।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इसे 'ज्यूडिशियल नॉर्मलाइजेशन' बताते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने का लक्ष्य बताया।
मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने नेशनल असेंबली में विधेयक का बहिष्कार किया और राष्ट्रपति से वीटो की माँग की थी।
विपक्ष का आरोप है कि यह सुधार न्यायिक प्रणाली को कमज़ोर करने का प्रयास है।

दक्षिण कोरिया की कैबिनेट ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक न्यायिक सुधार कानून को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अभियोजकों (prosecutors) का सीधे आपराधिक मामलों की जांच करने का अधिकार लगभग समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस कदम को 'ज्यूडिशियल नॉर्मलाइजेशन' — यानी न्यायिक व्यवस्था को अधिक संतुलित और आधुनिक बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम — करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

कैबिनेट ने क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट में संशोधन को औपचारिक स्वीकृति दी, जो पिछले सप्ताह नेशनल असेंबली से पारित हुआ था। उल्लेखनीय है कि मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने इस विधेयक पर मतदान का बहिष्कार किया था। संशोधन के लागू होने के बाद भविष्य में अधिकांश आपराधिक मामलों की प्रत्यक्ष जांच पुलिस करेगी, जबकि अभियोजन पक्ष मुख्यतः मुकदमा चलाने और कानूनी कार्रवाई तक सीमित रहेगा।

राष्ट्रपति ली का पक्ष

कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति ली ने कहा, 'वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था में बदलाव का समय आ गया है, जिसमें अभियोजन पक्ष के पास जांच और अभियोजन, दोनों की व्यापक शक्तियाँ थीं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य इन दोनों अधिकारों को अलग-अलग संस्थाओं के बीच बाँटना है, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। राष्ट्रपति ने यह भी कहा, 'यह सुधार किसी संस्था को कमज़ोर करने के लिए नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।'

विपक्ष की प्रतिक्रिया

मुख्य विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी (PPP) ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसियों की शक्तियों में बदलाव कर न्यायिक प्रणाली को कमज़ोर कर रही है। विपक्ष ने राष्ट्रपति ली से विधेयक पर वीटो लगाने की माँग भी की थी, जिसे नकार दिया गया।

क्यों अहम है यह बदलाव

दक्षिण कोरिया में दशकों से अभियोजकों के पास जांच और मुकदमा चलाने — दोनों की शक्तियाँ एक साथ थीं। राष्ट्रपति ली के अनुसार, इस व्यवस्था का कभी-कभी दुरुपयोग हुआ है — कुछ मामलों को दबाने या लक्षित करने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया गया। यह सुधार इसी असंतुलन को ठीक करने का प्रयास है। गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीति में सत्ता और न्यायिक स्वायत्तता को लेकर तनाव चरम पर है।

आगे क्या होगा

कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह कानून अब लागू होने की प्रक्रिया में है। विपक्षी दल कानूनी और संसदीय रास्तों से इसे चुनौती देने की तैयारी में बताया जा रहा है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के क्रियान्वयन में पुलिस की क्षमता और संसाधन एक बड़ी परीक्षा होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पुलिस के पास उन जटिल मामलों को संभालने की क्षमता और स्वायत्तता है जो अब तक अभियोजन के दायरे में थे। राष्ट्रपति ली जे म्युंग की सरकार पर विपक्ष का आरोप है कि यह सुधार राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर आया है — जब सत्ता और जांच एजेंसियों के बीच तनाव अपने चरम पर है। जांच और अभियोजन को अलग करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुशासन की मानक प्रथा है, लेकिन इसकी सफलता क्रियान्वयन की निष्पक्षता पर टिकी है — और यही वह पहलू है जिस पर दक्षिण कोरिया की जनता और विपक्ष की पैनी नज़र रहेगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया के नए न्यायिक सुधार कानून में क्या बदला है?
नए क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट संशोधन के तहत अभियोजकों का सीधे आपराधिक मामलों की जांच करने का अधिकार लगभग समाप्त हो जाएगा। अब अधिकांश जांच पुलिस करेगी, जबकि अभियोजन पक्ष मुकदमा चलाने तक सीमित रहेगा।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस सुधार को क्यों जरूरी बताया?
राष्ट्रपति ली ने कहा कि दशकों से अभियोजकों के पास जांच और अभियोजन दोनों की व्यापक शक्तियाँ थीं, जिनका कभी-कभी दुरुपयोग हुआ। उनके अनुसार यह सुधार जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शक्तियों को अलग-अलग संस्थाओं में बाँटने का प्रयास है।
विपक्षी दल पीपल पावर पार्टी ने इसका विरोध क्यों किया?
पीपल पावर पार्टी (PPP) का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसियों की शक्तियों में बदलाव कर न्यायिक प्रणाली को कमज़ोर कर रही है। विपक्ष ने नेशनल असेंबली में विधेयक का बहिष्कार किया और राष्ट्रपति से वीटो की माँग की थी।
यह कानून कब से लागू होगा और आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह कानून अब लागू होने की प्रक्रिया में है। विपक्षी दल कानूनी और संसदीय रास्तों से इसे चुनौती देने की तैयारी में बताया जा रहा है।
इस बदलाव से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
आम नागरिकों के लिए इसका अर्थ है कि आपराधिक शिकायतों की जांच अब पुलिस करेगी, न कि अभियोजक। समर्थकों का कहना है कि इससे व्यवस्था अधिक निष्पक्ष होगी, जबकि आलोचकों को चिंता है कि पुलिस के पास जटिल मामलों की जांच की पर्याप्त क्षमता नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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