दक्षिण कोरिया: राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, संचार से सुरक्षा तक नई नियुक्तियाँ
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने अपने पाँच वर्षीय कार्यकाल के दूसरे वर्ष में प्रवेश करते हुए 21 जून 2026 को प्रशासन में व्यापक फेरबदल किया है। इस फेरबदल में वरिष्ठ सचिवों से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों तक कई अहम नियुक्तियाँ की गई हैं, जिनका उद्देश्य शासन-तंत्र और जनसंपर्क को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दक्षिण कोरिया की राजनीति पिछले डेढ़ वर्ष से उथल-पुथल के दौर से गुज़र रही है।
मुख्य नियुक्तियाँ
राष्ट्रपति कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ कांग हुन-सिक ने रविवार को नई नियुक्तियों की घोषणा की। योनहाप न्यूज एजेंसी के पूर्व सीईओ और अध्यक्ष सेओंग जी-होंग को राष्ट्रपति का संचार एवं जनसंपर्क सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, पूर्व वरिष्ठ अभियोजक हान चान-सिक को नागरिक मामलों का सचिव बनाया गया है।
देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन 'कोरियन कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स' की पूर्व उपाध्यक्ष किम क्यॉन्ग-जा को सामाजिक मामलों की सचिव नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा मोर्चे पर, राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी सांग की-हो को प्रथम उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पूर्व सेना कमांडर कांग गन-जैक को तृतीय उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है।
संचार सचिव की विशेषज्ञता पर ज़ोर
चीफ ऑफ स्टाफ कांग हुन-सिक ने नए संचार सचिव सेओंग जी-होंग को तीन दशकों के अनुभव वाला अनुभवी पत्रकार बताया। उन्होंने कहा, 'उनका कार्य सरकार और जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना और नीतियों को सरल रूप में जनता तक पहुँचाना होगा।' गौरतलब है कि मीडिया पृष्ठभूमि वाले किसी व्यक्ति को संचार सचिव बनाना राष्ट्रपति ली की जनसंपर्क रणनीति में बदलाव का संकेत देता है।
समुद्री मंत्रालय में भी बदलाव
समुद्री मामलों के मंत्रालय में भी फेरबदल किया गया है, जहाँ वरिष्ठ अधिकारी नाम जे-होन को उप मंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें आर्कटिक शिपिंग रूट्स के विस्तार और दक्षिण कोरिया को एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया जा रहा है।
यूरोप दौरे के बाद बड़ा कदम
यह फेरबदल राष्ट्रपति ली जे म्युंग के 10 दिवसीय यूरोप दौरे के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने बेल्जियम, इटली और फ्रांस की यात्रा की। इटली में राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। इसके अलावा उन्होंने वेटिकन में पोप लियो XIV से भी भेंट की, जहाँ कोरियाई प्रायद्वीप में शांति प्रयासों के प्रति वेटिकन के समर्थन की पुष्टि की गई।
यह यूरोपीय दौरा फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी के साथ समाप्त हुआ, जहाँ दक्षिण कोरिया ने आमंत्रित देश के रूप में लगातार दूसरे वर्ष हिस्सा लिया। कूटनीतिक सफलताओं के बाद घरेलू प्रशासनिक ढाँचे को मज़बूत करना राष्ट्रपति ली की प्राथमिकता सूची में ऊपर दिखती है।
आगे की राह
नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस राजनीतिक अस्थिरता को थामना होगी जो पिछले डेढ़ वर्ष से दक्षिण कोरिया की राजनीति को प्रभावित कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि श्रमिक संगठन की पृष्ठभूमि वाली किम क्यॉन्ग-जा की नियुक्ति सामाजिक संवाद को बेहतर बनाने की कोशिश है, जबकि सुरक्षा पदों पर अनुभवी अधिकारियों की तैनाती उत्तर कोरिया से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए की गई प्रतीत होती है।