ट्रंप-किम मुलाकात की अटकलों के बीच दक्षिण कोरिया में सुरक्षा नीति पर सियासी संग्राम, विपक्ष का राष्ट्रपति ली पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के सोल में 20 अगस्त 2026 को सुरक्षा नीति को लेकर तीखा राजनीतिक टकराव सामने आया, जब मुख्य विपक्षी दल के नेता जांग डोंग-ह्योक ने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग पर सीधा हमला बोला। यह विवाद तब उभरा जब राष्ट्रपति ली ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती के अमेरिकी फैसले का खुलकर स्वागत किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से इसी वर्ष मुलाकात करने का संकेत दिया है।
विपक्ष का हमला: 'सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था — सब दाँव पर'
विपक्षी नेता जांग डोंग-ह्योक ने राष्ट्रपति ली के रुख को 'अभूतपूर्व नैतिक जीत' बताने पर कड़ी आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, जांग ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक साथ सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था — तीनों मोर्चों पर ढिलाई बरती है। उन्होंने विशेष रूप से दो मुद्दों का उल्लेख किया: अमेरिका के मध्य पूर्व सैन्य अभियान में दक्षिण कोरिया की अनुपस्थिति और अमेरिका में निवेश में देरी। जांग के अनुसार, इन्हीं कारणों से वाशिंगटन के साथ संबंधों में तनाव पैदा हुआ है।
जांग ने यहाँ तक कहा कि यदि राष्ट्रपति ली स्वयं को ट्रंप और किम के बीच 'शांति दूत' के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करें, तो भी दोनों नेता शायद इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव और टैरिफ में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर दक्षिण कोरियाई जनता और कंपनियों पर पड़ेगा।
सैन्य अभ्यासों में कटौती: रणनीतिक बदलाव या कूटनीतिक संकेत?
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास लंबे समय से प्योंगयांग को रोकने की रणनीति का केंद्रीय स्तंभ रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का इन अभ्यासों में कमी का फैसला महज सैन्य गतिविधियों में बदलाव नहीं माना जा रहा — विश्लेषकों के अनुसार, इसे उत्तर कोरिया के साथ संभावित कूटनीतिक संपर्क की दिशा में एक सुविचारित संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने इस फैसले को कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति की दिशा में ट्रंप का महत्वपूर्ण कदम बताया। हालाँकि विपक्ष का तर्क है कि सैन्य अभ्यासों में कमी से उत्तर कोरिया को रणनीतिक लाभ मिल सकता है और अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
परमाणु हथियारों पर अनुमानों में अंतर
इस पूरे घटनाक्रम में परमाणु हथियारों की संख्या को लेकर भी दो अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने प्योंगयांग के पास 80 से 120 परमाणु हथियार होने का अनुमान व्यक्त किया है। यह अंतर खुद इस बात को रेखांकित करता है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर खुफिया आकलन कितने जटिल और विवादास्पद हैं।
चीन की 'रचनात्मक भूमिका' का दावा
इसी बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोल की अपनी यात्रा के दौरान कहा कि बीजिंग कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रखने में अपनी 'रचनात्मक भूमिका' निभाता रहेगा। गौरतलब है कि चीन परंपरागत रूप से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा राजनयिक संरक्षक रहा है, और वांग यी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक हलचल अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
ट्रंप-किम की संभावित मुलाकात और सैन्य अभ्यासों में कटौती के फैसले ने दक्षिण कोरिया की घरेलू राजनीति में एक नई दरार खोल दी है। राष्ट्रपति ली और विपक्ष के बीच यह मतभेद न केवल सुरक्षा नीति तक सीमित है, बल्कि इसमें अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध, टैरिफ और गठबंधन की दीर्घकालिक दिशा भी शामिल है। आने वाले हफ्तों में ट्रंप-किम वार्ता की कोई भी प्रगति इस आंतरिक बहस को और तेज कर सकती है।