9 में से 7 'प्लैनेटरी बाउंड्री' टूटीं: पृथ्वी की जीवन-व्यवस्था गंभीर संकट में — वैज्ञानिक रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पृथ्वी की 9 'प्लैनेटरी बाउंड्री' में से 7 अब सुरक्षित सीमा से बाहर जा चुकी हैं और उनमें से कई पर दबाव अब तक के सबसे खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है — यह चेतावनी पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के नेतृत्व में करीब 60 वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई ताज़ा रिपोर्ट में दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणालियों में बड़े पैमाने पर स्थायी और संभावित रूप से अपरिवर्तनीय बदलाव का जोखिम तेज़ी से बढ़ रहा है।
क्या होती है 'प्लैनेटरी बाउंड्री'
'प्लैनेटरी बाउंड्री' उन प्रमुख पर्यावरणीय प्रणालियों और प्रक्रियाओं की सीमाएँ हैं, जिनके भीतर रहकर पृथ्वी मानव सभ्यता के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और सुरक्षित परिस्थितियाँ बनाए रख सकती है। वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन, जैवमंडल की अखंडता, भूमि उपयोग, मीठे पानी में बदलाव, पोषक तत्वों के चक्र में व्यवधान, नए प्रदूषकों व रासायनिक पदार्थों का फैलाव तथा समुद्री अम्लीकरण को उन सात क्षेत्रों में शामिल किया है, जहाँ खतरे की स्थिति पैदा हो चुकी है।
इस रिपोर्ट में पहली बार समुद्री अम्लीकरण को भी उन सीमाओं में शामिल किया गया है जिन्हें सुरक्षित दायरे से बाहर माना गया है। वायुमंडल में बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड को महासागर बड़ी मात्रा में अवशोषित करते हैं, जिससे समुद्री जल अधिक अम्लीय होता जा रहा है और उन जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है, जो अपने खोल या कंकाल के लिए कैल्शियम कार्बोनेट पर निर्भर हैं।
कहाँ दिखे सुधार के संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में केवल दो क्षेत्रों — समतापमंडलीय ओजोन परत के क्षरण और वायुमंडलीय एरोसोल — में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। हालाँकि वायु प्रदूषण की समस्या दुनिया के अनेक हिस्सों में अभी भी गंभीर बनी हुई है, इसलिए इसे पूर्ण सफलता नहीं कहा जा सकता।
गौरतलब है कि आधुनिक मानव सभ्यता पिछले करीब 10,000 वर्षों से अपेक्षाकृत स्थिर जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रही है। लेकिन जीवाश्म ईंधन जलाने से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों, प्लास्टिक समेत अन्य प्रदूषकों और प्राकृतिक आवासों के बड़े पैमाने पर विनाश ने इन प्राकृतिक प्रणालियों पर भारी दबाव डाल दिया है।
अमेज़न और महासागरों पर विशेष चिंता
रिपोर्ट में अमेज़न वर्षावन को लेकर विशेष चेतावनी दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विशाल कार्बन भंडार के एक ऐसे मोड़ पर पहुँचने की आशंका है जहाँ इसके कुछ हिस्से वर्षावन से सवाना जैसे पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकते हैं। ऐसा होने पर वैश्विक जलवायु स्थिरता, खाद्य एवं जल सुरक्षा तथा मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जंगलों और महासागरों की वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता भी बढ़ते तापमान और अन्य पर्यावरणीय दबावों के कारण कमज़ोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। इसी तरह, जंगलों, आर्द्रभूमियों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों को कृषि तथा शहरी विस्तार के लिए लगातार परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रिपोर्ट के प्रमुख लेखक बोरिस साक्सचेव्स्की ने कहा कि स्थिति का आकलन एकदम स्पष्ट है — सुरक्षित दायरे से बाहर जा चुकी हर 'प्लैनेटरी बाउंड्री' पर दबाव बढ़ रहा है। उनके अनुसार इसका अर्थ है कि बड़े पैमाने पर स्थायी और संभावित रूप से अपरिवर्तनीय बदलावों का जोखिम बढ़ रहा है, जबकि मानवता के पास इन समस्याओं से निपटने की उपलब्ध गुंजाइश लगातार सिकुड़ रही है।
जलवायु वैज्ञानिक और रिपोर्ट के सह-लेखक जोहान रॉकस्ट्रॉम ने कहा कि मानवता के पास स्थिति को बदलने के लिए ज्ञान और क्षमता अभी भी मौजूद है, लेकिन इसके लिए पृथ्वी की सभी 'प्लैनेटरी बाउंड्री' को फिर से सुरक्षित दायरे में लाने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाना अनिवार्य है। वैज्ञानिक यह भी रेखांकित करते हैं कि इन सभी समस्याओं को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणालियाँ परस्पर जुड़ी हुई हैं।
वैश्विक चरम मौसम घटनाओं से जुड़ा संदर्भ
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम की घटनाओं ने जलवायु संकट की गंभीरता को रेखांकित किया है। पाकिस्तान में भीषण बाढ़, यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी और जंगलों की आग, तथा तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ जैसी घटनाएँ पर्यावरणीय बदलावों की गति को दर्शाती हैं। इसके अलावा महासागरों में भी रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया है। आने वाले वर्षों में यह रिपोर्ट वैश्विक जलवायु नीति-निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज़ बन सकती है।