विश्व महासागर दिवस 2025: बड़ी मछलियों की 90% आबादी खत्म, 2040 तक 3.7 करोड़ टन प्लास्टिक का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
विश्व महासागर दिवस (8 जून) पर इस वर्ष वैश्विक ध्यान उस मौन संकट की ओर है जो पृथ्वी की 70 प्रतिशत से अधिक सतह को ढकने वाले महासागरों को भीतर से खोखला कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, बड़ी मछलियों की 90 प्रतिशत आबादी समाप्त हो चुकी है और 50 प्रतिशत प्रवाल भित्तियाँ नष्ट हो चुकी हैं। यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय भी है — दुनिया भर में 1 अरब से अधिक लोगों के लिए समुद्र प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।
महासागर: जीवन का आधार, संकट का केंद्र
महासागर पृथ्वी की कम से कम 50 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और ग्रह की अधिकांश जैव विविधता के आश्रयस्थल हैं। इसके बावजूद मानवजनित प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और जलवायु परिवर्तन की तिहरी मार ने समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। गौरतलब है कि जहाँ इंसान चंद्रमा पर पानी की खोज में लाखों किलोमीटर दूर जा रहा है, वहीं पृथ्वी पर मौजूद विशाल जलसंपदा को अनियंत्रित दोहन की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
प्लास्टिक प्रदूषण: 2040 तक 3.7 करोड़ टन का खतरा
वर्तमान में प्लास्टिक कचरा पृथ्वी के लगभग हर कोने में पहुँच चुका है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो 2040 तक हर साल समुद्र में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक की मात्रा 3.7 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुँच सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब समुद्री जीव और पारिस्थितिक तंत्र पहले से ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
आर्थिक महत्व और रोज़गार
महासागर केवल पर्यावरण का विषय नहीं है — यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। अनुमान है कि 2030 तक महासागर-आधारित उद्योगों में 4 करोड़ लोगों को रोज़गार मिलेगा। इस व्यापक आर्थिक योगदान को देखते हुए समुद्री संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि आर्थिक अनिवार्यता भी है।
विश्व महासागर दिवस का इतिहास
विश्व महासागर दिवस की अवधारणा पहली बार 8 जून 1992 को रियो डी जनेरियो में आयोजित ग्लोबल फोरम के दौरान सामने आई थी। यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) के समानांतर हुआ था, जहाँ गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज को पर्यावरणीय मुद्दों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। इसके बाद 2008 में कनाडा के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर 8 जून को आधिकारिक रूप से 'विश्व महासागर दिवस' के रूप में मान्यता दी। पहला आधिकारिक विश्व महासागर दिवस 2009 में मनाया गया, जिसकी थीम थी — 'हमारे महासागर, हमारी जिम्मेदारी'।
संरक्षण की दिशा में आगे
परंपरागत रूप से यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित होता है। कोविड-19 के कारण 2020 में यह पहली बार डिजिटल रूप में हुआ, जबकि 2022 में पहला हाइब्रिड आयोजन हुआ जिसमें प्रत्यक्ष और आभासी दोनों घटक शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि महासागर के साथ मानवता का संबंध अब केवल दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण और पुनर्जीवन का होना चाहिए — और इसके लिए वैश्विक स्तर पर संतुलित एवं टिकाऊ प्रयास अपरिहार्य हैं।