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डूबने से हर साल 3 लाख मौतें: WHO ने लॉन्च किया 'PROTECT' पैकेज, 7 उपायों से बचाई जा सकती हैं लाखों जानें

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डूबने से हर साल 3 लाख मौतें: WHO ने लॉन्च किया 'PROTECT' पैकेज, 7 उपायों से बचाई जा सकती हैं लाखों जानें

सारांश

हर साल 3 लाख मौतें, 90% निम्न-मध्यम आय देशों में — और जलवायु परिवर्तन खतरा और बढ़ा रहा है। WHO ने 'PROTECT' पैकेज के ज़रिए 7 व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं, जिन्हें घाना में पहले लागू किया जाएगा। बच्चों को तैराकी प्रशिक्षण और बाढ़-पूर्व तैयारी इसके केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार दुनिया भर में हर साल करीब 3 लाख लोग डूबने से मरते हैं, जिनमें सर्वाधिक 5 से 14 वर्ष आयु के बच्चे हैं।
WHO ने 'PROTECT' नाम से 7 उपायों का तकनीकी पैकेज जारी किया, जिसे घाना में लॉन्च किया गया।
डूबने की 90% से अधिक घटनाएँ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।
ब्रिटेन के अध्ययन के अनुसार तापमान में 1°C की वृद्धि से डूबने की मौतों में 7.2% बढ़ोतरी होती है; 25°C से अधिक तापमान पर खतरा पाँच गुना तक बढ़ जाता है।
घाना में हर साल करीब 1,100 लोगों की डूबने से मौत — यानी औसतन प्रतिदिन तीन जानें।
इस वर्ष विश्व डूबने से बचाव दिवस ( 25 जुलाई ) की थीम: 'हालात बदलने के लिए एकजुट हों।'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में हर साल करीब 3 लाख लोग डूबने के कारण अपनी जान गंवाते हैं — और इनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की है। 5 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में डूबना आज भी शामिल है। इन चिंताजनक आंकड़ों के मद्देनज़र WHO ने 25 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व डूबने से बचाव दिवस से पहले एक नया तकनीकी पैकेज जारी किया है, जिसे अफ्रीकी देश घाना में लॉन्च किया गया।

क्या है 'PROTECT' पैकेज

WHO ने 'PROTECT' नाम से सात प्रमुख उपायों का एक व्यापक पैकेज तैयार किया है। इसका मकसद सरकारों, स्थानीय प्रशासनों और समुदायों को ऐसे व्यावहारिक कदम सुझाना है जो डूबने से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोक सकें।

पहला उपाय है — पानी के आसपास सुरक्षित बुनियादी ढाँचा तैयार करना, ताकि लोग अनजाने में पानी में न गिरें। दूसरा, हादसे की स्थिति में तत्काल बचाव और CPR जैसी प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को मज़बूत करना। तीसरा, मछुआरों और नाविकों जैसे उन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जो रोज़गार के लिए पानी के निकट काम करते हैं।

चौथा उपाय जल परिवहन को सुरक्षित बनाना है — नाव और फेरी सेवाओं में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना। पाँचवाँ और अत्यंत महत्त्वपूर्ण सुझाव है कि बच्चों को स्कूल स्तर पर तैराकी और जल-सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए। छठा, छोटे बच्चों की निगरानी की बेहतर व्यवस्था हो ताकि वे अकेले पानी के पास न जाएँ। सातवाँ उपाय है बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्व-तैयारी, क्योंकि ऐसे समय में डूबने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सबसे अधिक प्रभावित कौन

WHO के अनुसार, डूबने की 90% से अधिक घटनाएँ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। ये हादसे मुख्यतः नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं, घरों में पानी के बड़े भंडारों और स्विमिंग पूलों में घटित होते हैं। गौरतलब है कि WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि 'हर डूबने की घटना एक त्रासदी है, और राहत की बात यह है कि इनमें से अधिकांश को रोका जा सकता है।' उन्होंने ज़ोर दिया कि इसके लिए केवल स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि शिक्षा, परिवहन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।

जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा है खतरा

WHO ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन डूबने की घटनाओं को और गंभीर बना रहा है। दुनिया भर में बाढ़, तूफान और हीटवेव जैसी चरम मौसमी घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

ब्रिटेन में हुई एक अध्ययन का हवाला देते हुए WHO ने बताया कि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ डूबने से होने वाली मौतों में करीब 7.2% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, जिन दिनों तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है, उन दिनों डूबने का जोखिम सामान्य दिनों की तुलना में करीब पाँच गुना तक बढ़ जाता है।

घाना में लॉन्च और ब्लूमबर्ग का समर्थन

WHO ने इस तकनीकी पैकेज को अफ्रीकी देश घाना में लॉन्च करना इसलिए चुना क्योंकि वहाँ हर साल करीब 1,100 लोगों की डूबने से मौत होती है — यानी औसतन हर दिन तीन लोगों की जान जाती है, जिनमें सर्वाधिक बच्चे और युवा हैं। इस अभियान को ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज़ का भी समर्थन मिला है। संस्था का कहना है कि सुझाए गए उपाय पहले से कई देशों में कारगर साबित हो चुके हैं और अब इन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने की ज़रूरत है।

इस वर्ष की थीम और आगे की राह

इस वर्ष विश्व डूबने से बचाव दिवस 2025 की थीम है — 'हालात बदलने के लिए एकजुट हों।' WHO का मानना है कि यदि सरकारें, स्थानीय प्रशासन, स्कूल, परिवार और समुदाय समन्वित प्रयास करें, तो हर साल होने वाली लाखों मौतों को रोका जा सकता है। यह पैकेज उस बहु-क्षेत्रीय सहयोग का खाका है जिसे WHO अब वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने की अपील कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — वे देश जहाँ 90% मौतें होती हैं, वहाँ बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षित जनशक्ति की भारी कमी है। भारत के संदर्भ में देखें तो ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों और नदियों के पास सुरक्षा संरचनाओं का अभाव और स्कूलों में तैराकी प्रशिक्षण की लगभग अनुपस्थिति इस समस्या को और गहरा करती है। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए यह पैकेज समय पर आया है, लेकिन बिना राष्ट्रीय नीतिगत प्रतिबद्धता और बजट आवंटन के ये सात उपाय कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WHO का 'PROTECT' पैकेज क्या है?
यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी सात-सूत्रीय तकनीकी पैकेज है, जिसका उद्देश्य सरकारों और समुदायों को डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के व्यावहारिक उपाय सुझाना है। इसे 25 जुलाई 2025 के विश्व डूबने से बचाव दिवस से पहले घाना में लॉन्च किया गया।
डूबने से सबसे अधिक खतरा किसे है?
WHO के अनुसार 5 से 14 वर्ष आयु के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में हैं और यह उनकी मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा मछुआरे, नाविक और निम्न-मध्यम आय वाले देशों के ग्रामीण समुदाय भी अत्यधिक प्रभावित हैं।
जलवायु परिवर्तन डूबने की घटनाओं को कैसे बढ़ा रहा है?
ब्रिटेन के एक अध्ययन के अनुसार तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ डूबने से होने वाली मौतों में लगभग 7.2% की बढ़ोतरी होती है। जिन दिनों तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है, उन दिनों डूबने का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में पाँच गुना तक बढ़ जाता है।
WHO ने यह पैकेज घाना में क्यों लॉन्च किया?
घाना में हर साल करीब 1,100 लोगों की डूबने से मौत होती है — यानी प्रतिदिन औसतन तीन जानें जाती हैं, जिनमें बच्चे और युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। WHO ने इसे उच्च-बोझ वाले देश के रूप में चुना ताकि पैकेज की प्रभावशीलता वहाँ प्रदर्शित की जा सके।
PROTECT पैकेज के 7 उपाय कौन-से हैं?
सात उपाय हैं: (1) पानी के पास सुरक्षित बुनियादी ढाँचा, (2) बचाव और CPR सुविधाओं को मज़बूत करना, (3) जल-आधारित व्यवसायों में कार्यरत लोगों की सुरक्षा, (4) जल परिवहन को सुरक्षित बनाना, (5) बच्चों को तैराकी प्रशिक्षण, (6) छोटे बच्चों की बेहतर निगरानी, और (7) बाढ़ व प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्व-तैयारी।
राष्ट्र प्रेस
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