रियाद एयरपोर्ट हमले पर मिस्र की कड़ी निंदा, 'अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन' बताया
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। 10 अक्टूबर 2026 को मिस्र के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन' करार दिया। हमलों में एक पायलट सहित तीन सऊदी नागरिकों की मौत हो गई और कई आम नागरिक घायल हो गए।
मिस्र का आधिकारिक बयान
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना आधिकारिक बयान साझा करते हुए कहा, "मिस्र, मित्र राष्ट्र सऊदी अरब के खिलाफ किए गए उन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करता है जिनमें रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट और सऊदी अरब एयरलाइंस के एक विमान को निशाना बनाया गया।" मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह इन हमलों को पूरी तरह खारिज करता है और अपनी सुरक्षा, संप्रभुता तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब द्वारा उठाए जाने वाले सभी कदमों में उसके साथ पूर्ण एकजुटता दिखाता है।
गौरतलब है कि मिस्र ने अपने बयान में किसी विशेष गुट या संगठन का नाम नहीं लिया। हालाँकि रिपोर्टों के अनुसार, ये हमले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए थे।
हमलों का विवरण
सऊदी अरब के जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने बताया कि 6 और 7 अक्टूबर 2026 को आभा और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले किए गए। इन हमलों में दो महिलाओं सहित तीन लोगों की मौत हो गई। गुरुवार को किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुए नवीनतम हमले में एक पायलट सहित तीन सऊदी नागरिक मारे गए।
मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि हवाई आवाजाही को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
क्षेत्रीय संदर्भ और महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब यमन में संघर्ष वर्षों से जारी है और हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी बुनियादी ढाँचे पर हमले एक पुनरावर्ती पैटर्न बन चुके हैं। नागरिक हवाई अड्डों पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की दृष्टि से विशेष रूप से गंभीर माना जाता है। मिस्र की यह प्रतिक्रिया अरब जगत में सऊदी अरब के प्रति व्यापक क्षेत्रीय एकजुटता को दर्शाती है।
मिस्र ने अरब देश की सरकार और जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय निंदाओं से यमन संघर्ष पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। सऊदी अरब द्वारा इन हमलों के जवाब में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना अभी बाकी है।