यमन: अदन के राष्ट्रपति भवन पर 5 मिसाइल हमले, हूती पर आरोप; सऊदी हवाई क्षेत्र को भी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन समर्थित यमन सरकार के राष्ट्रपति भवन अल-माशीक पैलेस पर पाँच मिसाइलें दागी गईं। एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी और इस हमले के लिए हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक हताहतों और नुकसान की कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
मिसाइलों ने अदन के क्रेटर जिले में स्थित अल-माशीक पैलेस को निशाना बनाया। मौके पर मौजूद संवाददाताओं के अनुसार, शहर में जोरदार धमाके सुने गए और महल के आसपास के इलाकों से घना धुआं उठता दिखाई दिया। पड़ोस में रहने वाले निवासियों ने बताया कि इन विस्फोटों से उनके घर हिल गए।
यह राष्ट्रपति भवन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का प्रमुख केंद्र है, जो 2014 के अंत में हूती ताकतों द्वारा राजधानी सना पर कब्जे के बाद से अदन से ही शासन चला रही है।
हूती समूह की चेतावनियाँ
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को फिर से चेतावनी दी कि सऊदी अरब का हवाई क्षेत्र और वहाँ के हवाई अड्डे 'असुरक्षित' हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी मक्का और मदीना जैसे पवित्र मुस्लिम शहरों के ऊपर के हवाई क्षेत्र पर लागू नहीं होती।
एक अलग बयान में सरी ने यह भी कहा कि हूती समूह ने उस दिन सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई हमला नहीं किया और मदीना पर हमले के सऊदी आरोप को खारिज कर दिया।
सऊदी गठबंधन का रुख
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मंगलवार को घोषणा की थी कि वह यमन की हूती-नियंत्रित राजधानी सना में एक विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है। गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि नागरिकों को एक निर्धारित स्थान खाली करने की चेतावनी जल्द ही जारी की जाएगी, हालाँकि उन्होंने स्थान और अभियान के विवरण का खुलासा नहीं किया।
इसके अलावा, गठबंधन ने मंगलवार को ही रियाद के उत्तर में तीन ड्रोन को रोककर नष्ट करने का दावा किया।
यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन 2014 के अंत से जारी गृहयुद्ध में फँसा हुआ है। हूती ताकतों ने उस वर्ष राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। यह सरकार अब अदन से काम करती है और उसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय गठबंधन का समर्थन प्राप्त है।
गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों का सिलसिला तेज हुआ है, जो एक लंबे संघर्ष में नए सिरे से तनाव की ओर इशारा करता है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब गठबंधन सना में एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी की चेतावनी दे चुका है।
आगे की स्थिति
हताहतों और नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अदन स्थित राष्ट्रपति भवन पर यह हमला यमन संकट में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो शांति वार्ता की किसी भी संभावना को और जटिल बना सकता है। आने वाले घंटों में गठबंधन की प्रतिक्रिया और संभावित जवाबी कार्रवाई पर दुनिया की नज़र बनी रहेगी।