सना में सऊदी हवाई हमले, हूती ठिकानों पर निशाना; 24 घंटे में 60 हमलों का दावा
सारांश
मुख्य बातें
यमन की राजधानी सना में 4 अक्टूबर 2026 की देर रात कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जब सऊदी अरब ने हूती समूह के कब्जे वाले शहर पर हवाई हमले किए। हूती समर्थक अल-मसीरा टीवी के अनुसार, इन हमलों में हूती के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
धमाकों का असर — शहर थर्राया
सना के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि रात के अंधेरे में आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई दी और पूरे शहर में एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए। विस्फोटों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इमारतों की खिड़कियाँ हिलने लगीं और भवनों में कंपन महसूस हुआ।
निवासी के शब्दों में, 'धमाके इतने तेज थे कि हमारे पैरों के नीचे जमीन हिलने लगी। ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो। हमारी खिड़कियाँ काँप रही थीं और बच्चे डरकर जाग गए।'
हूती का जवाबी दावा — रियाद में अरामको पर हमला
इन हवाई हमलों से पहले शनिवार को हूती समूह ने दावा किया था कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरामको की एक सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान यमन में 60 हवाई और मिसाइल हमले किए गए। हूती ने इस हमले को यमन पर सऊदी अरब के तेज हुए हमलों का जवाब बताया।
तनाव की जड़ें — समुद्री नाकेबंदी और ज़मीनी लड़ाई
हूती और सऊदी अरब के बीच तनाव उस समय और गहरा गया जब हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया। इसके बाद सीमा पार मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ-साथ हवाई हमलों में भी तेजी आई। सितंबर में हूती और यमन की सरकारी सेना के बीच लड़ाई और भीषण हो गई।
गौरतलब है कि हूती ने 10 सितंबर को लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया और अगले ही दिन रणनीतिक रूप से अहम मय्यून द्वीप पर भी अधिकार जमा लिया — जो इस संघर्ष में हूती की सबसे महत्वपूर्ण ज़मीनी बढ़त मानी जा रही है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि — एक दशक से जारी जंग
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत में तब शुरू हुआ था जब हूती ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। एक दशक से अधिक समय बाद भी यह संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दे रहा।
क्या होगा आगे
हमलों में हताहतों और सटीक निशानों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। मोचा और मय्यून द्वीप पर हूती के कब्जे के बाद लाल सागर में शिपिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक किसी स्थायी युद्धविराम की संभावना नहीं बनती, दोनों पक्षों के बीच यह जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहने की आशंका है।