5 नवंबर 2026
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ईरान ने जर्मन विदेश मंत्री के बयान को बताया 'शर्मनाक', अमेरिका-इजरायल हमले के बचाव पर तीखी प्रतिक्रिया

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ईरान ने जर्मन विदेश मंत्री के बयान को बताया 'शर्मनाक', अमेरिका-इजरायल हमले के बचाव पर तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

तेहरान ने जर्मन विदेश मंत्री के उस बयान को 'शर्मनाक' करार दिया जिसमें ईरान पर अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई को परोक्ष रूप से उचित ठहराया गया। ईरानी प्रवक्ता ने जर्मन कहावत से पलटवार करते हुए 100 अरब यूरो के आर्थिक नुकसान और 'नैतिक पतन' का हवाला दिया।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 5 नवंबर 2026 को जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के बयान को 'शर्मनाक और निम्न स्तर का' बताया।
वाडेफुल ने पॉडकास्ट में कहा कि टकराव का कारण ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम और पड़ोसी देशों में मिलिशिया को समर्थन है।
बाघेई ने याद दिलाया कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने जून 2026 में इजरायल को ईरान पर हमले का 'गंदा काम' करने वाला कहा था।
ईरान के अनुसार इस युद्ध से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को 100 अरब यूरो का नुकसान हो रहा है।
बाघेई ने जर्मन साहित्यिक पात्र 'हंस गुक-इन-दी-लुफ्ट' का हवाला देते हुए जर्मन नीति पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने ईरान पर हुई अमेरिका-इजरायल संयुक्त सैन्य कार्रवाई को परोक्ष रूप से उचित ठहराने का प्रयास किया था। तेहरान ने इस बयान को 'शर्मनाक और निम्न स्तर का' करार देते हुए कहा कि यह वक्तव्य यूरोपीय नेतृत्व के नैतिक पतन को दर्शाता है।

प्रवक्ता बाघेई का तीखा पलटवार

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए जर्मन रुख की आलोचना की। उन्होंने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की उस पुरानी टिप्पणी की भी याद दिलाई जो उन्होंने ईरान पर हुए हमलों के संदर्भ में दी थी।

बाघेई ने लिखा, 'एक समय चांसलर मर्ज ने बड़े उत्साह से कहा था कि इजरायल, ईरान पर हमला करके 'गंदा काम' कर रहा है। लेकिन कुछ ही महीनों बाद, वही चांसलर अब इस बात पर अफसोस जता रहे हैं कि इस युद्ध की वजह से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को 100 अरब यूरो का नुकसान हो रहा है।'

प्रवक्ता ने आगे कहा कि जर्मन विदेश मंत्री भी अब ईरान पर हुए सैन्य हमले को सही ठहराने पर 'मजबूर' दिख रहे हैं। बाघेई के अनुसार, इस रवैये से स्पष्ट होता है कि वे 'न तो मानवीय क्षति और युद्ध अपराधों को महसूस कर पा रहे हैं, और न ही अपने देश व पूरे यूरोप को हो रहे आर्थिक नुकसान को समझ पा रहे हैं।'

जर्मन कहावत से किया करारा वार

बाघेई ने एक जर्मन कहावत — 'नुकसान उठाने से इंसान समझदार बनता है' — का हवाला देते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने जर्मन साहित्यिक पात्र 'हंस गुक-इन-दी-लुफ्ट' (अर्थात लापरवाह व्यक्ति) का उल्लेख करते हुए कहा कि 'कुछ लोगों को कोई भी सबक नहीं सिखाया जा सकता।'

यह भाषाई पलटवार कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है, क्योंकि ईरान ने जर्मनी को उसी की सांस्कृतिक विरासत से जवाब दिया।

वाडेफुल का पॉडकास्ट बयान और विवाद की जड़

विदेश मंत्री वाडेफुल का एक पॉडकास्ट बुधवार को प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने सैन्य हमले को सीधे तौर पर सही नहीं ठहराया, लेकिन कहा कि 'इस टकराव का कारण जाहिर तौर पर ईरान है, जो खुद को परमाणु हथियारों से लैस करने की तैयारी कर रहा है और कई पड़ोसी देशों में ऐसे मिलिशिया समूहों का समर्थन करता है जो उन देशों की संप्रभुता का सम्मान नहीं करते।' ईरान ने इस वक्तव्य की व्याख्या अमेरिका और इजरायल के पक्ष में की।

गौरतलब है कि जून 2026 में चांसलर मर्ज ने इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमलों को लेकर संतुलित बयान देने की कोशिश करते हुए कहा था कि इजरायल 'सभी की तरफ से गंदा काम कर रहा है।' यह बयान उस समय भी विवादास्पद रहा था।

व्यापक संदर्भ: यूरोप और पश्चिम एशिया

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के चलते यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। ईरान के बयान में 100 अरब यूरो के आर्थिक नुकसान का उल्लेख एक महत्वपूर्ण सांकेतिक प्रहार है — यह दर्शाता है कि तेहरान, यूरोपीय देशों को उनके अपने हितों की दृष्टि से उनकी नीतियों के विरोधाभास का आईना दिखाना चाहता है।

आलोचकों का कहना है कि जर्मनी की यह नीति अस्पष्ट है — न पूर्ण निंदा, न पूर्ण समर्थन — जो ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की नज़र में विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।

आगे क्या

इस कूटनीतिक तकरार के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जर्मनी इस बयानबाज़ी पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच यूरोपीय देशों की स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है, और ईरान-जर्मनी के बीच यह वाक्-युद्ध उस व्यापक तनाव का प्रतिबिंब है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर वाडेफुल परोक्ष रूप से उसी हमले को उचित ठहराते हैं। ईरान ने चतुराई से इसी विरोधाभास को हथियार बनाया है। यूरोप के लिए असली संकट यह है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल की नीतियों का मौन समर्थन उन्हें 100 अरब यूरो के आर्थिक नुकसान की कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है, फिर भी कूटनीतिक भाषा बदलने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे। तेहरान का यह पलटवार महज़ कूटनीतिक शब्दबाज़ी नहीं — यह यूरोप को उसकी अपनी नीतिगत लागत का हिसाब दिखाने की रणनीति है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने जर्मन विदेश मंत्री के किस बयान पर आपत्ति जताई?
जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने एक पॉडकास्ट में कहा कि ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव की जड़ में ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम और पड़ोसी देशों में मिलिशिया को समर्थन है। ईरान ने इस बयान को अमेरिका और इजरायल के पक्ष में माना और इसे 'शर्मनाक' करार दिया।
ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने जर्मन चांसलर मर्ज पर क्या आरोप लगाया?
बाघेई ने याद दिलाया कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने जून 2026 में कहा था कि इजरायल ईरान पर हमला करके 'गंदा काम' कर रहा है, लेकिन कुछ ही महीनों बाद वे इस युद्ध से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को 100 अरब यूरो के नुकसान पर अफसोस जता रहे हैं। बाघेई ने इसे नीतिगत विरोधाभास का उदाहरण बताया।
इस विवाद का यूरोप पर क्या आर्थिक असर बताया गया है?
ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण यूरोपीय अर्थव्यवस्था को 100 अरब यूरो का नुकसान हो रहा है। यह आँकड़ा चांसलर मर्ज के हवाले से उद्धृत किया गया, जो स्वयं इस नुकसान पर चिंता जता चुके हैं।
बाघेई ने 'हंस गुक-इन-दी-लुफ्ट' का उल्लेख क्यों किया?
बाघेई ने जर्मन साहित्यिक पात्र 'हंस गुक-इन-दी-लुफ्ट' — जो लापरवाही का प्रतीक है — का उल्लेख व्यंग्यात्मक रूप से किया। इसके साथ जर्मन कहावत 'नुकसान उठाने से इंसान समझदार बनता है' का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को कोई भी सबक नहीं सिखाया जा सकता।
जर्मनी की ईरान नीति को लेकर अब तक क्या विरोधाभास सामने आए हैं?
जून 2026 में चांसलर मर्ज ने इजरायल के ईरान पर हमले को 'गंदा काम' कहा था, जबकि अब विदेश मंत्री वाडेफुल के बयान को ईरान ने उसी हमले का बचाव माना। आलोचकों का कहना है कि जर्मनी की नीति अस्पष्ट और विरोधाभासी रही है, जो क्षेत्रीय शक्तियों की नज़र में उसकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।
राष्ट्र प्रेस
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