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जर्मनी का बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं, 3 जून से लागू

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जर्मनी का बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं, 3 जून से लागू

सारांश

जर्मनी ने भारतीय यात्रियों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की अनिवार्यता खत्म कर दी है। 3 जून से लागू यह नियम चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में हुई भारत यात्रा का प्रत्यक्ष नतीजा है, जिसमें 19 द्विपक्षीय समझौतों के साथ व्यापार, रक्षा और IMEC कॉरिडोर पर सहयोग गहरा हुआ था।

मुख्य बातें

जर्मन दूतावास ने 2 जून को भारतीय यात्रियों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा हटाने की घोषणा की।
नया नियम 3 जून से लागू, फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में अधिसूचित।
यह फैसला चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में हुई भारत यात्रा का परिणाम है।
उस दौरे में भारत-जर्मनी के बीच 19 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।
2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
दोनों देश IMEC कॉरिडोर और रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर साथ काम कर रहे हैं।

जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए बड़ी राहत देते हुए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास ने मंगलवार, 2 जून को घोषणा की कि अब किसी तीसरे देश की यात्रा के दौरान जर्मन हवाई अड्डों पर लेओवर (अस्थायी ठहराव) करने वाले भारतीय यात्रियों को अलग से ट्रांजिट वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नया नियम 3 जून से प्रभावी हो गया है।

आधिकारिक घोषणा और कानूनी प्रक्रिया

जर्मन दूतावास ने अपने बयान में कहा, ‘भारतीय नागरिकों के लिए तथाकथित एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की जरूरत को हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को की गई थी और यह 3 जून से लागू होगी।’ संघीय गणराज्य के सार्वजनिक राजपत्र में इस फैसले को द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम देने वाला कदम बताया गया है।

मर्ज की भारत यात्रा का नतीजा

राजपत्र के अनुसार, यह निर्णय इस वर्ष जनवरी में हुई जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा का प्रत्यक्ष परिणाम है। बयान में कहा गया, ‘यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए फेडरल सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।’ उस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज ने 2024 में दोनों देशों के बीच रिकॉर्ड व्यापार पर संतोष जताया था और 2025 में इस गति के जारी रहने का भरोसा दिखाया था।

19 समझौते और रणनीतिक साझेदारी

विदेश मंत्रालय के अनुसार, उस दौरे में दोनों पक्षों ने व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कुल 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। साथ ही रणनीतिक, आर्थिक और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से कई नीतिगत घोषणाएँ भी की गई थीं। दोनों नेताओं ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के प्रति अपना मजबूत समर्थन दोहराया और इसकी पहली मंत्रिस्तरीय बैठक की प्रतीक्षा जताई।

रक्षा सहयोग पर भी जोर

दोनों नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया था, ‘नेताओं ने एक रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप बनाने के लिए संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया। इससे लंबे समय तक औद्योगिक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें तकनीकी साझेदारी, रक्षा प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट का सहविकसित और सहउत्पादन शामिल है।’ भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को त्वरित मंज़ूरी देने की जर्मन कोशिशों का स्वागत किया।

यात्रियों पर सीधा असर

गौरतलब है कि फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे जर्मन हवाई अड्डे यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए प्रमुख ट्रांजिट केंद्र हैं। नए नियम से व्यापार, पढ़ाई और पर्यटन के सिलसिले में जर्मनी होते हुए अन्य देशों की यात्रा करने वाले हज़ारों भारतीयों को समय और पैसे, दोनों की बचत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कूटनीतिक संकेत बड़ा है — चांसलर मर्ज की सरकार पूर्ववर्ती शॉल्ज़ शासन की तुलना में भारत को कहीं अधिक प्राथमिकता दे रही है। ऐसे समय में जब अमेरिकी और ब्रिटिश वीजा व्यवस्थाएँ भारतीयों के लिए सख़्त होती जा रही हैं, जर्मनी का यह कदम यूरोप के भीतर एक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का संकेत भी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सुगमता शेंगेन कार्य और पर्यटक वीजा प्रक्रियाओं तक भी विस्तारित होती है, जहाँ भारतीय आवेदकों को अब भी महीनों की प्रतीक्षा का सामना करना पड़ता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जर्मनी का नया ट्रांजिट वीजा नियम क्या है?
भारतीय नागरिकों को अब जर्मन हवाई अड्डों पर लेओवर के दौरान अलग से एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी, बशर्ते वे जर्मनी से बाहर निकले बिना किसी तीसरे देश की यात्रा कर रहे हों। यह नियम 3 जून से लागू हो चुका है।
यह नियम कब और कैसे लागू हुआ?
जर्मनी के फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को इसकी अधिसूचना जारी हुई और यह 3 जून से प्रभावी हो गया। नई दिल्ली में जर्मन दूतावास ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
यह फैसला किस कूटनीतिक पृष्ठभूमि में आया है?
यह घोषणा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की इस वर्ष जनवरी में हुई भारत यात्रा का सीधा परिणाम है। उस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मर्ज ने व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
भारतीय यात्रियों को इससे क्या लाभ होगा?
फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे प्रमुख यूरोपीय ट्रांजिट केंद्रों से होकर अमेरिका, लैटिन अमेरिका या अन्य देशों की यात्रा करने वाले भारतीयों को अब अलग से वीजा शुल्क और प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे यात्रा की लागत और समय, दोनों कम होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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