जर्मनी का बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत नहीं, 3 जून से लागू
सारांश
मुख्य बातें
जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए बड़ी राहत देते हुए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास ने 2 जून को मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय यात्रियों को अब जर्मन हवाई अड्डों पर लेओवर के दौरान किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय ट्रांजिट वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नया नियम 3 जून से प्रभावी हो गया है।
आधिकारिक घोषणा और लागू होने की तिथि
जर्मन दूतावास ने अपने बयान में कहा, “भारतीय नागरिकों के लिए तथाकथित एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत को हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को की गई थी और यह 3 जून से लागू होगी।” उल्लेखनीय है कि लेओवर का अर्थ है किसी यात्रा के अंतिम गंतव्य पर पहुँचने से पहले बीच के किसी स्थान पर अस्थायी ठहराव।
मर्ज़ की भारत यात्रा का नतीजा
संघीय गणराज्य के सार्वजनिक राजपत्र के अनुसार, “यह इस वर्ष जनवरी में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का नतीजा है। यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए फेडरल सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज़ ने दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी का स्वागत किया था।
व्यापार और रणनीतिक साझेदारी
दोनों नेताओं ने रेखांकित किया कि 2024 में भारत-जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचा और यह रफ़्तार 2025 तक जारी रहने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 19 समझौते हुए तथा रणनीतिक, आर्थिक और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से कई नीतिगत घोषणाएँ की गईं।
IMEC और रक्षा सहयोग
दोनों नेताओं ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के प्रति अपना समर्थन दोहराया और वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया आकार देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर बल दिया। पहली IMEC मंत्रिस्तरीय बैठक का दोनों पक्षों को इंतज़ार है। संयुक्त बयान के अनुसार, नेताओं ने एक रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप तैयार करने के लिए संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसमें तकनीकी साझेदारी तथा रक्षा प्लेटफ़ॉर्म व उपकरणों का सह-विकास और सह-उत्पादन शामिल है।
भारतीय यात्रियों पर असर
यह फ़ैसला उन हज़ारों भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो फ्रैंकफ़र्ट और म्यूनिख जैसे प्रमुख जर्मन हवाई अड्डों से अमेरिका, कनाडा या लातिन अमेरिका के लिए कनेक्टिंग उड़ानें लेते हैं। गौरतलब है कि भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को त्वरित मंज़ूरी देने की जर्मनी की कोशिशों का भी स्वागत किया है, जो दोनों देशों के बीच गहराते भरोसे का संकेत है।