19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जर्मनी का बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत नहीं, 3 जून से लागू

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जर्मनी का बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत नहीं, 3 जून से लागू

सारांश

जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता हटा दी है। यह कदम जनवरी में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का सीधा नतीजा है, जिसमें 19 समझौतों के साथ रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों की नई बुनियाद रखी गई थी। 3 जून से लागू नियम लाखों भारतीय यात्रियों की यूरोप-अमेरिका कनेक्टिंग उड़ानें आसान बनाएगा।

मुख्य बातें

जर्मन दूतावास ने 2 जून को घोषणा की कि भारतीय नागरिकों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत नहीं होगी।
नया नियम 3 जून से लागू, फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में अधिसूचित।
यह जनवरी में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का सीधा परिणाम है।
उस यात्रा में भारत-जर्मनी ने व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा में 19 समझौते किए थे।
2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
नेताओं ने IMEC कॉरिडोर और रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप के प्रति समर्थन दोहराया।

जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए बड़ी राहत देते हुए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास ने 2 जून को मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय यात्रियों को अब जर्मन हवाई अड्डों पर लेओवर के दौरान किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय ट्रांजिट वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नया नियम 3 जून से प्रभावी हो गया है।

आधिकारिक घोषणा और लागू होने की तिथि

जर्मन दूतावास ने अपने बयान में कहा, “भारतीय नागरिकों के लिए तथाकथित एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत को हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को की गई थी और यह 3 जून से लागू होगी।” उल्लेखनीय है कि लेओवर का अर्थ है किसी यात्रा के अंतिम गंतव्य पर पहुँचने से पहले बीच के किसी स्थान पर अस्थायी ठहराव।

मर्ज़ की भारत यात्रा का नतीजा

संघीय गणराज्य के सार्वजनिक राजपत्र के अनुसार, “यह इस वर्ष जनवरी में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का नतीजा है। यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए फेडरल सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज़ ने दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी का स्वागत किया था।

व्यापार और रणनीतिक साझेदारी

दोनों नेताओं ने रेखांकित किया कि 2024 में भारत-जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचा और यह रफ़्तार 2025 तक जारी रहने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 19 समझौते हुए तथा रणनीतिक, आर्थिक और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से कई नीतिगत घोषणाएँ की गईं।

IMEC और रक्षा सहयोग

दोनों नेताओं ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के प्रति अपना समर्थन दोहराया और वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया आकार देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर बल दिया। पहली IMEC मंत्रिस्तरीय बैठक का दोनों पक्षों को इंतज़ार है। संयुक्त बयान के अनुसार, नेताओं ने एक रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप तैयार करने के लिए संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसमें तकनीकी साझेदारी तथा रक्षा प्लेटफ़ॉर्म व उपकरणों का सह-विकास और सह-उत्पादन शामिल है।

भारतीय यात्रियों पर असर

यह फ़ैसला उन हज़ारों भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो फ्रैंकफ़र्ट और म्यूनिख जैसे प्रमुख जर्मन हवाई अड्डों से अमेरिका, कनाडा या लातिन अमेरिका के लिए कनेक्टिंग उड़ानें लेते हैं। गौरतलब है कि भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को त्वरित मंज़ूरी देने की जर्मनी की कोशिशों का भी स्वागत किया है, जो दोनों देशों के बीच गहराते भरोसे का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असल में यह दिल्ली-बर्लिन रिश्ते की दिशा का बड़ा संकेत है। जर्मनी पारंपरिक रूप से शेंगेन वीज़ा नियमों में सख़्त रहा है — यह छूट उन कुछ देशों की सूची में भारत को रखती है जिन पर बर्लिन रणनीतिक भरोसा जताता है। असली परीक्षा अब IMEC और रक्षा सह-उत्पादन रोडमैप के क्रियान्वयन की होगी, जहाँ घोषणाओं और ज़मीनी नतीजों के बीच अक्सर बड़ी खाई रह जाती है। चीन पर निर्भरता घटाने की यूरोपीय मुहिम में भारत स्पष्ट लाभार्थी के रूप में उभर रहा है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जर्मनी का नया ट्रांजिट वीज़ा नियम भारतीयों के लिए क्या है?
भारतीय नागरिकों को अब जर्मन हवाई अड्डों पर लेओवर के दौरान किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की आवश्यकता नहीं होगी। यह छूट उन यात्रियों पर लागू होगी जो जर्मनी से बाहर नहीं निकलते, बल्कि केवल विमान बदलने के लिए वहाँ रुकते हैं।
नया नियम कब से लागू हुआ है?
यह नियम 3 जून से लागू हो गया है। इसकी अधिसूचना 2 जून को जर्मनी के फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में प्रकाशित की गई थी।
यह फ़ैसला किस वजह से आया?
जर्मन सरकार के अनुसार, यह इस वर्ष जनवरी में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का सीधा नतीजा है। उस यात्रा में दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही आसान बनाने और आर्थिक रिश्तों को मज़बूत करने का संकल्प लिया था।
मर्ज़ की भारत यात्रा में क्या-क्या समझौते हुए थे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज़ की मुलाक़ात में व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 19 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। दोनों पक्षों ने रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच सहयोग गहरा करने वाली नीतिगत घोषणाएँ भी कीं।
क्या यह छूट सभी भारतीय पासपोर्ट धारकों पर लागू है?
दूतावास की घोषणा के अनुसार यह छूट भारतीय नागरिकों के लिए सामान्य रूप से लागू है, बशर्ते वे केवल जर्मन हवाई अड्डे के अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट क्षेत्र तक सीमित रहें। शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश करने वालों के लिए सामान्य वीज़ा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले