20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जर्मनी ने भारतीयों के लिए ट्रांजिट वीज़ा खत्म किया, 3 जून से लागू; भारत ने किया स्वागत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जर्मनी ने भारतीयों के लिए ट्रांजिट वीज़ा खत्म किया, 3 जून से लागू; भारत ने किया स्वागत

सारांश

जर्मनी ने 3 जून 2026 से भारतीय नागरिकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता खत्म कर दी है। यह कदम जनवरी 2026 में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा और PM मोदी से बातचीत का सीधा नतीजा है, और फ्रैंकफर्ट–म्यूनिख से होकर अमेरिका–ब्रिटेन जाने वाले हज़ारों भारतीय यात्रियों को राहत देगा।

मुख्य बातें

जर्मनी ने 3 जून 2026 से भारतीय नागरिकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता समाप्त की।
घोषणा 2 जून को फेडरल लॉ गैजेट में प्रकाशित हुई; भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक्स पर स्वागत किया।
यह फैसला जनवरी 2026 में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा और PM नरेंद्र मोदी से वार्ता का परिणाम है।
उस यात्रा में दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों में 19 समझौते किए थे।
दोनों नेताओं ने IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे) के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय नागरिकों को अब जर्मनी के हवाई अड्डों से होकर किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय ट्रांजिट वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होगी। जर्मन सरकार का यह फैसला 3 जून 2026 से लागू हो गया है, और भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2 जून को इसका औपचारिक स्वागत किया।

मुख्य घोषणा

नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास के अनुसार, ‘भारतीय नागरिकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को प्रकाशित की गई और यह 3 जून से प्रभावी होगी।’

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हम जर्मनी द्वारा 3 जून से सिर्फ़ हवाई रास्ते से जर्मनी से गुज़रने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत को माफ़ करने की घोषणा को लागू करने का स्वागत करते हैं।’ मंत्रालय ने जोड़ा कि इस व्यवस्था से ‘भारत और जर्मनी के बीच लोगों के बीच संबंध और बेहतर होंगे।’

मोदी–मर्ज़ बैठक की पृष्ठभूमि

यह फैसला जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत का सीधा परिणाम बताया जा रहा है। संघीय राजपत्र में कहा गया, ‘यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने के लिए संघीय सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।’

व्यापार और रणनीतिक सहयोग

उस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल थे। दोनों पक्षों ने 2024 में द्विपक्षीय व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने पर संतोष जताया था और संकेत दिया था कि यह रुझान 2025 में भी जारी रहेगा।

दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए वैश्विक कॉमर्स और कनेक्टिविटी में इसकी बदलावकारी भूमिका पर ज़ोर दिया था, और पहली IMEC मंत्रिस्तरीय बैठक का इंतज़ार जताया था।

आम यात्रियों पर असर

इस छूट से उन हज़ारों भारतीय यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा जो फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे जर्मन हवाई अड्डों से उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और शेष यूरोप की उड़ानें पकड़ते हैं। अब तक केवल लेओवर के लिए भी अलग वीज़ा लेना पड़ता था, जिसमें समय और शुल्क दोनों लगते थे। गौरतलब है कि यह यूरोप के किसी प्रमुख शेंगेन देश द्वारा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए हाल के समय में दी गई सबसे बड़ी प्रक्रियात्मक रियायतों में से एक है।

आगे क्या

दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी अगले चरण में IMEC परियोजनाओं और कुशल कामगारों की गतिशीलता पर केंद्रित रहने की संभावना है, जिसकी रूपरेखा आने वाली मंत्रिस्तरीय बैठकों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असल में यह भारत-जर्मनी रिश्तों के बदलते स्तर का संकेतक है — जहाँ बर्लिन अब भारतीय पासपोर्ट को ‘जोखिम’ नहीं, ‘अवसर’ की तरह देख रहा है। शेंगेन ज़ोन के सबसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देश का यह कदम बाक़ी यूरोपीय राजधानियों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बनाएगा। हालाँकि असली परीक्षा कुशल कामगारों के दीर्घकालिक वीज़ा और मान्यता ढाँचों पर होगी, जिनमें प्रगति अब भी सुर्खियों से धीमी है। IMEC का ज़िक्र इस घोषणा को महज़ कांसुलर सुधार से आगे, एक भू-आर्थिक संरेखण के रूप में पढ़ने का आधार देता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जर्मनी का नया ट्रांजिट वीज़ा नियम भारतीयों के लिए क्या है?
3 जून 2026 से भारतीय नागरिकों को जर्मन हवाई अड्डों से होकर किसी तीसरे देश जाते समय एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होगी। यह छूट केवल हवाई रास्ते से जर्मनी से गुज़रने वाले यात्रियों पर लागू होगी, जर्मनी में प्रवेश करने वालों पर नहीं।
यह छूट कब से लागू हो गई है?
घोषणा 2 जून 2026 को जर्मनी के फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में प्रकाशित हुई और नियम 3 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।
यह फैसला किस वार्ता का परिणाम है?
यह जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत का सीधा नतीजा है। उस दौरे में दोनों देशों ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए थे।
क्या इस छूट से जर्मनी में प्रवेश के लिए भी वीज़ा नहीं लगेगा?
नहीं, यह छूट केवल एयरपोर्ट ट्रांजिट तक सीमित है। जर्मनी या शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश करने वाले भारतीय यात्रियों के लिए शेंगेन वीज़ा की अनिवार्यता पहले की तरह बनी रहेगी।
भारतीय यात्रियों को इससे क्या व्यावहारिक लाभ होगा?
फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे प्रमुख जर्मन हब्स से उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की उड़ानें पकड़ने वाले हज़ारों भारतीय यात्रियों को अलग वीज़ा प्रक्रिया, शुल्क और इंतज़ार से छूट मिलेगी। इससे टिकट विकल्प भी बढ़ेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले