जर्मनी ने भारतीयों के लिए ट्रांजिट वीज़ा खत्म किया, 3 जून से लागू; भारत ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नागरिकों को अब जर्मनी के हवाई अड्डों से होकर किसी तीसरे देश की यात्रा करते समय ट्रांजिट वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होगी। जर्मन सरकार का यह फैसला 3 जून 2026 से लागू हो गया है, और भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2 जून को इसका औपचारिक स्वागत किया।
मुख्य घोषणा
नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास के अनुसार, ‘भारतीय नागरिकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीज़ा की अनिवार्यता हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को प्रकाशित की गई और यह 3 जून से प्रभावी होगी।’
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हम जर्मनी द्वारा 3 जून से सिर्फ़ हवाई रास्ते से जर्मनी से गुज़रने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीज़ा की ज़रूरत को माफ़ करने की घोषणा को लागू करने का स्वागत करते हैं।’ मंत्रालय ने जोड़ा कि इस व्यवस्था से ‘भारत और जर्मनी के बीच लोगों के बीच संबंध और बेहतर होंगे।’
मोदी–मर्ज़ बैठक की पृष्ठभूमि
यह फैसला जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत का सीधा परिणाम बताया जा रहा है। संघीय राजपत्र में कहा गया, ‘यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने के लिए संघीय सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।’
व्यापार और रणनीतिक सहयोग
उस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल थे। दोनों पक्षों ने 2024 में द्विपक्षीय व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने पर संतोष जताया था और संकेत दिया था कि यह रुझान 2025 में भी जारी रहेगा।
दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए वैश्विक कॉमर्स और कनेक्टिविटी में इसकी बदलावकारी भूमिका पर ज़ोर दिया था, और पहली IMEC मंत्रिस्तरीय बैठक का इंतज़ार जताया था।
आम यात्रियों पर असर
इस छूट से उन हज़ारों भारतीय यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा जो फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे जर्मन हवाई अड्डों से उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और शेष यूरोप की उड़ानें पकड़ते हैं। अब तक केवल लेओवर के लिए भी अलग वीज़ा लेना पड़ता था, जिसमें समय और शुल्क दोनों लगते थे। गौरतलब है कि यह यूरोप के किसी प्रमुख शेंगेन देश द्वारा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए हाल के समय में दी गई सबसे बड़ी प्रक्रियात्मक रियायतों में से एक है।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी अगले चरण में IMEC परियोजनाओं और कुशल कामगारों की गतिशीलता पर केंद्रित रहने की संभावना है, जिसकी रूपरेखा आने वाली मंत्रिस्तरीय बैठकों में स्पष्ट होगी।