हिज्बुल्लाह ने इजरायली वायुसेना के विमानों पर दागीं सतह-से-हवा मिसाइलें, आईडीएफ का दावा
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने दावा किया है कि हिज्बुल्लाह ने इजरायली वायुसेना के विमानों को निशाना बनाकर सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागीं। आईडीएफ के अनुसार, इस हमले में न तो कोई जवान घायल हुआ और न ही किसी विमान को कोई क्षति पहुँची। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब इजरायल और लेबनान ने वाशिंगटन में त्रिपक्षीय वार्ता के बाद युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई थी।
मिसाइल हमले के बाद सायरन और अफरा-तफरी
मिसाइलें दागे जाने के तत्काल बाद किर्यत शमोना शहर और लेबनान सीमा के निकट उत्तर-पूर्वी इजरायल के आठ गाँवों में हवाई हमले के सायरन बज उठे। हजारों स्थानीय निवासी सुरक्षित आश्रय स्थलों की ओर दौड़ पड़े। रिपोर्टों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना रहा।
युद्धविराम के बीच तनाव का विरोधाभास
गौरतलब है कि यह घटना उसी सप्ताह हुई जब इजरायल और लेबनान ने वाशिंगटन में हुई त्रिपक्षीय बातचीत के बाद युद्धविराम लागू करने पर सहमति व्यक्त की थी। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीदें अभी भी नाजुक बनी हुई हैं।
लेबनानी राष्ट्रपति की ईरान और हिज्बुल्लाह को कड़ी चेतावनी
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने एक साक्षात्कार में — जिसे लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को जारी किया — ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता में लेबनान को सौदेबाजी के मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। आउन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह आपका देश नहीं है, यह हमारा देश है।"
उन्होंने हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम की भी आलोचना की, जिन्होंने युद्धविराम समझौते का विरोध करते हुए सड़क प्रदर्शनों से सरकार गिराने की धमकी दी थी। आउन ने पलटवार करते हुए कहा, "वे लेबनान के लोग हैं, न कि नईम कासिम के लोग।"
ईरान की शर्त और क्षेत्रीय समीकरण
गुरुवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ 8 अप्रैल के समझौते को स्वीकार करने की ईरान की मुख्य शर्त लेबनान सहित सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम थी। आलोचकों का कहना है कि ईरान का यह रुख लेबनान की संप्रभुता को अपने रणनीतिक हितों के अधीन रखता है।
शांति का एकमात्र रास्ता: बातचीत
राष्ट्रपति आउन ने जोर देकर कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग कूटनीतिक वार्ता है। उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह के मुद्दे को लेबनानी राज्य और सरकार को घरेलू स्तर पर सुलझाना होगा — जिसके लिए इजरायल का लेबनानी क्षेत्र से हटना और संघर्ष की समाप्ति अनिवार्य शर्त है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी समुदायों के लेबनानी नागरिक दशकों के युद्ध से थक चुके हैं और शांतिपूर्ण जीवन चाहते हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक दबाव और जमीनी तनाव — दोनों की दिशा तय करेगी कि क्षेत्र में स्थायी शांति संभव है या नहीं।