दक्षिण कोरिया-अमेरिका रक्षा वार्ता: ओपीकॉन ट्रांसफर और परमाणु पनडुब्बियों पर बड़ी चर्चा

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दक्षिण कोरिया-अमेरिका रक्षा वार्ता: ओपीकॉन ट्रांसफर और परमाणु पनडुब्बियों पर बड़ी चर्चा

सारांश

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रक्षा मंत्रियों की वॉशिंगटन बैठक में युद्धकालीन ओपीकॉन ट्रांसफर की समयसीमा पर मतभेद सामने आए — सोल 2028 चाहता है, अमेरिकी जनरल 2029 की बात कर रहे हैं। साथ ही परमाणु पनडुब्बी योजना और होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमले का मुद्दा भी केंद्र में रहा।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 11 मई को वॉशिंगटन में बैठक की।
युद्धकालीन ओपीकॉन ट्रांसफर पर सोल 2028 की समयसीमा चाहता है, जबकि अमेरिकी कमांडर ने 2029 की पहली तिमाही का लक्ष्य बताया।
4 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य में कार्गो जहाज ' एचएमएम नामू ' पर दो अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं के हमले का मुद्दा भी बैठक में उठा।
दक्षिण कोरिया परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियों पर साल की पहली छमाही में पहली आधिकारिक बैठक की उम्मीद कर रहा है।
दक्षिण कोरिया 'मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट' (MFC) में शामिल होने के अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने सोमवार, 11 मई को वॉशिंगटन में एक अहम बैठक की, जिसमें युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीकॉन) अमेरिका से दक्षिण कोरिया को सौंपने की प्रक्रिया और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियाँ हासिल करने की योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच द्विपक्षीय मुलाकात में इन दोनों मुद्दों पर अगले कदमों की रूपरेखा तय की गई।

ओपीकॉन ट्रांसफर: पृष्ठभूमि और महत्त्व

दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान अपनी सेना की ऑपरेशनल कमान अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमांड को सौंप दी थी। 1994 में उसने शांतिकाल की कमान वापस ले ली, लेकिन युद्धकालीन कमान अब भी अमेरिका के पास बनी हुई है। यह ऐसे समय में अहम है जब दक्षिण कोरिया अपनी सामरिक स्वायत्तता को मज़बूत करना चाहता है।

सोल के अधिकारियों के अनुसार, यह चर्चा पिछले वर्ष दोनों देशों के नेताओं और सुरक्षा बैठकों में हुए समझौतों के आधार पर आगे बढ़ी। तीन चरणों वाले ढाँचे के तहत ओपीकॉन ट्रांसफर के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं — जिनमें दक्षिण कोरिया की संयुक्त कोरिया-अमेरिका सेनाओं का नेतृत्व करने की क्षमता, मिसाइल और एयर डिफेंस ताकत, और अनुकूल क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल शामिल हैं।

समयसीमा पर मतभेद के संकेत

रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोरिया चाहता है कि राष्ट्रपति ली जे म्युंग की सरकार का कार्यकाल 2030 में खत्म होने से पहले ओपीकॉन वापस मिल जाए और वह 2028 तक यह प्रक्रिया पूरी करना चाहता है। हालाँकि, अमेरिका फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि दोनों देश 2029 की पहली तिमाही तक ज़रूरी शर्तें पूरी करने का लक्ष्य रख रहे हैं।

यह बयान इस ओर संकेत करता है कि ओपीकॉन ट्रांसफर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी 2029 को समाप्त होने के बाद भी पूरा नहीं हो पाएगा — जो सोल की प्राथमिकता से अलग है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमला: नया दबाव

यह बैठक उस घटना के एक दिन बाद हुई, जिसमें दक्षिण कोरिया ने निष्कर्ष निकाला कि 4 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरिया के कार्गो जहाज 'एचएमएम नामू' में हुए धमाके और आग के पीछे दो अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं का हमला था। इस घटना के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि दक्षिण कोरिया मध्य पूर्व में अपनी भूमिका पर दोबारा विचार कर सकता है।

अब तक सोल, ट्रंप की उस माँग को लेकर सावधानी बरतता रहा है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाने के लिए नौसैनिक मदद माँगी गई थी। रविवार को दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगा और 'मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट' (MFC) नामक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने के अमेरिकी प्रस्ताव पर करीबी नज़र से विचार कर रहा है।

परमाणु पनडुब्बियों पर प्रगति की उम्मीद

बैठक में दक्षिण कोरिया की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियाँ बनाने की योजना पर भी चर्चा होने की उम्मीद थी। पिछले वर्ष अक्टूबर में राष्ट्रपति ली जे म्युंग और ट्रंप की शिखर वार्ता में ट्रंप ने इस योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन उसके बाद ज़्यादा प्रगति नहीं हुई। वॉशिंगटन रवाना होने से पहले आन ने कहा कि उन्हें रणनीतिक पनडुब्बियों को लेकर बातचीत में प्रगति की उम्मीद है और साल की पहली छमाही खत्म होने से पहले परमाणु पनडुब्बियों पर पहली आधिकारिक बैठक हो सकती है।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर सुरक्षा तनाव बढ़ा हुआ है और दक्षिण कोरिया अपनी रक्षा क्षमताओं को स्वतंत्र रूप से मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह महज़ तारीखों का मामला नहीं — यह दक्षिण कोरिया की रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा है। होर्मुज में जहाज पर हमले ने सोल को उस दबाव में डाल दिया है जिससे वह अब तक बचता रहा था — मध्य पूर्व में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होना। परमाणु पनडुब्बी योजना पर ट्रंप की मंजूरी के बावजूद ठोस प्रगति का अभाव बताता है कि तकनीकी साझेदारी की राह में वाशिंगटन की अपनी शर्तें हैं। कुल मिलाकर, यह बैठक दक्षिण कोरिया की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और अमेरिकी गठबंधन की सीमाओं के बीच बढ़ते तनाव को रेखांकित करती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपीकॉन ट्रांसफर क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
ओपीकॉन यानी युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल वह अधिकार है जो युद्ध की स्थिति में दक्षिण कोरियाई सेनाओं की कमान तय करता है। 1950-53 के कोरियाई युद्ध से यह अधिकार अमेरिका के पास है और दक्षिण कोरिया इसे वापस लेकर अपनी सामरिक स्वायत्तता मज़बूत करना चाहता है।
दक्षिण कोरिया ओपीकॉन ट्रांसफर कब तक चाहता है?
दक्षिण कोरिया रिपोर्टों के अनुसार 2028 तक ओपीकॉन ट्रांसफर पूरा करना चाहता है, जबकि अमेरिका फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने 2029 की पहली तिमाही का लक्ष्य बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरिया के जहाज पर क्या हुआ?
4 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरिया के कार्गो जहाज 'एचएमएम नामू' में धमाका और आग लगी। दक्षिण कोरिया ने निष्कर्ष निकाला कि इसके पीछे दो अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं का हमला था।
दक्षिण कोरिया की परमाणु पनडुब्बी योजना की स्थिति क्या है?
पिछले वर्ष अक्टूबर में राष्ट्रपति ली जे म्युंग और ट्रंप की शिखर वार्ता में ट्रंप ने इस योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन उसके बाद ज़्यादा प्रगति नहीं हुई। रक्षा मंत्री आन ने कहा कि साल की पहली छमाही में पहली आधिकारिक बैठक हो सकती है।
'मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट' क्या है और दक्षिण कोरिया का रुख क्या है?
MFC होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व में बना अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन है। दक्षिण कोरिया अब तक इसमें शामिल होने को लेकर सावधान रहा है, लेकिन जहाज पर हमले के बाद उसने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर करीबी नज़र से विचार कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस