क्या अफगानिस्तान में प्राकृतिक आपदा ने 12 लोगों की जान ले ली और 11 को घायल किया?
सारांश
Key Takeaways
- अफगानिस्तान में बाढ़ ने 12 लोगों की जान ली और 11 घायल हुए।
- प्रभावित प्रांतों में व्यापक तबाही हुई है।
- बाढ़ ने 1,859 घरों को प्रभावित किया।
- संयुक्त राष्ट्र ने आपात सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण मानवीय स्थिति गंभीर बनी हुई है।
काबुल, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में पिछले तीन दिनों से हो रही भारी वर्षा और बर्फबारी के कारण आई अचानक बाढ़ में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के प्रवक्ता ने गुरुवार को दी।
प्रवक्ता हाफिज़ मोहम्मद यूसुफ़ हम्माद के अनुसार, कपिसा, परवान, दयकुंडी, उरुज़गान, कंधार, हेलमंद, बदघीस, फरयाब, बदख्शां, हेरात और फराह प्रांत इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ ने व्यापक पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि करीब 209 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बह गईं। इसके अलावा, लगभग 1,200 पशुओं की मौत हो गई और 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न या नष्ट हो गई।
हम्माद ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल भेज दिए गए हैं। पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है और नुकसान का आकलन जारी है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की मानवीय जरूरतों और प्रतिक्रिया योजना शुरू की। ओचा के अनुसार, 2026 में लगभग 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, जो 2025 की तुलना में चार प्रतिशत कम है। हालांकि, 1.74 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान है, जिनमें 47 लाख लोग आपात स्थिति (आईपीसी फेज-4) में होंगे।
ओचा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों में से लगभग 80 प्रतिशत, यानी 1.75 करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करने को प्राथमिकता देंगे। इस सहायता में खाद्य, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता शामिल होगी।
ओचा के अनुसार, अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति अब भी गंभीर है। जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सूखा, बार-बार आने वाली बाढ़ और भूकंप, बीमारियों का प्रकोप, महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षा जोखिम तथा बड़े पैमाने पर लौटने वाले शरणार्थियों के कारण हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
साल 2025 में ही ईरान और पाकिस्तान से 26.1 लाख से अधिक अफगान नागरिकों की वापसी हुई, जिससे स्थानीय समुदायों, बुनियादी सेवाओं और आजीविका पर भारी दबाव पड़ा है।