इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी का 'गंगा-महाकम विजन', भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई रूपरेखा देने के लिए 'गंगा-महाकम विजन' का प्रस्ताव रखा। इस विजन के तहत सभ्यतागत संबंध, विकास, सुरक्षा, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझा आवाज़ को साझेदारी की नींव बनाने का आह्वान किया गया।
गंगा-महाकम विजन: क्या है यह अवधारणा
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा, 'मैं आप सभी के सामने गंगा-महाकम विजन रखना चाहता हूँ। यह विजन हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की ज़रूरतों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और साझा प्रगति का रास्ता भी बनाता है।' उन्होंने कहा कि रामायण से लेकर बोरोबुदुर तक के साझे इतिहास को भविष्य की ताकत में बदला जाएगा और इसके लिए 'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' की शुरुआत होनी चाहिए।
गौरतलब है कि गंगा भारत की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है, जबकि महाकम नदी इंडोनेशिया के कालीमंतान द्वीप की जीवनरेखा मानी जाती है। दोनों नदियों के नाम को जोड़कर बनाया गया यह विजन दोनों देशों के गहरे सभ्यतागत रिश्तों का प्रतीक है।
व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045 (इंडोनेशिया एमास 2045)' के विजन का उल्लेख करते हुए व्यापार, निवेश, संपर्क, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संबोधन में व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश आसियान और जी-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साथ मिलकर ग्लोबल साउथ के हितों की पैरवी करते रहे हैं।
समुद्र को सेतु बताया, दूरी नहीं
मोदी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य का उल्लेख किया — 'भले ही भारत और इंडोनेशिया की राजधानियों में हज़ारों किलोमीटर की दूरी हो, लेकिन समुद्र के रास्ते यह दूरी महज़ 150 किलोमीटर है।' उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं, बल्कि सेतु का प्रतीक रहा है। स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में भारत-इंडोनेशिया सहयोग को अहम बताया गया।
इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान पर आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वहाँ की जनता का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से नवाज़ा। मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति सुबियांतो ने कॉपीराइट की बात की। सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। सुबियांतो के साथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है।'
एक्स पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपने संबोधन के बारे में लिखा: 'इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात है। भारत और इंडोनेशिया सदियों पुराने इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच मजबूत संबंधों से जुड़े हैं। हम मित्रता, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।' यह संबोधन भारत की इंडो-पैसिफिक कूटनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।