7 जुलाई 2026
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इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी का 'गंगा-महाकम विजन', भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा

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इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी का 'गंगा-महाकम विजन', भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा

सारांश

जकार्ता में इंडोनेशियाई संसद के पटल से पीएम मोदी ने 'गंगा-महाकम विजन' पेश किया — रामायण से बोरोबुदुर तक के साझे इतिहास को भविष्य की कूटनीतिक ताकत में बदलने का संकल्प। यह विजन दोनों देशों की 2045-47 की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को एक साझे ढाँचे में पिरोने की कोशिश है।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया।
'गंगा-महाकम विजन' प्रस्तुत किया — सभ्यतागत संबंध, सुरक्षा, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को साझेदारी की नींव बनाने का आह्वान।
भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045' के विजन को साझे ढाँचे में जोड़ने का प्रस्ताव।
दोनों देशों के बीच समुद्री दूरी 150 किलोमीटर बताई; समुद्र को सेतु का प्रतीक कहा।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मोदी को 'बिंतांग आदिपूर्णा' सम्मान से नवाज़ा।
'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' शुरू करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई रूपरेखा देने के लिए 'गंगा-महाकम विजन' का प्रस्ताव रखा। इस विजन के तहत सभ्यतागत संबंध, विकास, सुरक्षा, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझा आवाज़ को साझेदारी की नींव बनाने का आह्वान किया गया।

गंगा-महाकम विजन: क्या है यह अवधारणा

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा, 'मैं आप सभी के सामने गंगा-महाकम विजन रखना चाहता हूँ। यह विजन हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की ज़रूरतों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और साझा प्रगति का रास्ता भी बनाता है।' उन्होंने कहा कि रामायण से लेकर बोरोबुदुर तक के साझे इतिहास को भविष्य की ताकत में बदला जाएगा और इसके लिए 'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' की शुरुआत होनी चाहिए।

गौरतलब है कि गंगा भारत की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है, जबकि महाकम नदी इंडोनेशिया के कालीमंतान द्वीप की जीवनरेखा मानी जाती है। दोनों नदियों के नाम को जोड़कर बनाया गया यह विजन दोनों देशों के गहरे सभ्यतागत रिश्तों का प्रतीक है।

व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री ने भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045 (इंडोनेशिया एमास 2045)' के विजन का उल्लेख करते हुए व्यापार, निवेश, संपर्क, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संबोधन में व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश आसियान और जी-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साथ मिलकर ग्लोबल साउथ के हितों की पैरवी करते रहे हैं।

समुद्र को सेतु बताया, दूरी नहीं

मोदी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य का उल्लेख किया — 'भले ही भारत और इंडोनेशिया की राजधानियों में हज़ारों किलोमीटर की दूरी हो, लेकिन समुद्र के रास्ते यह दूरी महज़ 150 किलोमीटर है।' उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं, बल्कि सेतु का प्रतीक रहा है। स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में भारत-इंडोनेशिया सहयोग को अहम बताया गया।

इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान पर आभार

प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वहाँ की जनता का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से नवाज़ा। मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति सुबियांतो ने कॉपीराइट की बात की। सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। सुबियांतो के साथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है।'

एक्स पर साझा किया संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपने संबोधन के बारे में लिखा: 'इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात है। भारत और इंडोनेशिया सदियों पुराने इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच मजबूत संबंधों से जुड़े हैं। हम मित्रता, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।' यह संबोधन भारत की इंडो-पैसिफिक कूटनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इसे ठोस आर्थिक और सुरक्षा समझौतों में कितनी तेज़ी से बदला जाता है। भारत-इंडोनेशिया व्यापार अभी भी दोनों देशों की क्षमता से कहीं नीचे है, और हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच यह साझेदारी रणनीतिक रूप से अहम है। संसदीय संबोधन कूटनीतिक संकेत देता है, लेकिन 'सभ्यता संवाद' जैसी पहलों को वास्तविक निवेश और बाज़ार पहुँच से पुष्ट करना होगा। यह देखना होगा कि विजन की भव्यता, द्विपक्षीय वार्ता की मेज़ पर कितनी जल्दी नतीजों में तब्दील होती है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गंगा-महाकम विजन' क्या है?
'गंगा-महाकम विजन' पीएम मोदी द्वारा 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में इंडोनेशियाई संसद में प्रस्तुत एक कूटनीतिक रूपरेखा है, जो भारत और इंडोनेशिया के सभ्यतागत संबंधों, विकास, सुरक्षा, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझा आवाज़ को द्विपक्षीय साझेदारी की नींव बनाती है। गंगा और महाकम — दोनों देशों की प्रमुख नदियाँ — इस विजन के प्रतीक हैं।
पीएम मोदी को इंडोनेशिया का कौन-सा सम्मान मिला?
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से सम्मानित किया। मोदी ने इसे दोनों देशों के साझे लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
भारत-इंडोनेशिया के बीच समुद्री दूरी कितनी है?
पीएम मोदी ने अपने संसदीय संबोधन में बताया कि भले ही दोनों देशों की राजधानियाँ हज़ारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन समुद्री मार्ग से यह दूरी केवल 150 किलोमीटर है। उन्होंने इस समुद्र को दूरी नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सेतु बताया।
'विकसित भारत 2047' और 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045' को इस विजन से कैसे जोड़ा गया?
पीएम मोदी ने दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों — भारत का 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया का 'इंडोनेशिया एमास 2045' — को एक साझे ढाँचे में पिरोने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत व्यापार, निवेश, डिजिटल अवसंरचना, खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया।
'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' क्या है?
पीएम मोदी ने दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों — रामायण से बोरोबुदुर तक — को नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने के लिए 'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' शुरू करने का प्रस्ताव दिया। यह एक सांस्कृतिक-कूटनीतिक पहल होगी जो दोनों देशों के साझे इतिहास को भविष्य की साझेदारी की ताकत बनाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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