क्या पाकिस्तान बनता जा रहा है हमास का सुरक्षित ठिकाना?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में हमास का तेजी से बढ़ता प्रभाव
- गाजा में सैन्य ढांचे को समाप्त करने के प्रयासों में बाधा
- पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में हमास का समर्थन
- आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा
- पश्चिमी देशों के हितों के लिए जोखिम
वॉशिंगटन, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकवादी संगठन हमास का पाकिस्तान, विशेषकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), में वैचारिक और लॉजिस्टिक आधार बनाना एक वास्तविक और गंभीर खतरा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जब वैश्विक समुदाय गाजा में हमास के सैन्य ढांचे को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, तब पाकिस्तान हमास के पुनर्गठन के लिए अगला उपजाऊ क्षेत्र बनता जा रहा है, जो पश्चिमी देशों और क्षेत्र में उनके हितों के लिए बड़ा जोखिम है।
अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 जनवरी 2026 को अमेरिका के नेतृत्व में एक अंतर-सरकारी संगठन बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य गाजा में स्थिरता को बढ़ावा देना, भरोसेमंद और वैध शासन बहाल करना और स्थायी शांति सुनिश्चित करना है। 18 जनवरी को संगठन के अध्यक्ष के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया। हालांकि, रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर हमास के प्रतिनिधियों को खुली छूट देता है, जो सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और स्थानीय आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह का रवैया हमास को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के पश्चिमी प्रयासों को कमजोर करता है और यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अमेरिका को पाकिस्तान को अब भी एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में देखना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमास के भीषण हमले के बाद पाकिस्तान में हमास के नेता खालिद मशाल के विशेष प्रतिनिधि नाजी ज़हीर की राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। ज़हीर हमास की आतंकी गतिविधियों के लिए समर्थन और वैधता जुटाने में सक्रिय हो गया।
बताया गया है कि नाजी ज़हीर को कई बड़े कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया और वे पाकिस्तान में इजरायल विरोधी रैलियों व सम्मेलनों का नियमित चेहरा बन गए। कई मौकों पर ज़हीर ने उन लोगों के साथ मंच साझा किया, जिनके संबंध अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से बताए जाते हैं।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से तेहरान में हमास के विशेष प्रतिनिधि खालिद कद्दूमी भी अक्टूबर 2023 के बाद से पाकिस्तान के विभिन्न संस्थानों में आयोजित रैलियों और कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में ज़हीर और कद्दूमी की मौजूदगी इस्लामाबाद द्वारा हमास के एजेंडे को मौन समर्थन देने का संकेत देती है। यह वाशिंगटन के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 5 फरवरी 2025 को मनाए गए कश्मीर एकजुटता दिवस के दौरान पीओके में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें पाकिस्तानी सेना, सरकार के साथ-साथ विभिन्न आतंकी संगठनों ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में जिहादी कमांडरों और हमास नेताओं ने भी संबोधन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में हमास की पकड़ लगातार मजबूत होती दिख रही है। बीते वर्षों में जिहादी आंदोलनों के प्रतिनिधियों ने कई पाकिस्तानी राजदूतों से भी मुलाकात की है।