बांग्लादेश में दरगाह पर हमला: मानवाधिकार संगठन ने जमात-शिबिर पर लगाया आरोप, चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (JMBF) ने ढाका में हजरत शाह अली बगदादी दरगाह पर 14 मई 2024 की रात हुए हिंसक हमले की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि कट्टरपंथी समूहों द्वारा श्रद्धालुओं पर किए गए इस सुनियोजित हमले और दरगाह में की गई तोड़फोड़ ने बांग्लादेश की सदियों पुरानी सूफी परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार किया है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से JMBF ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई शिबिर से कथित तौर पर जुड़े हथियारबंद हमलावर डंडे लेकर दरगाह परिसर में घुसे और एक शांतिपूर्ण साप्ताहिक धार्मिक सभा में शामिल श्रद्धालुओं पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई लोग घायल हो गए और परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
एक घायल श्रद्धालु के हवाले से संगठन ने बताया, 'कुछ लोग डंडों के साथ आए… उन्होंने पूरी तरह से अराजकता फैला दी। लोग इधर-उधर भागने लगे। मैं मुख्य गेट से निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी उन्होंने मेरे सिर पर वार किया।'
पुलिस की भूमिका पर सवाल
संगठन ने यह भी कहा कि दरगाह के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कानून-व्यवस्था के अधिकारी कथित तौर पर नागरिकों की रक्षा करने में असफल रहे। दोषियों के विरुद्ध अब तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे दण्डमुक्ति की स्थिति स्पष्ट होती है।
व्यापक हिंसा का हिस्सा
दरगाह के अनुयायियों के हवाले से JMBF ने बताया कि यह हमला 5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में दरगाहों और सूफी स्थलों पर हो रहे हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। इस अवधि में देशभर में 100 से अधिक दरगाहों पर हमले की खबरें सामने आई हैं।
JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक और व्यवस्थित हिंसा की कड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और सूफी स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
संगठन की माँगें
JMBF ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि शाह अली बगदादी दरगाह पर हुए हमले की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की जाए और सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। संगठन ने देशभर में सभी दरगाहों, धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी माँग की है।
आगे क्या
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को समय पर दंडित नहीं किया गया, तो चरमपंथी समूहों का हौसला और बढ़ेगा। बांग्लादेश में धार्मिक उग्रवाद और राजनीतिक हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठने लगी है।