बांग्लादेश में दरगाह पर हमला: मानवाधिकार संगठन ने जमात-शिबिर पर लगाया आरोप, चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई की माँग

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बांग्लादेश में दरगाह पर हमला: मानवाधिकार संगठन ने जमात-शिबिर पर लगाया आरोप, चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई की माँग

सारांश

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 के बाद से 100 से अधिक दरगाहों पर हमले हो चुके हैं — और दोषियों पर अब तक कोई आरोप सिद्ध नहीं। फ्रांस स्थित JMBF ने इसे व्यवस्थित हिंसा करार देते हुए बांग्लादेश सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

JMBF ने ढाका में हजरत शाह अली बगदादी दरगाह पर 14 मई की रात हुए हमले की कड़ी निंदा की।
कथित तौर पर जमात-ए-इस्लामी और शिबिर से जुड़े हमलावरों ने डंडों से श्रद्धालुओं पर हमला किया, कई लोग घायल हुए।
दरगाह के बाहर पुलिस मौजूद थी, फिर भी कथित तौर पर श्रद्धालुओं की रक्षा नहीं हो सकी।
5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में 100 से अधिक दरगाहों पर हमले की खबरें हैं।
अब तक किसी भी दोषी पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ — संगठन ने दण्डमुक्ति पर गहरी चिंता जताई।
JMBF ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल जाँच, गिरफ्तारी और सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की माँग की।

फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (JMBF) ने ढाका में हजरत शाह अली बगदादी दरगाह पर 14 मई 2024 की रात हुए हिंसक हमले की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि कट्टरपंथी समूहों द्वारा श्रद्धालुओं पर किए गए इस सुनियोजित हमले और दरगाह में की गई तोड़फोड़ ने बांग्लादेश की सदियों पुरानी सूफी परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार किया है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से JMBF ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई शिबिर से कथित तौर पर जुड़े हथियारबंद हमलावर डंडे लेकर दरगाह परिसर में घुसे और एक शांतिपूर्ण साप्ताहिक धार्मिक सभा में शामिल श्रद्धालुओं पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई लोग घायल हो गए और परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

एक घायल श्रद्धालु के हवाले से संगठन ने बताया, 'कुछ लोग डंडों के साथ आए… उन्होंने पूरी तरह से अराजकता फैला दी। लोग इधर-उधर भागने लगे। मैं मुख्य गेट से निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी उन्होंने मेरे सिर पर वार किया।'

पुलिस की भूमिका पर सवाल

संगठन ने यह भी कहा कि दरगाह के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कानून-व्यवस्था के अधिकारी कथित तौर पर नागरिकों की रक्षा करने में असफल रहे। दोषियों के विरुद्ध अब तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे दण्डमुक्ति की स्थिति स्पष्ट होती है।

व्यापक हिंसा का हिस्सा

दरगाह के अनुयायियों के हवाले से JMBF ने बताया कि यह हमला 5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में दरगाहों और सूफी स्थलों पर हो रहे हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। इस अवधि में देशभर में 100 से अधिक दरगाहों पर हमले की खबरें सामने आई हैं।

JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक और व्यवस्थित हिंसा की कड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और सूफी स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।

संगठन की माँगें

JMBF ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि शाह अली बगदादी दरगाह पर हुए हमले की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की जाए और सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। संगठन ने देशभर में सभी दरगाहों, धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी माँग की है।

आगे क्या

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को समय पर दंडित नहीं किया गया, तो चरमपंथी समूहों का हौसला और बढ़ेगा। बांग्लादेश में धार्मिक उग्रवाद और राजनीतिक हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दण्डमुक्ति की एक संस्थागत संस्कृति की ओर इशारा करता है। जब पुलिस की मौजूदगी में हमले होते हैं और कोई गिरफ्तारी नहीं होती, तो सवाल उठता है कि क्या राज्य इन हमलों को रोकने में असमर्थ है या अनिच्छुक। अंतरराष्ट्रीय मंचों से उठती आवाज़ें ज़रूरी हैं, लेकिन असली परीक्षा बांग्लादेश की अपनी न्यायिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की होगी।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हजरत शाह अली बगदादी दरगाह पर हमला कब और कैसे हुआ?
14 मई 2024 की रात ढाका स्थित हजरत शाह अली बगदादी दरगाह में एक साप्ताहिक धार्मिक सभा के दौरान हथियारबंद हमलावरों ने डंडों से श्रद्धालुओं पर हमला किया। JMBF के अनुसार, हमलावर कथित तौर पर जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई शिबिर से जुड़े थे।
JMBF क्या है और इसने क्या माँगें रखी हैं?
जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (JMBF) फ्रांस स्थित एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है। इसने बांग्लादेश सरकार से दरगाह हमले की तत्काल, निष्पक्ष जाँच, दोषियों की गिरफ्तारी और देशभर के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।
बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 के बाद से कितने दरगाहों पर हमले हुए हैं?
JMBF के अनुसार, 5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में 100 से अधिक दरगाहों और सूफी स्थलों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। इनमें से किसी भी मामले में अब तक दोषी पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।
क्या पुलिस हमले के समय मौजूद थी?
JMBF के अनुसार, हमले के समय दरगाह के बाहर पुलिस तैनात थी, लेकिन कानून-व्यवस्था के अधिकारी कथित तौर पर श्रद्धालुओं की रक्षा करने में असफल रहे। इस पर संगठन ने गहरी चिंता जताई है।
इन हमलों का बांग्लादेश की सूफी परंपराओं पर क्या असर पड़ रहा है?
JMBF का कहना है कि दरगाहों और सूफी स्थलों पर बार-बार हो रहे हमले बांग्लादेश की सदियों पुरानी सूफी परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर आघात हैं। दण्डमुक्ति की स्थिति से चरमपंथी समूहों का हौसला और बढ़ने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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