56वीं ओएएस महासभा में भारत की भागीदारी, राजदूत सुमित सेठ ने पनामा सिटी में रखा देश का पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राजदूत सुमित सेठ ने 23 जून 2026 को पनामा सिटी में आयोजित 56वीं ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (ओएएस) महासभा के उद्घाटन सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह महासभा 22 से 24 जून तक चल रही है और पनामा इसकी तीसरी बार मेजबानी कर रहा है।
भारत की भागीदारी और राजदूत का संबोधन
राजदूत सुमित सेठ ने उद्घाटन सत्र में पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो को उनके नेतृत्व के लिए बधाई दी और महासभा की सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। पनामा स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए पुष्टि की कि 'भारत, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स का परमानेंट ऑब्जर्वर है।'
गौरतलब है कि ओएएस में भारत की स्थायी पर्यवेक्षक सदस्यता उसे पश्चिमी गोलार्ध के प्रमुख बहुपक्षीय मंच पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति बनाए रखने का अवसर देती है, भले ही उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।
पनामा की तीसरी मेजबानी का महत्व
पनामा इससे पहले 1996 और 2007 में भी ओएएस महासभा की मेजबानी कर चुका है। यह तीसरी मेजबानी पनामा की क्षेत्रीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आई है जब पनामा नहर को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है।
ओएएस महासभा की संरचना और कार्य
ओएएस महासभा इस संगठन का सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेते हैं, जिनका नेतृत्व सामान्यतः विदेश मंत्री करते हैं। प्रत्येक सदस्य देश के पास एक मत होता है — साधारण प्रस्तावों पर बहुमत से और कुछ विशेष मामलों में दो-तिहाई बहुमत से निर्णय लिए जाते हैं।
महासभा ओएएस की नीतियाँ और प्राथमिकताएँ निर्धारित करती है तथा उसके विभिन्न अंगों की संरचना व कार्यप्रणाली को भी परिभाषित करती है। परंपरागत रूप से प्रस्तावों को आम सहमति से पारित करने की कोशिश की जाती है।
स्वायत्त संस्थाओं का चुनाव
महासभा ओएएस की स्वायत्त और विकेंद्रीकृत संस्थाओं के सदस्यों का चुनाव भी करती है। इनमें इंटर-अमेरिकन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स, इंटर-अमेरिकन कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स, इंटर-अमेरिकन ज्यूरिडिकल कमेटी, जस्टिस स्टडीज सेंटर ऑफ द अमेरिकाज और एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल जैसी प्रमुख संस्थाएँ शामिल हैं।
भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों का संदर्भ
ओएएस जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी उसकी 'ग्लोबल साउथ' नेतृत्व की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लैटिन अमेरिकी देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाना भारत की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की परिकल्पना के अनुरूप है। महासभा के शेष सत्रों में क्षेत्रीय सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है।