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भारत-कुवैत संबंध मजबूत: राजदूत परमिता त्रिपाठी ने वाणिज्य मंत्री बोदाई से की मुलाकात, खाद्य सुरक्षा पर विशेष चर्चा

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भारत-कुवैत संबंध मजबूत: राजदूत परमिता त्रिपाठी ने वाणिज्य मंत्री बोदाई से की मुलाकात, खाद्य सुरक्षा पर विशेष चर्चा

सारांश

भारतीय राजदूत परमिता त्रिपाठी और कुवैत के वाणिज्य मंत्री बोदाई की बैठक महज शिष्टाचार नहीं — यह भारत-कुवैत संबंधों को ऊर्जा से आगे ले जाने की रणनीतिक कोशिश है। खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोर, जयशंकर की हालिया कुवैत यात्रा के बाद, बताता है कि भारत खाड़ी में अपनी आर्थिक उपस्थिति को बहुआयामी बना रहा है।

मुख्य बातें

भारतीय राजदूत परमिता त्रिपाठी ने 23 अगस्त को कुवैत सिटी में वाणिज्य और उद्योग मंत्री ओसामा खालिद अब्दुल्ला बोदाई से मुलाकात की।
बैठक में खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन को विशेष प्राथमिकता देते हुए व्यापार व आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई।
पिछले महीने विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और क्राउन प्रिंस से अलग-अलग बैठकें कीं।
जयशंकर-कुवैत विदेश मंत्री बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों की संयुक्त समीक्षा हुई।
रक्षा मंत्री के साथ बैठक में रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा केंद्रीय विषय रहे।

कुवैत में भारत की राजदूत परमिता त्रिपाठी ने रविवार, 23 अगस्त को कुवैत सिटी में खाड़ी देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री ओसामा खालिद अब्दुल्ला बोदाई से मुलाकात की और व्यापार, उद्योग तथा आर्थिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन को विशेष प्राथमिकता दी गई।

मुख्य घटनाक्रम

कुवैत में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने भारत और कुवैत के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों की समीक्षा की। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि आपसी व्यापार को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में ठोस कदम उठाए जाएँ।

जयशंकर की कुवैत यात्रा की पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पिछले महीने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कुवैत का दौरा किया था। उस दौरे में उन्होंने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबा से मुलाकात की और कुवैत में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए समर्थन देने पर उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही दोनों देशों के बीच परस्पर लाभकारी सहयोग के दृष्टिकोण का स्वागत किया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कुवैत के अपने समकक्ष शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा से भी बैठक की। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग की संयुक्त समीक्षा की गई। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष और उसके असर पर चर्चा की। भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए आभार जताया। भरोसा है कि आने वाले समय में हमारी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।"

रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान

विदेश मंत्री जयशंकर की कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबा के साथ हुई बैठक में रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे केंद्र में रहे। यह उल्लेखनीय है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा भारत की प्राथमिकताओं में ऊपर आ गई है।

क्राउन प्रिंस से मुलाकात और द्विपक्षीय समीक्षा

विदेश मंत्री जयशंकर ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबा से भी मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा हुई और खाड़ी क्षेत्र में जारी घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गर्मजोशी भरी शुभकामनाएं दीं। हमारे द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता की गहराई से सराहना करता हूं।" विदेश मंत्री ने क्राउन प्रिंस की इस प्रतिबद्धता को दोनों देशों के संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह बैठक भारत-कुवैत के बीच कूटनीतिक संवाद की उस श्रृंखला का हिस्सा है जो हाल के महीनों में तेज हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बल देना इस बात का संकेत है कि भारत खाड़ी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को केवल ऊर्जा आयात तक सीमित न रखकर बहुआयामी बनाना चाहता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों की संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक स्पष्ट रणनीतिक बदलाव है — खाड़ी संबंधों को केवल तेल-आयात और प्रवासी-प्रेषण तक सीमित न रखना। खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन पर विशेष जोर यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के सबक से सीख रहा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसी उच्चस्तरीय बैठकों के बाद ठोस समझौते और क्रियान्वयन अक्सर पीछे रह जाते हैं — असली कसौटी यह होगी कि इन चर्चाओं का अनुवाद बाध्यकारी द्विपक्षीय करारों में कब और कैसे होता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत परमिता त्रिपाठी और कुवैत के वाणिज्य मंत्री की बैठक में क्या हुआ?
23 अगस्त को कुवैत सिटी में हुई इस बैठक में भारत और कुवैत के बीच व्यापार, उद्योग और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिसमें खाद्य सुरक्षा और सप्लाई चेन को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने के अवसरों की पहचान की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कुवैत यात्रा में किन-किन नेताओं से मुलाकात की?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबा, विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा, रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबा और क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबा से अलग-अलग बैठकें कीं।
भारत-कुवैत के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा प्रमुख क्षेत्र रहे। रक्षा मंत्री के साथ बैठक में रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
भारत-कुवैत संबंधों में खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर दोनों देश खाद्य सुरक्षा को रणनीतिक मुद्दे के रूप में देख रहे हैं। भारत खाड़ी देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को ऊर्जा आयात से आगे बहुआयामी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
कुवैत में भारतीय समुदाय के बारे में क्या चर्चा हुई?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस दोनों से मुलाकात में कुवैत में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समर्थन देने पर आभार व्यक्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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