पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा 19 जुलाई से भारत दौरे पर, जयशंकर और गोयल से होगी बैठक
सारांश
मुख्य बातें
पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-आचा वास्केज 19 से 23 जुलाई 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 17 जुलाई को इस यात्रा की पुष्टि की। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और पनामा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
दौरे का कार्यक्रम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मार्टिनेज-आचा रविवार, 20 जुलाई को भारत पहुँचेंगे। सोमवार को वे नई संसद भवन में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी।
मंगलवार को दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी के बाद बुधवार को वे परिवहन भवन में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मिलेंगे। गुरुवार, 24 जुलाई को वे भारत से रवाना होंगे।
पृष्ठभूमि: राजनयिक संपर्क की बढ़ती कड़ी
इस महीने की शुरुआत में पनामा में भारत के राजदूत सुमित सेठ ने विदेश मंत्री मार्टिनेज-आचा से मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-पनामा द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। पनामा स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि राजदूत सेठ ने विदेश मंत्री को भारत-पनामा के प्रतीकात्मक झंडे का पिन भेंट किया और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने पर चर्चा की।
आतंकवाद पर पनामा का रुख और पहलगाम संदर्भ
गौरतलब है कि पिछले वर्ष पनामा में राजदूत सुमित सेठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री मार्टिनेज-आचा ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया था। यह कार्यक्रम कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में आए भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में आयोजित किया गया था।
उस प्रतिनिधिमंडल ने पहलगाम में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों द्वारा किए गए धार्मिक रूप से प्रेरित हमले में 26 लोगों की मौत के बाद आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया था। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो क्विंटेरो ने भी उस बैठक में भारत की आतंकवाद-विरोधी लड़ाई के प्रति अपना समर्थन जताया था।
पनामा का रणनीतिक महत्व
पनामा मध्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण देश है और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य भी है। इस दृष्टि से भारत के लिए पनामा के साथ घनिष्ठ कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बंदरगाह और जलमार्ग मंत्री सोनोवाल के साथ बैठक यह संकेत देती है कि इस दौरे में समुद्री व्यापार और कनेक्टिविटी के मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं।
आगे की राह
इस दौरे से भारत-पनामा के बीच व्यापार, समुद्री सहयोग और कूटनीतिक समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। जयशंकर के साथ होने वाली बैठक में द्विपक्षीय एजेंडे के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के मुद्दे भी उठ सकते हैं।