आईएमएफ उप-प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क: भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि की अगली लहर का नेतृत्व कर सकता है
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप-प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने 16 सितंबर 2026 को वॉशिंगटन से जारी बयान में कहा कि भारत के पास वैश्विक आर्थिक वृद्धि की अगली बड़ी लहर का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है। उन्होंने इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र की तेज़ प्रगति और लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को बताया। पाँच दिवसीय भारत यात्रा के समापन के बाद क्लार्क का यह बयान उनके उप-प्रबंध निदेशक बनने के बाद पहली भारत यात्रा के संदर्भ में आया है।
यात्रा का दायरा और प्रमुख बैठकें
क्लार्क ने इस दौरे में नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य हितधारकों से व्यापक बैठकें कीं। उन्होंने वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी के साथ अलग-अलग मुलाकातें कीं। क्लार्क ने इन तीनों को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत और सकारात्मक चर्चाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत की आर्थिक स्थिति पर आईएमएफ का आकलन
क्लार्क ने भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया और कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने बयान में कहा, 'मजबूत आर्थिक आधार और अच्छी नीतियों की वजह से भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं और कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि दर से जूझ रही हैं।
नीतिगत प्राथमिकताएं और चर्चा के विषय
भारतीय नीति-निर्माताओं के साथ हुई बैठकों में क्लार्क ने तीन प्रमुख विषयों पर जोर दिया — महंगाई नियंत्रण, नीतिगत लचीलापन और उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधार। उनके शब्दों में, 'नीतियां परिस्थितियों के अनुसार लचीली बनी रहें, महंगाई नियंत्रण में रहे और ऐसे सुधार आगे बढ़ाए जाएं जो उत्पादकता बढ़ाएं, प्रतिस्पर्धा मजबूत करें और मध्यम अवधि में तेज़ विकास को बनाए रखें।' गौरतलब है कि आईएमएफ पहले भी भारत की राजकोषीय अनुशासन नीति की सराहना कर चुका है।
निजी क्षेत्र और तकनीकी क्षमता
यात्रा के दौरान क्लार्क ने कई उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'मैं भारत के निजी क्षेत्र की ऊर्जा, यहां मौजूद प्रतिभाशाली लोगों और तेज़ी से विकसित हो रही तकनीकी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं से काफी प्रभावित हुआ।' उन्होंने नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, उन्नत विनिर्माण और नई तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने को उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के प्रमुख कारक बताया।
बहुपक्षीय सहयोग में भारत की भूमिका
क्लार्क ने भारत सरकार को बहुपक्षीय सहयोग को समर्थन देने और क्षेत्र के अन्य देशों की मदद करने के लिए भी विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईएमएफ भारत की आर्थिक प्रगति के इस सफर में करीबी साझेदार बना रहेगा। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच नीतिगत संवाद और तकनीकी सहायता जारी रहने की उम्मीद है।