13 अक्टूबर 2026
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भारत कनाडा व्यापार में अपार संभावनाएं: तेल, यूरेनियम, खनिज और अंतरिक्ष सहयोग पर उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर का बड़ा बयान

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भारत कनाडा व्यापार में अपार संभावनाएं: तेल, यूरेनियम, खनिज और अंतरिक्ष सहयोग पर उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर का बड़ा बयान

सारांश

कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर का संदेश साफ है — दोनों देशों के बीच व्यापार अभी अपनी क्षमता के एक अंश पर ही है। ₹2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम समझौता, 32 महत्वपूर्ण खनिजों की साझा सूची, और इसी महीने अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक — यह साझेदारी की शुरुआत है, न कि पूर्णता।

मुख्य बातें

कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत कनाडा व्यापार अभी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे है।
भारत को कनाडा का पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ — मात्र लगभग 15 करोड़ डॉलर का — जबकि भारत सालाना लगभग 150 अरब डॉलर का तेल आयात करता है।
मार्च 2026 में कनाडा और भारत के बीच लगभग 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ; भारत के 24 में से 18 परमाणु रिएक्टर कनाडाई डिज़ाइन पर हैं।
भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची के सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं, जिनमें लिथियम, ग्रेफाइट और टंगस्टन शामिल हैं।
दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता है; इसी महीने दोनों एजेंसियों की बैठक होने वाली है।

भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक साझेदारी अभी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे है। उन्होंने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा को उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में गिनाया जहाँ दोनों देशों के बीच सहयोग तेज़ी से बढ़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र: तेल से लेकर यूरेनियम तक

कूटर ने कहा कि कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, फिर भी भारत को उसका पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ, जिसकी कीमत मात्र लगभग 15 करोड़ डॉलर थी। उन्होंने इसे संभावना और वास्तविकता के बीच की खाई का सबसे स्पष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, "भारत हर साल लगभग 150 अरब डॉलर का तेल आयात करता है — इससे साफ है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की कितनी बड़ी संभावना मौजूद है।"

यूरेनियम के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मार्च 2026 में कनाडा ने भारत के साथ लगभग 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया। उच्चायुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के 24 परमाणु रिएक्टरों में से 18 कनाडाई डिज़ाइन पर आधारित हैं, जो भविष्य के परमाणु ऊर्जा सहयोग के लिए एक सुदृढ़ तकनीकी आधार प्रदान करते हैं।

कूटर ने बताया कि कनाडा अपने पश्चिमी तट पर नए ऊर्जा निर्यात बुनियादी ढाँचे का विकास कर रहा है, जिससे एलपीजी और एलएनजी का भारत को निर्यात और सुगम होगा। उनके अनुसार, "अगले तीन से बारह महीनों में ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ने की उम्मीद है।"

महत्वपूर्ण खनिज: लिथियम, टंगस्टन और 32 खनिजों की सूची

कूटर ने ध्यान दिलाया कि भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं। फिर भी अभी भारत इनमें से अधिकांश की बेहद कम मात्रा कनाडा से आयात करता है। पोटाश का कुछ व्यापार होता है, जबकि तांबे और निकेल का व्यापार अत्यंत सीमित है।

उन्होंने टंगस्टन का उदाहरण विशेष रूप से दिया, जो रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, "कनाडा के पास टंगस्टन के बड़े भंडार हैं और हम भारत के खान मंत्रालय तथा निजी कंपनियों के साथ आपूर्ति, प्रोसेसिंग और बाज़ार विकास पर चर्चा कर रहे हैं।" इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए आवश्यक लिथियम और ग्रेफाइट के कनाडाई भंडार को उन्होंने भारत की ऊर्जा संक्रमण यात्रा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। कनाडा इन खनिजों के खनन क्षेत्र में रेलवे सहित बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश कर रहा है।

अंतरिक्ष सहयोग: 30 साल पुराना आधार, नई उड़ान

कूटर ने बताया कि दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता मौजूद है और इसी महीने दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है। उन्होंने कहा कि इससे आगे और प्रगति की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से परिपक्व हो रहा है। उन्होंने स्काईरूट जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया, जिनका उन्होंने कुछ सप्ताह पहले दौरा भी किया था, और कहा कि कनाडा में भी इसी तरह का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है। कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियाँ पहले से ही बेंगलुरु के आसपास सक्रिय हैं, जो इस भागीदारी को व्यावहारिक धरातल देती हैं।

व्यापार की मौजूदा स्थिति और आगे की राह

उच्चायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में माना कि "भारत और कनाडा के बीच अभी उतना व्यापार नहीं है, जितनी क्षमता दोनों देशों में मौजूद है।" निवेश का स्तर ठीक ठाक है, लेकिन कृषि, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों में व्यापार सीमित है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के राजनयिक संबंध हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में कूटर का यह बयान द्विपक्षीय आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है — "कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ हम अभी उस आर्थिक साझेदारी की शुरुआती अवस्था में हैं, जो भविष्य में कहीं ज़्यादा बड़ी हो सकती है।"

आने वाले महीनों में अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक के नतीजे, खनिज आपूर्ति वार्ता की प्रगति और कनाडा के पश्चिमी तट के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की तैयारी — ये तीनों मिलकर इस साझेदारी की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का भी प्रमाण है। 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम समझौता सकारात्मक है, लेकिन 150 अरब डॉलर के भारतीय ऊर्जा आयात बाज़ार के सामने यह एक अंश है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या दोनों देश राजनयिक उथल पुथल से आगे निकलकर ठोस आपूर्ति शृंखला समझौतों तक पहुँच सकते हैं — खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में जहाँ भारत की रणनीतिक ज़रूरत सर्वाधिक है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत कनाडा के बीच ऊर्जा व्यापार की क्या स्थिति है?
कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन भारत को उसका पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ डॉलर थी। तुलनात्मक रूप से, भारत हर साल लगभग 150 अरब डॉलर का तेल आयात करता है, जो इस क्षेत्र में विशाल अनुपयुक्त संभावना को दर्शाता है।
भारत कनाडा यूरेनियम समझौता क्या है?
मार्च 2026 में कनाडा और भारत के बीच लगभग 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ। भारत के 24 परमाणु रिएक्टरों में से 18 कनाडाई डिज़ाइन पर आधारित हैं, जो इस साझेदारी को तकनीकी रूप से और मज़बूत बनाता है।
कनाडा के पास भारत के लिए कौन से महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध हैं?
भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के लिए आवश्यक लिथियम और ग्रेफाइट, रक्षा क्षेत्र के लिए ज़रूरी टंगस्टन, और पोटाश, तांबा व निकेल शामिल हैं।
भारत कनाडा अंतरिक्ष सहयोग कितना पुराना है और आगे क्या होगा?
दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता मौजूद है। अक्टूबर 2026 में दोनों एजेंसियों की बैठक होने वाली है, जिससे स्टार्टअप इकोसिस्टम और निजी रॉकेट लॉन्च क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
कनाडा के उच्चायुक्त ने भारत कनाडा व्यापार की मौजूदा स्थिति पर क्या कहा?
उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत और कनाडा के बीच अभी उतना व्यापार नहीं है जितनी क्षमता दोनों देशों में मौजूद है। उन्होंने कृषि, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों को उन क्षेत्रों के रूप में गिनाया जहाँ व्यापार अभी भी सीमित है।
राष्ट्र प्रेस
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