भारत-कनाडा व्यापार: अंतरिक्ष से यूरेनियम तक $2.6 अरब के समझौते, उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने गिनाई अपार संभावनाएं
सारांश
मुख्य बातें
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत में कहा कि भारत और कनाडा के बीच वर्तमान व्यापार उनकी वास्तविक क्षमता के मुकाबले बेहद सीमित है — लेकिन अंतरिक्ष, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और कृषि जैसे क्षेत्रों में दोनों देश अब एक नई आर्थिक साझेदारी की नींव रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में हुए लगभग $2.6 अरब के यूरेनियम आपूर्ति समझौते से यह साझेदारी और ठोस हो गई है।
अंतरिक्ष सहयोग: 30 साल पुरानी नींव पर नया ढांचा
उच्चायुक्त कूटर ने बताया कि इसी महीने दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच एक अहम बैठक होने वाली है। उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी।' गौरतलब है कि दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता पहले से मौजूद है।
कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां बेंगलुरु के इर्द-गिर्द पहले से ही सक्रिय हैं। कूटर ने स्काईरूट जैसी भारतीय स्टार्टअप कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ सप्ताह पहले इस कंपनी का दौरा किया था। उनके अनुसार, भारत ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और कनाडा में भी इसी तरह का स्टार्टअप परिवेश तेज़ी से विकसित हो रहा है।
तेल और ऊर्जा: $150 अरब के आयात बाज़ार में कनाडा की हिस्सेदारी नगण्य
कूटर ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा: कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन भारत को उसका पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ, और उसकी कीमत केवल लगभग $15 करोड़ थी। जबकि भारत हर साल लगभग $150 अरब का तेल आयात करता है।
उन्होंने कहा, 'इससे साफ है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की कितनी बड़ी संभावना मौजूद है।' कनाडा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा उत्पादक है। कूटर ने यह भी बताया कि कनाडा अपने पश्चिमी तट पर ऐसे बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है जिससे भारत को ऊर्जा निर्यात करना और सुगम होगा।
यूरेनियम और परमाणु ऊर्जा: $2.6 अरब का आधार
मार्च 2026 में कनाडा ने भारत के साथ लगभग $2.6 अरब का यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया। यह संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी गहरा है — भारत के 24 परमाणु रिएक्टरों में से 18 कनाडाई डिज़ाइन पर आधारित हैं। कूटर के अनुसार, यह भविष्य में और अधिक सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण खनिज: 32 में से 32 कनाडा के पास
कूटर ने बताया कि भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं। इनमें लिथियम, ग्रेफाइट (जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए आवश्यक हैं), तांबा, निकेल और टंगस्टन शामिल हैं।
फ़िलहाल भारत इन खनिजों में से अधिकांश की बेहद सीमित मात्रा ही कनाडा से आयात करता है — पोटाश का कुछ व्यापार होता है, जबकि तांबे और निकेल का आदान-प्रदान नगण्य है। कूटर ने बताया कि कनाडा अपने खनन क्षेत्र को तेज़ी से विकसित कर रहा है और इसके लिए रेलवे सहित बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। टंगस्टन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कनाडा भारत के खान मंत्रालय तथा निजी कंपनियों के साथ आपूर्ति, प्रोसेसिंग और बाज़ार विकास में सहयोग की संभावनाओं पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है।
आगे की राह: नए विकल्प, नई संभावनाएं
कूटर ने आशावाद जताते हुए कहा कि अगले तीन महीने, छह महीने, एक साल और उसके बाद भी ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ने की उम्मीद है। उनके अनुसार, भारत के पास कनाडा से ऊर्जा हासिल करने के ऐसे नए विकल्प होंगे जो पहले उपलब्ध नहीं थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और महत्वपूर्ण खनिजों की निर्भरता कम करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।