जयशंकर-अनीता आनंद मुलाकात: भारत-कनाडा संबंधों को नई ऊँचाई देने पर UNGA में बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA-81) के इतर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से द्विपक्षीय वार्ता की। जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अपने रिश्तों को 'एक नए और ऊँचे स्तर पर ले जाने' की तैयारी में हैं। यह बैठक भारत-कनाडा संबंधों में पिछले एक वर्ष में आई उल्लेखनीय बेहतरी की कड़ी में ताज़ा कदम है।
बैठक में क्या हुआ
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'UNGA-81 के दौरान कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मिलकर खुशी हुई। हमारे बीच अच्छी और सार्थक बातचीत हुई। हम दोनों देशों के रिश्तों को एक ऊँचे स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।' उन्होंने मुलाकात की तस्वीरें और एक वीडियो भी साझा किया। हालाँकि, किसी भी पक्ष ने तुरंत यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक में किन विशेष मुद्दों पर चर्चा हुई या कोई नया समझौता हुआ या नहीं।
पिछले एक वर्ष का कूटनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंधों में पिछले कुछ वर्षों की तनातनी के बाद स्पष्ट सुधार दिख रहा है। अक्टूबर 2025 में अनीता आनंद की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक साझा रोडमैप जारी किया था। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस वर्ष की शुरुआत में मुंबई और नई दिल्ली की यात्रा की।
कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस यात्रा में सुरक्षा, रक्षा सहयोग और व्यापारिक साझेदारी को नए रणनीतिक आधार पर आगे ले जाने पर सहमति जताई थी। कार्नी ने उस दौरान कहा था, 'भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत है।'
व्यापार और आर्थिक सहयोग का खाका
दोनों देशों ने 2026 तक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर बातचीत पूरी करने की प्रतिबद्धता जताई है। कनाडा के अनुसार इस प्रस्तावित व्यापार समझौते का लक्ष्य 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक पहुँचाना है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार 10.9 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024 में भारत को कनाडा का सेवा-निर्यात 15.6 अरब डॉलर तक पहुँचा — जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्राओं की भूमिका सबसे बड़ी रही।
CEPA के दायरे में वस्तु व सेवा व्यापार, निवेश, कृषि उत्पाद, डिजिटल व्यापार, लोगों की आवाजाही और टिकाऊ विकास शामिल हैं।
ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा सहयोग
दोनों देशों ने एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा भी की है, जिसमें लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG), लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG), यूरेनियम, सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। एक उल्लेखनीय उपलब्धि 2.6 अरब डॉलर का वह समझौता है, जिसके तहत कनाडाई कंपनी Cameco 2027 से 2035 के बीच परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत को करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति करेगी।
गौरतलब है कि दोनों देशों ने महत्त्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष अनुसंधान, उच्च शिक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण को भी प्राथमिकता क्षेत्रों में रखा है। सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच व्यवस्थित संवाद पुनः शुरू किया गया है, जिसमें आतंकवाद, हिंसक चरमपंथ, साइबर अपराध, जबरन वसूली, वित्तीय धोखाधड़ी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दे एजेंडे पर हैं।
भारतीय डायस्पोरा की भूमिका
कनाडा सरकार के आँकड़ों के अनुसार, वहाँ 18 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं। 2024 में स्टडी परमिट सहित अधिकांश इमिग्रेशन श्रेणियों में भारत, कनाडा के लिए सबसे बड़ा स्रोत देश रहा। यह विशाल डायस्पोरा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों को प्रभावित करने वाला एक स्थायी कारक है।
आने वाले महीनों में CEPA वार्ता की प्रगति और ऊर्जा व सुरक्षा समझौतों के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा कि जयशंकर का 'ऊँचे स्तर' का वादा ठोस नीतिगत बदलाव में तब्दील होता है या नहीं।