जयशंकर-आनंद मुलाकात: भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा, व्यापार-रक्षा सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, रक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान के क्षेत्रों में हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक के बाद जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का नेतृत्व और निरंतर संवाद मिलकर भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ कर रहे हैं।
बैठक में क्या हुआ
जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'आज नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मिलकर खुशी हुई। हमने व्यापार और निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, रक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही, प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया।' उन्होंने आगे कहा, 'अपने नेतृत्व और सरकार तथा उद्योग जगत के साथ लगातार बातचीत के जरिए हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।'
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश पिछले कुछ वर्षों की कूटनीतिक तनातनी के बाद संबंध सामान्य करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। गौरतलब है कि आनंद का यह जून 2025 के बाद भारत का तीसरा दौरा है।
कनाडाई मंत्री की प्रतिक्रिया और रोडमैप
आनंद ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, 'ठीक एक साल पहले नई दिल्ली में, मैंने कनाडा-भारत संबंधों के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार करने के लिए अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। आज लौटकर यह देखकर उत्साहित हूँ कि हमने कितनी प्रगति की है। व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने से लेकर ऊर्जा, नवाचार और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तक, दोनों देश कई मोर्चों पर आगे बढ़े हैं।'
आनंद ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-कनाडा संबंधों का वास्तविक महत्व इस बात में निहित है कि दोनों देश मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव हो रहे हों।
इंडो-पैसिफिक और मिडिल पावर्स की भूमिका
बैठक से पहले बुधवार को ही नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में आनंद ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में 'मिडिल पावर्स' (मध्यम दर्जे की ताकतों) की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'जब हमारे हित एक जैसे हों, तो साथ मिलकर काम करके हम ज्यादा असर डाल सकते हैं।' कनाडाई मंत्री ने इस संदर्भ में एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में दोनों देशों की साझी भूमिका को भी रेखांकित किया।
यह दृष्टिकोण भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति के अनुकूल है, जिसमें क्वाड और अन्य बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय का रुख
विदेश मंत्रालय (MEA) ने आनंद के दौरे का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों को हाल की प्रगति को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय साझेदारी को और सुदृढ़ करने का अवसर देती है। मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे से दोनों पक्षों के बीच संस्थागत संवाद और व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आगे की राह
भारत-कनाडा संबंध पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक तनाव से गुजरे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय संवाद यह संकेत देता है कि दोनों सरकारें रणनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रही हैं। व्यापार वार्ता, ऊर्जा सहयोग और इंडो-पैसिफिक में साझा हितों को लेकर आगामी महीनों में और ठोस कदमों की उम्मीद की जा सकती है।