जयशंकर-आनंद मुलाकात: भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने सुरक्षा, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिए जारी प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की। जयशंकर और आनंद ने सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के विस्तार पर भी गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी परस्पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
आर्थिक साझेदारी और व्यापार समझौते पर प्रगति
दोनों मंत्रियों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत को शीघ्र पूरा करने की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार और आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने के नए अवसरों पर भी चर्चा की। शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क को प्रगाढ़ करने को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई।
उच्च-स्तरीय जुड़ाव की प्रतिबद्धता
दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक जुड़ाव की गति बनाए रखने और इसे ठोस परिणामों में बदलने के महत्व को रेखांकित किया। यह बैठक भारत और कनाडा के नागरिकों के लिए रचनात्मक एवं दूरदर्शी साझेदारी को आगे ले जाने की उभय-पक्षीय प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
क्षेत्रीय पृष्ठभूमि और बहुपक्षीय सहयोग
गौरतलब है कि विदेश मंत्री जयशंकर की यह राजनयिक सक्रियता ऐसे समय में आई है जब ईरान में जारी संघर्ष और यमन में सऊदी अरब तथा हूती समूह के बीच बढ़ते टकराव के कारण पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक अलग बयान में यह भी कहा गया कि जयशंकर अबू धाबी में आयोजित रायसीना मिडिल ईस्ट के दूसरे संस्करण में भी हिस्सा लेंगे और भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
क्या होगा आगे
दोनों देशों के बीच CEPA वार्ता की गति और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के परिणाम आने वाले महीनों में भारत-कनाडा संबंधों की दिशा तय करेंगे। इस बैठक से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद का सिलसिला और तेज़ होगा तथा द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के नए द्वार खुलेंगे।