जयशंकर से मिलेंगी कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद, 13-16 अक्टूबर को भारत दौरे पर व्यापार-रक्षा एजेंडा
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद 13 से 16 अक्टूबर 2026 के बीच भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगी, जहाँ वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर महत्वपूर्ण बातचीत करेंगी। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने सोमवार, 12 अक्टूबर को इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा की। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 30.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया था।
दौरे का कार्यक्रम और प्राथमिकताएँ
अनीता आनंद की यह यात्रा भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दोनों को कवर करेगी। नई दिल्ली में वे उन प्राथमिकताओं पर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए जयशंकर से मिलेंगी जिन्हें दोनों देशों ने द्विपक्षीय रोडमैप में चिह्नित किया है — इनमें व्यापार, ऊर्जा, लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Ties), और सुरक्षा व रक्षा शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह बैठक सितंबर 2025 के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच 11वीं मुलाकात होगी, जो कनाडा-भारत राजनयिक संबंधों में निरंतरता और बढ़ती सक्रियता को रेखांकित करती है।
आर्थिक साझेदारी की मज़बूत नींव
दोनों देशों के बीच 2025 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा, जिसमें 11 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार शामिल है। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, ओटावा इस आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब कनाडा बदलती वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ अपने जुड़ाव को विस्तार दे रहा है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भागीदारी
नई दिल्ली में आनंद ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भी भाग लेंगी, जहाँ वे 'मिडिल पावर्स और बदलती वैश्विक व्यवस्था' पर एक पैनल चर्चा में शामिल होंगी। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, वे भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में बहुपक्षीय सहयोग के महत्व को रेखांकित करेंगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कनाडा की विश्वसनीय भागीदार की भूमिका को भी उजागर करेंगी।
व्यापक कूटनीतिक संदर्भ
यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों में नए सिरे से उच्च-स्तरीय संपर्क के एक व्यापक दौर का हिस्सा है। कनाडा सरकार ने इस निरंतर जुड़ाव को बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का स्वाभाविक विस्तार बताया है। व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को एक ही कूटनीतिक ढाँचे में रखना उन मुद्दों की व्यापकता को दर्शाता है जो दोनों विदेश मंत्रियों की वार्ता में केंद्रीय भूमिका निभाएँगे।
आगे देखें तो यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है — विशेष रूप से तब जब दोनों देश एक औपचारिक व्यापार समझौते की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।