भारत और कनाडा के बीच यूरेनियम सप्लाई का महत्वपूर्ण समझौता, परमाणु ऊर्जा में मिलेगी नई गति
सारांश
Key Takeaways
- भारत और कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम सप्लाई समझौता।
- भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
- कनाडा से दीर्घकालिक यूरेनियम आयात की व्यवस्था।
- निवेशकों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कनाडा के साथ 2.6 अरब डॉलर के दीर्घकालिक यूरेनियम सप्लाई समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगा, जिसमें देश 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में घरेलू स्तर पर यूरेनियम उत्पादन भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होगा। इसलिए, दीर्घकालिक यूरेनियम आयात की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का घरेलू यूरेनियम उत्पादन कुल मांग के मुकाबले काफी कम रहने की उम्मीद है। इसका अर्थ है कि भारत को वर्तमान और भविष्य के परमाणु रिएक्टरों के संचालन के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसलिए कनाडा के साथ यह दीर्घकालिक सप्लाई समझौता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कजाकिस्तान, जो विश्व का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है, भारत के लिए यूरेनियम का प्रमुख स्रोत रहा है। अब, कनाडा के साथ हुए इस समझौते से भारत को इस महत्वपूर्ण ईंधन का एक और बड़ा स्रोत मिलने की संभावना है, जिससे देश के परमाणु रिएक्टरों को आवश्यक ऊर्जा मिल सकेगी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिसंबर 2025 में भारत की संसद ने नागरिक परमाणु ऊर्जा ढांचे में सुधार को मंजूरी दी है, जिसके तहत पहली बार घरेलू और विदेशी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने, उनके मालिक बनने और संचालन करने की अनुमति दी गई है। पहले यह क्षेत्र पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में था।
इस सुधार ने लंबे समय से चल रही सप्लायर लायबिलिटी से संबंधित चिंताओं को भी हल किया है और नियामकीय ढांचे को अधिक स्पष्ट और स्थिर बनाया है। इससे विदेशी तकनीकी साझेदारों और निजी निवेश के लिए रास्ता साफ हुआ है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार के लिए आवश्यक है।
विश्लेषकों का कहना है कि कनाडा यूरेनियम की आपूर्ति के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि वहां कई नए खनन प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में देश का यूरेनियम उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, और भारत को लंबे समय तक ईंधन की आपूर्ति का भरोसा मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के साथ यूरेनियम समझौते को 'ऐतिहासिक डील' बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, उन्नत रिएक्टर, और पूरे परमाणु मूल्य श्रृंखला में मिलकर काम करेंगे। वहीं, कनाडा के नेता मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश भारत की परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान देने की क्षमता रखता है और दोनों देश एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी शुरू कर रहे हैं।
शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि कनाडा की कंपनी कैमेको और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का व्यावसायिक समझौता हुआ है। यह समझौता भारत की नागरिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
संयुक्त बयान के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों की पूरक क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए भारत-कनाडा रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, पारंपरिक ऊर्जा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा, ताकि ऊर्जा सस्ती, टिकाऊ, और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाली बन सके।