बीजिंग में WMCC की 35वीं बैठक: भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और चीन ने 28 मई 2025 को बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर सलाह और समन्वय के लिए गठित वर्किंग मैकेनिज्म (WMCC) की 35वीं बैठक आयोजित की। इस बैठक में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों के निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में बनी शांति और स्थिरता पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
बैठक में क्या हुआ
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बातचीत 'सकारात्मक और भविष्योन्मुखी' रही। दोनों देशों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और राजनयिक तथा सैन्य स्तर पर नियमित संवाद एवं संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। MEA के बयान में कहा गया, 'दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष जताया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद मिली है।'
भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों से संबंधित एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म की अगली बैठक शीघ्र आयोजित करने पर विशेष जोर दिया। दोनों देशों ने उन तंत्रों का उपयोग जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की जिन पर 24वीं स्पेशल रिप्रजेंटेटिव (SR) वार्ता के दौरान सहमति बनी थी।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने की। चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों विभाग की महानिदेशक होउ यानकी ने किया। यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक लियू जिनसोंग और सहायक विदेश मंत्री होंग लेई से भी अलग-अलग मुलाकात की।
अगली SR बैठक की तैयारी
दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि वे चीन में होने वाली अगली स्पेशल रिप्रजेंटेटिव बैठक की मज़बूत तैयारी के लिए मिलकर काम करेंगे। यह बैठक भारत-चीन सीमा विवाद के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है। गौरतलब है कि गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद की यह श्रृंखला संबंधों को पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
SCO ढाँचे में द्विपक्षीय सहयोग
इससे पहले 16-17 अप्रैल को नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के ढाँचे के अंतर्गत भारत-चीन द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। उस बैठक में भारत की ओर से SCO के नेशनल कोऑर्डिनेटर राजदूत आलोक ए. डिमरी और चीन की ओर से राजदूत यान वेनबिन ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया था। दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने संयुक्त सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज से मुलाकात कर SCO ढाँचे के तहत सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।
उल्लेखनीय है कि किर्गिस्तान के पास 2025-2026 के लिए SCO की अध्यक्षता है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने इस कार्यकाल की थीम घोषित की है — 'SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर मिलकर आगे बढ़ना।'
आगे क्या होगा
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति को देखते हुए, अगली SR बैठक और सीमा पार नदी तंत्र की बैठक कूटनीतिक कैलेंडर में अहम स्थान रखती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित संस्थागत संवाद ही दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विश्वास निर्माण की आधारशिला है।