एसआरआईए कानून पर भारत ने अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को सुनाई चिंता, ऊर्जा बाज़ार पर असर का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूस और ईरान पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से संबंधित सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट (SRIA) के संभावित प्रभावों को लेकर भारत की चिंताओं से एक उच्चस्तरीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में SRIA के भारत अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों को रेखांकित किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्य ब्रायन मास्ट के नेतृत्व वाले द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस बैठक में SRIA कानून के अलावा भारत अमेरिका संबंधों की भावी दिशा पर भी विस्तार से विचार विमर्श हुआ।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में द्वि साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया, "रविवार को विदेश सचिव की कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई थी। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष, कांग्रेस सदस्य ब्रायन मास्ट कर रहे हैं। बैठक में द्विपक्षीय प्रकृति के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश सचिव ने SRIA कानून के बारे में हमारी चिंताओं से अवगत कराया, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर इसके प्रभाव भी शामिल हैं।"
बैठक का विस्तृत दायरा
MEA के अनुसार, बैठक में भारत अमेरिका संबंधों के सभी पहलुओं को समाहित किया गया — जिनमें ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद रोधी सहयोग और नेविगेशन की स्वतंत्रता जैसे आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय मुद्दे प्रमुख रहे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रूसी तेल आयात के मामले में पश्चिमी देशों के साथ एक सूक्ष्म संतुलन बना रहा है।
गौरतलब है कि SRIA के लागू होने की स्थिति में भारतीय कंपनियों पर द्वितीयक प्रतिबंधों का खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि भारत रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल है। ऐसे में भारत की यह कूटनीतिक पहल उसके ऊर्जा हितों की रक्षा की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है।
न्यूयॉर्क में समानांतर वार्ता
इसी क्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हूकर से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग, TRUST पहल और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को लेकर विचारों का आदान प्रदान किया। इस बैठक में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा भी उपस्थित रहे।
मिस्री ने न्यूयॉर्क में ही अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग से भी अलग से भेंट की। MEA के अनुसार, दोनों पक्ष पैक्स सिलिका पहल सहित महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। इसमें सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों में साझेदारी के ज़रिये आपूर्ति शृंखला को मज़बूत करना भी शामिल रहा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह कदम उसकी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को दर्शाता है — जहाँ वह अमेरिका के साथ मज़बूत साझेदारी बनाए रखते हुए अपने ऊर्जा और रक्षा हितों से समझौता नहीं करना चाहता। आलोचकों का कहना है कि SRIA यदि उसके वर्तमान स्वरूप में लागू हुआ, तो यह उन देशों को भी प्रभावित कर सकता है जो रूसी ऊर्जा पर अपनी ज़रूरतों के लिए निर्भर हैं — न कि राजनीतिक समर्थन के लिए।
आगे क्या
भारत अमेरिका के बीच इन वार्ताओं का सिलसिला ऐसे दौर में जारी है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और भू राजनीतिक मुद्दों पर जटिल बातचीत एक साथ चल रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी कांग्रेस SRIA पर भारत की चिंताओं को किस हद तक समायोजित करती है और क्या आगामी द्विपक्षीय बैठकों में कोई ठोस आश्वासन मिलता है।