पीएम मोदी के तीन देशों के दौरे में भारत की कूटनीतिक जीत: यूरेनियम, ब्रह्मोस और नई साझेदारियाँ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का छह दिवसीय दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें परमाणु ऊर्जा, रक्षा निर्यात और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियाँ हासिल हुईं। इस दौरे के दौरान भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की आपूर्ति शुरू हुई, इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल समझौता हुआ और न्यूजीलैंड के साथ 2030 रोडमैप की घोषणा की गई। इस दौरे पर अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया: दशकों की बाधा के बाद यूरेनियम आपूर्ति शुरू
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि मेलबर्न में रही, जहाँ ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की भारत को कानूनी आपूर्ति की अंतिम प्रशासनिक बाधा दूर हो गई। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय बैठक के बाद घोषणा की कि ऑस्ट्रेलिया भारतीय परमाणु रिएक्टरों को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। यह भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि जनवरी 2008 में भारत के विशेष दूत ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश के लिए यूरेनियम की माँग लेकर ऑस्ट्रेलिया पहुँचे थे, लेकिन तब शर्त रखी गई थी — 'पहले परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर करें।' 2006 में जब अमेरिका भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ा रहा था, तब ऑस्ट्रेलिया ने इसका समर्थन नहीं किया था। 2008 में उसने अपनी पहले की सैद्धांतिक सहमति से भी पीछे हटते हुए लोकतांत्रिक भारत को यूरेनियम देने से इनकार किया — जबकि चीन को बिक्री पर चर्चा जारी रही।
सत्ता संभालने के लगभग 100 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2014 में लंबे समय से लंबित नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस बार कोई शर्त नहीं, कोई उपदेश नहीं — केवल एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में भारत को सम्मान दिया गया।
इंडोनेशिया: ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल समझौते, सर्वोच्च नागरिक सम्मान
इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया। इसके साथ ही भारत और इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए समझौते किए। इससे इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद तीसरा देश बन गया जिसने भारतीय रक्षा तकनीक पर भरोसा जताया है। अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली से संबंधित समझौते भी इस दौरे में संपन्न हुए।
दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारतीय रक्षा क्षमता को चुना। ब्रह्मोस की विश्वसनीयता उसके वास्तविक युद्ध अनुभव से जुड़ी है — यह केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
न्यूजीलैंड: 2030 रोडमैप और समुद्री साझेदारी का विस्तार
ऑकलैंड में पारंपरिक 'माओरी पोविरी' स्वागत समारोह के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने नई रणनीतिक साझेदारी और 2030 रोडमैप की घोषणा की। इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर रक्षा, 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के व्यापार लक्ष्य और भारतीय नौसेना तथा न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच लॉजिस्टिक्स समझौता शामिल है।
अब भारतीय नौसेना का जहाज ऑकलैंड में सहायता और आपूर्ति प्राप्त कर सकेगा। यह इस बात का संकेत है कि भारत की समुद्री साझेदारी का विस्तार हिंद महासागर से दक्षिण प्रशांत तक हो रहा है।
मैरी मिलबेन की प्रतिक्रिया
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने एक्स पर लिखा, 'इंडोनेशिया से लेकर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक, मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान कर रही है और बिजनेस करने के लिए भारत को सबसे अच्छी जगह के तौर पर चुन रही है! जय हिंद।' यह प्रतिक्रिया इस दौरे की व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुगूँज को रेखांकित करती है।
आगे की राह
यह दौरा भारत की बदलती वैश्विक स्थिति को स्पष्ट करता है — चाहे वह परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र हो, रक्षा निर्यात हो या समुद्री सुरक्षा। ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की आपूर्ति, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस की बिक्री और न्यूजीलैंड के साथ लॉजिस्टिक्स समझौता — ये तीनों मिलकर भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को ठोस आधार देते हैं। अब देखना यह होगा कि इन समझौतों का क्रियान्वयन किस गति से होता है।