भारत ईएफटीए व्यापार समझौता: 'अभूतपूर्व निवेश प्रतिबद्धता', 200+ कंपनियाँ शिखर सम्मेलन में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं निवेश समझौते को दोनों पक्ष दीर्घकालिक आर्थिक भागीदारी की मजबूत बुनियाद मान रहे हैं। स्विट्जरलैंड के ट्रेड रिलेशंस डिवीजन के निदेशक एवं ईएफटीए के उप महासचिव मार्कस श्लागेनहाउफ ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यह अपनी तरह का पहला ऐसा समझौता है जिसमें 'अभूतपूर्व निवेश प्रतिबद्धता' शामिल है और यह भारत तथा ईएफटीए देशों के संबंधों को नई ऊँचाई देगा।
समझौते की विशेषताएँ
श्लागेनहाउफ ने स्पष्ट किया कि यह महज एक पारंपरिक व्यापार समझौता नहीं है — यह दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक सहयोग का आधार भी है। उन्होंने कहा, "जब कंपनियों को एक दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलती है, तो व्यापारिक गतिविधियाँ तेज होती हैं और उसके बाद निवेश का प्रवाह भी बढ़ने लगता है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक अनुभव बताता है कि जब दो देशों के बीच वरीयता प्राप्त व्यापार व्यवस्था (प्रीफ्रेंशियल ट्रेड अरेंजमेंट) लागू होती है, तो द्विपक्षीय व्यापार अनिवार्य रूप से बढ़ता है।
भारत ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन का महत्त्व
श्लागेनहाउफ ने बताया कि यह दूसरा भारत ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य समझौते के लागू होने की पहली वर्षगाँठ का मूल्यांकन करना है। इस सम्मेलन में ईएफटीए देशों की 200 से अधिक कंपनियाँ भाग ले रही हैं, जो नए निवेश एवं व्यापारिक अवसरों की पहचान करने के उद्देश्य से आई हैं।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
निवेश के लिए अनुकूल माहौल
उप महासचिव ने रेखांकित किया कि निवेश तभी गति पकड़ता है जब नीतिगत और नियामकीय ढाँचा निवेशकों के लिए स्थिर और अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष — ईएफटीए देश और भारत — निवेश को सुविधाजनक बनाने और कारोबारी माहौल सुधारने के लिए मिलकर प्रयास कर रहे हैं।
एक ओर ईएफटीए सदस्य देश अपनी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार नियामकीय प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की दिशा में काम कर रही है।
स्विट्जरलैंड भारत संबंधों पर विशेष जोर
श्लागेनहाउफ ने विशेष रूप से स्विट्जरलैंड और भारत के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव को एक नए स्तर पर ले जाने में सहायक होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार विविधीकरण को लेकर नई रणनीतिक चर्चाएँ चल रही हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं का क्रियान्वयन इस साझेदारी की असली परीक्षा होगी।