13 अक्टूबर 2026
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भारत ने भूटान को सौंपे ₹290 करोड़, 13वीं पंचवर्षीय योजना की परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार

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भारत ने भूटान को सौंपे ₹290 करोड़, 13वीं पंचवर्षीय योजना की परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत ₹290 करोड़ सौंपे — शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल कौशल और बुनियादी ढाँचे पर फोकस। 10 लाख लोगों को डिजिटल स्किलिंग का फायदा मिलने की उम्मीद, और 200 बिस्तरों के कैंसर अस्पताल सहित सुपर स्पेशियलिटी परियोजना की प्रगति भी समीक्षा में रही।

मुख्य बातें

भारत ने 13 अक्टूबर 2026 को भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए ₹290 करोड़ (नू.
2.90 अरब ) की वित्तीय सहायता सौंपी।
यह राशि 19वीं मासिक समन्वय बैठक के दौरान भूटान के वित्त मंत्रालय को प्रदान की गई।
डिजिटल स्किलिंग कार्यक्रम के लिए ₹8.83 करोड़ आवंटित; भूटान के सभी गेवोग में लगभग 10 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद।
200 बिस्तरों के कैंसर अस्पताल और 430 बिस्तरों वाली MDSSH परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई।
परियोजनाओं में 11 नए पुल , 37 स्कूलों का उन्नयन, 100 इलेक्ट्रिक कारें और 45 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं।
जयशंकर की 16-17 सितंबर की भूटान यात्रा और 30 जुलाई की पाँचवीं योजना वार्ता का बैठक में उल्लेख हुआ।

भारत ने 13 अक्टूबर 2026 को भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत चल रही विकास परियोजनाओं के लिए ₹290 करोड़ (नू. 2.90 अरब) की वित्तीय सहायता भूटान के वित्त मंत्रालय को सौंपी। थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं के लिए भारत सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

19वीं मासिक समन्वय बैठक में हुआ हस्तांतरण

यह राशि 13वीं पंचवर्षीय योजना की 19वीं मासिक समन्वय बैठक के दौरान सौंपी गई, जिसमें भारतीय मिशन के अधिकारी और भूटान की शाही सरकार (RGoB) के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ आगे की कार्ययोजना पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय हुई जब 30 जुलाई को दोनों देशों के विदेश सचिवों के नेतृत्व में पाँचवीं योजना वार्ता आयोजित हो चुकी थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर 16-17 सितंबर को भूटान का दौरा कर चुके थे।

किन परियोजनाओं को मिलेगी सहायता

इस फंडिंग से जिन परियोजनाओं को लाभ मिलेगा उनमें रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान (RUB) के कॉलेजों में आधुनिक बुनियादी ढाँचे का विकास, मानव संसाधन और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिक्षकों-छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम तथा फसल सुरक्षा हेतु चेन-लिंक फेंसिंग के दूसरे चरण के कार्य शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, फुएंटशोलिंग स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान का पुनर्विकास, थिम्पू में राष्ट्रीय मौसम एवं बाढ़ चेतावनी केंद्र की स्थापना और RUB के आठ कॉलेजों में डिजिटल तकनीक का समावेश भी इस सहायता राशि से किया जाएगा।

डिजिटल कौशल कार्यक्रम के लिए ₹8.83 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं। इससे भूटान के सभी गेवोग (स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों) में लगभग 10 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है।

बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य में भी निवेश

सहायता राशि का उपयोग थिम्पू स्थित रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के बुनियादी ढाँचे, थिम्पू ज़िला न्यायालय के निर्माण और गेलेफू जनरल अस्पताल के नवीनीकरण के लिए भी किया जाएगा।

बैठक में महत्वपूर्ण राजमार्ग पुलों के पुनर्निर्माण, 11 नए पुलों के निर्माण, 37 केंद्रीय और क्लस्टर स्कूलों के उन्नयन तथा सरकारी उपयोग के लिए 100 इलेक्ट्रिक कारों और सार्वजनिक परिवहन हेतु 45 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की समीक्षा भी की गई। थिम्पू में दो स्थानों पर सभी मंत्रालयों के लिए नए सरकारी कार्यालय भवनों के निर्माण की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परियोजना की समीक्षा

बैठक में भारत की सहायता से चल रही सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आकलन किया गया। साथ ही मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (MDSSH) परियोजना की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा हुई।

इस परियोजना में 200 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और 430 बिस्तरों वाली इनडोर-आउटडोर चिकित्सा सुविधा शामिल है, जिसे जिग्मे दोर्जी वांगचुक नेशनल रेफरल हॉस्पिटल और थिम्पू जनरल हॉस्पिटल से जोड़ा गया है।

भारत की प्रतिबद्धता और आगे की राह

दोनों पक्षों ने 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत की सहायता और परियोजनाओं की प्रगति की सराहना की। भारत ने भूटान के साथ सहयोग एवं समन्वय को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह सहायता भारत-भूटान के बीच दशकों पुराने विकास साझेदारी के ढाँचे को और मज़बूत करती है तथा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊँचाई देने का काम करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बांग्लादेश और मालदीव में आए राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच भूटान को अपनी कक्षा में बनाए रखने की कूटनीतिक ज़रूरत को भी रेखांकित करती है। गौरतलब है कि चीन भूटान के साथ सीमा वार्ता में सक्रिय है, ऐसे में भारत की यह वित्तीय प्रतिबद्धता केवल विकास सहायता नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश भी है। डिजिटल स्किलिंग से 10 लाख लोगों तक पहुँच और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जैसी परियोजनाएँ दर्शाती हैं कि भारत अब बुनियादी ढाँचे से आगे बढ़कर मानव विकास को भी साझेदारी का आधार बना रहा है — और यही दीर्घकालिक प्रभाव की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने भूटान को ₹290 करोड़ की सहायता क्यों दी?
यह राशि भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत चल रही विकास परियोजनाओं के लिए भारत सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भूटान की परियोजनाओं को गति देना है।
₹290 करोड़ से भूटान में कौन-कौन सी परियोजनाएँ लाभान्वित होंगी?
इस राशि से रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान के कॉलेजों में बुनियादी ढाँचे का विकास, राष्ट्रीय मौसम एवं बाढ़ चेतावनी केंद्र, गेलेफू जनरल अस्पताल का नवीनीकरण, थिम्पू ज़िला न्यायालय निर्माण और डिजिटल स्किलिंग कार्यक्रम सहित कई परियोजनाओं को सहायता मिलेगी।
भूटान के डिजिटल स्किलिंग कार्यक्रम में कितने लोगों को फायदा मिलेगा?
डिजिटल स्किलिंग कार्यक्रम के लिए ₹8.83 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इससे भूटान के सभी गेवोग (स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों) में लगभग 10 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
MDSSH परियोजना क्या है और इसमें क्या शामिल है?
मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (MDSSH) भारत की सहायता से बन रही स्वास्थ्य परियोजना है जिसमें 200 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और 430 बिस्तरों वाली इनडोर-आउटडोर चिकित्सा सुविधा शामिल है। इसे जिग्मे दोर्जी वांगचुक नेशनल रेफरल हॉस्पिटल और थिम्पू जनरल हॉस्पिटल से जोड़ा गया है।
भारत-भूटान के बीच हालिया उच्च-स्तरीय संपर्क कब हुए?
30 जुलाई को दोनों देशों के विदेश सचिवों के नेतृत्व में पाँचवीं योजना वार्ता हुई थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 16-17 सितंबर को भूटान का दौरा किया था, जिसका उल्लेख 19वीं मासिक समन्वय बैठक में भी किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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