भारत-इटली स्पेस-टेक साझेदारी: वेनिस में IN-SPACe के नेतृत्व में 9 कंपनियों ने किए अहम समझौते

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भारत-इटली स्पेस-टेक साझेदारी: वेनिस में IN-SPACe के नेतृत्व में 9 कंपनियों ने किए अहम समझौते

सारांश

वेनिस में 'स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026' के मंच पर IN-SPACe के नेतृत्व में नौ भारतीय कंपनियों ने इतालवी साझेदारों के साथ MoU और फ्रेमवर्क समझौते किए — जो भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 को ज़मीन पर उतारने की ठोस शुरुआत है।

मुख्य बातें

IN-SPACe ने 9 भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल वेनिस, इटली में 'स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026' में ले जाया।
एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने इम्पल्सो स्पेस के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए — लॉन्च सर्विस नेटवर्क और मिशन मैनेजमेंट पर फोकस।
केपलर एयरोस्पेस ने अपोजियो स्पेस के साथ GSaaS इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और भारत-यूरोप सैटेलाइट सहयोग के लिए फ्रेमवर्क समझौता किया।
व्योमआईसी ने अगली पीढ़ी की नेविगेशन तकनीकों के लिए रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा की।
यह यात्रा जी20 2024 में घोषित भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 के अनुरूप है।

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने 16 मई 2026 को बताया कि उसने नौ भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए इटली के वेनिस में आयोजित 'स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026' में भाग लिया। इस भागीदारी के दौरान कई रणनीतिक समझौतों और साझेदारियों की घोषणा की गई, जो भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को रेखांकित करती है।

मुख्य समझौते और साझेदारियाँ

कर्नाटक स्थित एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने इतालवी कंपनी इम्पल्सो स्पेस के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य ग्राहकों की पहुँच बढ़ाना और इंटीग्रेटेड मिशन मैनेजमेंट तथा लॉन्च सर्विस नेटवर्क के माध्यम से नए लॉन्च अवसरों की तलाश करना है।

भारतीय कंपनी केपलर एयरोस्पेस ने अपोजियो स्पेस के साथ एक फ्रेमवर्क समझौता किया, जिसके तहत 'ग्राउंड स्टेशन ऐज़ ए सर्विस' (GSaaS) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा। यह साझेदारी भारत और यूरोप के बीच सैटेलाइट सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

व्योमआईसी ने इस आयोजन में अपनी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया और अगली पीढ़ी की नेविगेशन तथा सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों के विकास के लिए रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा की।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

इन समझौतों के अंतर्गत क्यूबसैट सिस्टम, पेलोड टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर और मिशन संचालन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अवसरों की पहचान की जाएगी। इतालवी स्पेस इंडस्ट्री स्टडी ग्रुप के साथ रणनीतिक बातचीत भी हुई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यावसायिक और तकनीकी सहयोग को और गहरा करना है।

IN-SPACe की प्रतिक्रिया

IN-SPACe के प्रोग्राम मैनेजमेंट एंड ऑथराइजेशन डायरेक्टरेट के निदेशक डॉ. पी. के. जैन ने कहा कि 'स्पेस मीटिंग्स वेनेटो' में भारत की भागीदारी देश की अंतरिक्ष क्षमताओं और निजी क्षेत्र पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने कहा, 'एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज, केपलर एयरोस्पेस और व्योमआईसी द्वारा किए गए समझौते भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक तैयारी को दिखाते हैं। भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और IN-SPACe उद्योग-आधारित अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।'

द्विपक्षीय संदर्भ और रणनीतिक महत्व

यह यात्रा 2025 में इतालवी एयरोस्पेस प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा के बाद हुई है। यह पहल जी20 शिखर सम्मेलन 2024 के दौरान घोषित भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 के अनुरूप है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से परिपक्व हो रहा है और वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रहा है।

इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप, नीति निर्माता और तकनीकी कंपनियाँ शामिल हुईं। कुल नौ भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों ने प्रतिनिधिमंडल में भाग लिया और कई सहयोगी पहलों की घोषणा की। भारत-इटली के बीच यह बढ़ता अंतरिक्ष सहयोग आने वाले वर्षों में और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर निजी क्षेत्र को वैश्विक बाज़ार में टिकाऊ उपस्थिति के लिए नीतिगत समर्थन से आगे जाकर तकनीकी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026' में भारत की भागीदारी क्या थी?
IN-SPACe के नेतृत्व में नौ भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों ने इटली के वेनिस में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष आयोजन में भाग लिया। इस दौरान इतालवी कंपनियों के साथ कई MoU और फ्रेमवर्क समझौते किए गए।
एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज और इम्पल्सो स्पेस के बीच क्या समझौता हुआ?
कर्नाटक स्थित एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने इम्पल्सो स्पेस के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य ग्राहकों की पहुँच बढ़ाना और इंटीग्रेटेड मिशन मैनेजमेंट व लॉन्च सर्विस नेटवर्क के ज़रिए नए लॉन्च अवसर तलाशना है।
केपलर एयरोस्पेस और अपोजियो स्पेस की साझेदारी किस पर केंद्रित है?
इस फ्रेमवर्क समझौते के तहत 'ग्राउंड स्टेशन ऐज़ ए सर्विस' (GSaaS) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा और भारत व यूरोप के बीच सैटेलाइट सहयोग को मज़बूत किया जाएगा। क्यूबसैट सिस्टम, पेलोड टेक्नोलॉजी और मिशन संचालन भी इसके दायरे में हैं।
यह यात्रा भारत-इटली संबंधों के व्यापक ढाँचे से कैसे जुड़ी है?
यह पहल जी20 शिखर सम्मेलन 2024 के दौरान घोषित भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 के अनुरूप है। यह 2025 में इतालवी एयरोस्पेस प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा के बाद हुई है, जो द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को संस्थागत रूप देने की कोशिशों का हिस्सा है।
IN-SPACe इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में क्या भूमिका निभाता है?
IN-SPACe भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए सरकारी सक्षमकर्ता की भूमिका निभाता है — वैश्विक आयोजनों में प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना, अंतरराष्ट्रीय उद्योग समूहों से रणनीतिक बातचीत कराना और उद्योग-आधारित सहयोग को बढ़ावा देना इसके प्रमुख कार्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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