भारत-केन्या जलवायु सहयोग: उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने नैरोबी में की अहम बैठक, वन संरक्षण पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत के उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने 23 जून 2025 को नैरोबी में केन्या की पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की कैबिनेट सचिव डेबोरा म्लोंगो बारासा से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक में जलवायु कार्रवाई, वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-केन्या सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को ग्लोबल साउथ के एजेंडे के केंद्र में रख रहे हैं।
बैठक के मुख्य बिंदु
नैरोबी स्थित भारतीय उच्च आयोग ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में बताया कि बातचीत का केंद्र जलवायु परिवर्तन से निपटने, वनों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण में दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करना था। उच्च आयोग ने लिखा, "उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की कैबिनेट सचिव माननीय डेबोरा म्लोंगो बारासा से मुलाकात की।"
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के '15 बिलियन ट्रीज़ कैंपेन' के बीच तालमेल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने संयुक्त पर्यावरण गतिविधियों और दोनों देशों की वन एवं पर्यावरण संस्थाओं के बीच संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया।
मोदी-रुटो मुलाकात की पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति विलियम रुटो से मुलाकात की थी, जिसमें भारत को साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया था। मोदी ने उस मुलाकात के बाद कहा था, "केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो से मिलकर खुशी हुई।" उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अपने लोगों के कल्याण के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं पर आधारित यह साझेदारी आगे भी मजबूत होती रहेगी।
गौरतलब है कि नैरोबी में हुई यह बैठक उसी उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद की अगली कड़ी है — जो राजनयिक प्रतिबद्धताओं को ज़मीनी कार्यान्वयन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत-केन्या संबंधों की ऐतिहासिक जड़ें
भारत और केन्या के बीच संबंध दोनों देशों की स्वतंत्रता से पहले के दौर तक जाते हैं। केन्या में 80,000 से अधिक लोगों का भारतीय समुदाय निवास करता है, जो दोनों देशों के रिश्तों को जीवंत बनाए रखने में सेतु की भूमिका निभाता है। पिछले कई वर्षों में दोनों देशों ने व्यापार, कृषि, शिक्षा, रक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है।
आर्थिक साझेदारी का आयाम
केन्या, अफ्रीका में भारत के सबसे प्रमुख साझेदार देशों में से एक है। दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। भारत केन्या को दवाइयाँ, मशीनरी और वाहन निर्यात करता है, जबकि केन्या से चाय, कॉफी और चमड़े से जुड़े उत्पाद आयात किए जाते हैं। यह व्यापारिक ढाँचा दोनों देशों के पर्यावरण सहयोग को और अधिक व्यापक संदर्भ देता है।
आगे की राह
दोनों पक्षों की इस बैठक से संकेत मिलता है कि भारत-केन्या जलवायु सहयोग अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संस्थागत स्तर पर साझेदारी की ओर बढ़ेगा। वन एवं पर्यावरण संस्थाओं के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार होने से दोनों देशों के जलवायु लक्ष्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।