भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, ऑस्ट्रेलियाई PM अल्बानीज ने बताया बड़ा अवसर
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने 26 जून 2026 को कैनबरा में स्पष्ट किया कि भारत के साथ गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंध बनाना उनके देश की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। उन्होंने भारत को आने वाले दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनते देखने की संभावना को ऑस्ट्रेलिया के लिए 'एक बहुत बड़ा अवसर' करार दिया।
कॉन्फ्रेंस में क्या बोले अल्बानीज
कमेटी फॉर इकॉनोमिक डेवलपमेंट ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CEDA) के स्टेट ऑफ द नेशन कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अल्बानीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को दक्षिण-पूर्व एशिया में निवेश बढ़ाना होगा और भारत के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देनी होगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की बहुसांस्कृतिक कार्यशक्ति, वैश्विक संपर्क और क्षेत्रीय साझेदारियों को देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया।
अल्बानीज के अनुसार, नवाचार, विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में निवेश करके ऑस्ट्रेलिया वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर से एक मजबूत, निष्पक्ष और बेहतर तैयार राष्ट्र के रूप में उभर सकता है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका
अल्बानीज ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र बताया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया को इसमें अपनी भूमिका दृढ़ता से निभानी होगी। उन्होंने कहा, "हम एक प्रशांत देश हैं, लेकिन हम हिंद महासागर क्षेत्र का भी हिस्सा हैं।" पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी को उन्होंने इस लक्ष्य की धुरी बताया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की मजबूत होती नींव
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते ऑस्ट्रेलिया-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप, इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA) और महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक, शिक्षा व रक्षा क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के कारण काफी मजबूत हुए हैं। व्यापार, निवेश, शिक्षा और रक्षा — इन सभी मोर्चों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने ऑस्ट्रेलियाई संसद में दिए गए अपने भाषण में भी अल्बानीज ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख किया था और ECTA के ज़रिये व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती को रेखांकित किया था।
व्यक्तिगत जुड़ाव और साझा विरासत
अल्बानीज ने 1991 में अपनी पहली भारत यात्रा को 'एक बहुत अच्छा अनुभव' बताया। उन्होंने कहा, "संस्कृति, शिक्षा और क्रिकेट जैसी साझा चीजों ने भी हमें और करीब लाया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की मेरी दो यात्राएं मेरे लिए बहुत खास रही हैं।" यह बयान इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय स्तर पर भी गहरे हैं।
भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और हिंद-प्रशांत में उसकी केंद्रीय भूमिका को देखते हुए, ऑस्ट्रेलिया की यह रणनीतिक पुनर्स्थापना आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।