भारत ने भूकंपग्रस्त कोलंबिया को भेजी 20 मीट्रिक टन राहत सामग्री, जयशंकर ने जताई एकजुटता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि भारत ने भूकंप से तबाह कोलंबिया को 20 मीट्रिक टन राहत सामग्री की पहली खेप रवाना कर दी है। इस सहायता में दवाएँ, चिकित्सा उपकरण, अस्थायी आश्रय सामग्री, स्वच्छता किट और आपदा के बाद आवश्यक अन्य ज़रूरी सामान शामिल हैं।
भूकंप का विनाशकारी असर
गौरतलब है कि सोमवार को पश्चिमी कोलंबिया में 7.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। कोलंबियाई जियोलॉजिकल सर्विस के अनुसार, भूकंप स्थानीय समय के अनुसार सुबह 7:34 बजे आया और इसका केंद्र सैन जोस डेल पालमार के निकट 96 किलोमीटर की गहराई में था। इस आपदा में अब तक 281 लोगों की जान जा चुकी है, 3,971 लोग घायल हैं और 391 लोग अभी भी लापता हैं।
नेशनल यूनिट फॉर डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट के अनुसार, इस भूकंप से कोलंबिया के 15 विभागों और 426 नगरपालिकाओं में 44,936 परिवार और 1,02,105 लोग प्रभावित हुए हैं। 10,677 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 65,841 अन्य घरों को आंशिक नुकसान पहुँचा है।
जयशंकर का संदेश और भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भूकंप के बाद चल रहे रिकवरी के कामों में मदद के लिए कोलंबिया को 20 एमटी राहत सामग्री की पहली खेप भेजी गई। इस मदद में दवाएं और मेडिकल इक्विपमेंट, कुछ समय के लिए रहने की जगह और साफ-सफाई में मदद और आपदा के बाद जरूरी दूसरी चीजें शामिल हैं। भारत इस मुश्किल समय में कोलंबिया के लोगों के साथ एकजुटता में खड़ा है।"
इससे पहले मंगलवार को जयशंकर ने एक्स पर लिखा था, "कोलंबिया में भूकंप से हुई दुखद मौतों और तबाही से बहुत दुखी हूं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति दिल से संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। साथ ही घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। भारत हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।"
आम जनता और प्रभावित क्षेत्रों पर असर
भूकंप की मार सबसे अधिक पश्चिमी कोलंबिया के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों पर पड़ी है, जहाँ बुनियादी ढाँचा पहले से कमज़ोर था। एक लाख से अधिक प्रभावित लोगों को अभी भी राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रहना पड़ रहा है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बचाव और राहत अभियान अभी जारी है।
भारत की वैश्विक मानवीय भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'वसुधैव कुटुम्बकम' की विदेश नीति को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का प्रयास कर रहा है। भारत इससे पहले तुर्की, सीरिया और नेपाल जैसे देशों में भी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत सहायता भेज चुका है। कोलंबिया को यह सहायता भारत की बढ़ती वैश्विक मानवीय उपस्थिति का एक और उदाहरण है।
आगे की राहत खेपों और द्विपक्षीय समन्वय के बारे में विदेश मंत्रालय की ओर से जल्द और जानकारी आने की उम्मीद है।