ईरान युद्ध में शहीद भारतीय मूल की सर्जेंट एंजेल सारा रामप्रसाद को न्यूयॉर्क में मिली हीरो विदाई
सारांश
मुख्य बातें
ईरान युद्ध में जान गँवाने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी सेना की सर्जेंट एंजेल सारा रामप्रसाद को 1 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में अमेरिकी अधिकारी, सैन्यकर्मी और सैकड़ों शोकाकुल नागरिक शामिल हुए। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी चर्च में शोक सभा में उपस्थित रहे।
अंतिम यात्रा का विवरण
न्यूयॉर्क पुलिस के दर्जनों मोटरसाइकिल सवार जवानों के काफिले के साथ सर्जेंट रामप्रसाद का पार्थिव शरीर पहले एक चर्च में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, और इसके बाद लॉन्ग आइलैंड के एक कब्रिस्तान में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। कुछ स्थानीय समाचार चैनलों ने इस अंतिम यात्रा का सीधा प्रसारण किया।
उनकी माँ कैरोल एसेवेडो ने भरे मन से कहा, 'मेरी बेटी एक असली हीरो थी।' मेयर ममदानी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'सर्जेंट एंजेल सारा रामप्रसाद की हिम्मत और कुर्बानी को पूरे शहर में याद किया जाएगा। न्यूयॉर्क के बहुत से लोगों के लिए विदेशों में चल रहे युद्ध कभी दूर नहीं होते — हम उन्हें यहाँ घर पर भी महसूस करते हैं।'
कौन थीं सर्जेंट एंजेल सारा रामप्रसाद
भारतीय मूल की एंजेल सारा रामप्रसाद मात्र दो वर्ष की आयु में त्रिनिदाद से अमेरिका आई थीं और यहीं उनका पालन-पोषण हुआ। वे जर्मनी में आर्मी एयर और मिसाइल डिफेंस कमांड के साथ तैनात थीं, किंतु ईरान युद्ध के दौरान उन्हें जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर भेजा गया था। 17 जुलाई को इस बेस पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में उनकी मृत्यु हो गई।
उसी हमले में कैप्टन टायलर जेम्स फीहान (25) और प्राइवेट फर्स्ट क्लास इसाबेला गोंजालेस (19) भी शहीद हुए। अगले दिन सर्जेंट माइकल इमैनुएल स्विंटन इराक में एक बेस पर ड्रोन हमले में मारे गए।
सरकार और राज्य की प्रतिक्रिया
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने राज्यभर में झंडे आधे झुकाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने हिम्मत और निःस्वार्थ भाव से जीवन जिया। न्यूयॉर्क और हमारा देश उन जैसे बहादुर अमेरिकियों की वजह से अधिक सुरक्षित है, जो सेवा की पुकार का जवाब देते हैं।'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने 22 जुलाई को जॉर्डन से डोवर एयर फोर्स बेस पर लाए गए उनके पार्थिव शरीर को मिलिट्री सम्मान के साथ स्वीकार किया था।
हताहतों की सूची पर विवाद
पेंटागन ने सर्जेंट रामप्रसाद और चार अन्य सैन्यकर्मियों को ईरान युद्ध में मारे गए लोगों की आधिकारिक सूची में शामिल किया था। हालाँकि, रविवार को उन्हें उस सूची से हटाकर 'ओवरसीज ऑपरेशन्स' नामक एक अलग सूची में स्थानांतरित कर दिया गया। आलोचकों का कहना है कि यह कदम ईरान युद्ध में हुई कुल हताहतों की संख्या को कम दिखाने के लिए उठाया गया है, हालाँकि पेंटागन ने इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हवाई हमले किए। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता टूटने के बाद लड़ाई फिर से भड़क उठी। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। सर्जेंट रामप्रसाद की शहादत ने एक बार फिर इस संघर्ष की मानवीय कीमत को उजागर किया है।