स्वामी सारंग का ईरानी दूतावास दौरा, खामेनेई की मौत पर गहरी संवेदना
सारांश
Key Takeaways
- स्वामी सारंग का दौरा महत्वपूर्ण है।
- ईरान के खामेनेई की शहादत ने राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की।
- भारत और ईरान के बीच संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है।
नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में स्थित ईरानी दूतावास में ग्लोबल पीस फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी सारंग बुधवार को आए। उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए।
इसके बाद भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स प्लेटफॉर्म पर तस्वीरों के साथ उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "मुझे ग्लोबल पीस फाउंडेशन के संस्थापक, स्वामी सारंग की मेज़बानी करने का अवसर मिला।"
फथाली ने कहा कि इस्लामिक क्रांति के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला खामेनेई की शहादत पर आपकी सहानुभूति और संवेदना के लिए मैं दिल से आपकी सराहना करता हूं। साझा की गई तस्वीरों में फथाली और सारंग एक-दूसरे के गले मिलते और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद, भारत ने कूटनीतिक शोक व्यक्त किया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च को नई दिल्ली में ईरानी दूतावास का दौरा किया और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर भारत सरकार की ओर से संवेदना प्रकट की।
तब से विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए दूतावास पहुँच रहे हैं। ईरान ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी, भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी, और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती प्रमुख रहे। भारत में ईरानी दूतावास ने इस घटना को 'जघन्य अपराध' बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निंदा करने का अनुरोध किया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी ईरानी दूतावास का दौरा कर चुका है। सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा सहित नेताओं ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु पर अपनी संवेदना व्यक्त की थी। इस प्रतिनिधिमंडल ने भारत में ईरान के प्रतिनिधि के सामने अपनी सहानुभूति प्रकट की थी।