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भारत ने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, जानकारी के बिना टिप्पणी करने से बचने की अपील: एमईए

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भारत ने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, जानकारी के बिना टिप्पणी करने से बचने की अपील: एमईए

सारांश

भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के प्रति शोक जताने में किसी प्रकार की देरी के आरोपों को खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने बिना सटीक जानकारी के टिप्पणी करने से बचने की अपील की है। इस मामले में विदेश सचिव ने समय से श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

मुख्य बातें

भारत ने खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की।
विदेश मंत्रालय ने बिना जानकारी के टिप्पणी करने से बचने की अपील की।
विदेश सचिव ने समय पर संवेदनाएं व्यक्त कीं।
ईरानी दूतावास ने शोक पुस्तिका खोली थी।
खामेनेई की मृत्यु एक सैन्य हमले में हुई थी।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने गुरुवार को उन आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है जिसमें यह कहा गया था कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के प्रति शोक प्रकट करने में 5 दिन की देरी की गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लोगों से अपील की कि बिना सही जानकारी के इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए।

विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि भारत ने ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी थी। जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव ने 5 मार्च को ईरानी दूतावास जाकर शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।

जायसवाल ने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि शोक-पुस्तिका शुरू होने के पहले दिन विदेश सचिव ने भारत सरकार की ओर से यह औपचारिकता पूरी की थी। उन्होंने 5 मार्च को अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और यह शोक-पुस्तिका का पहला दिन था। मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से पहले लोगों को आवश्यक तथ्यों की जानकारी लेनी चाहिए। बिना जानकारी के टिप्पणियों से बचना चाहिए।"

यह उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में जाकर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु पर दुख व्यक्त किया था। इसके बाद, उन्होंने ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली से भी मुलाकात कर संवेदनाएं प्रकट की थीं।

दूतावास ने विश्वभर में ईरानी और उनके समर्थकों को हुए नुकसान का सम्मान करते हुए नई दिल्ली में सभी आम लोगों को शोक पुस्तक पर हस्ताक्षर करने के लिए आमंत्रित किया था। शोक पुस्तिका पर गुरुवार (5 मार्च), शुक्रवार (6 मार्च), और सोमवार (9 मार्च) को लोग अपनी संवेदनाएं प्रकट करने पहुंचे थे।

11 मार्च को ईरानी दूतावास ने संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए भारत का धन्यवाद किया था। शोक पुस्तिका पर राजनेताओं, बड़े अधिकारियों, धार्मिक नेताओं, विद्वानों, शिक्षाविदों और मीडिया कर्मियों ने हस्ताक्षर किए थे और ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाई थी।

86 वर्षीय खामेनेई की 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले में मृत्यु हो गई थी। बाद में अमेरिका ने दावा किया था कि इस सैन्य बैठक में उनके साथ कई उच्च-ranking सैन्य अधिकारी भी मारे गए थे। मृतकों में ईरान के रक्षा मंत्री और आईआरजीसी के प्रमुख भी शामिल थे।

हमले में खामेनेई के करीबी रिश्तेदार भी मारे गए थे, जिनमें उनकी बहू, बेटी, और नाती का नाम शामिल था। हमले में घायल खामेनेई की पत्नी का इलाज के दौरान निधन हो गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताता है कि कैसे गलतफहमियों और बिना जानकारी के टिप्पणियों से स्थिति और जटिल हो सकती है। सही तथ्यों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने खामेनेई के प्रति कब श्रद्धांजलि अर्पित की?
भारत ने 5 मार्च को ईरानी दूतावास में खामेनेई के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
विदेश मंत्रालय ने किस बात की अपील की?
विदेश मंत्रालय ने बिना जानकारी के टिप्पणी करने से बचने की अपील की।
खामेनेई की मृत्यु कैसे हुई?
खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले में हुई।
विदेश सचिव ने कब हस्ताक्षर किए?
विदेश सचिव ने 5 मार्च को शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
भारत ने ईरान के साथ संवेदनाएं कब प्रकट की?
भारत ने ईरान के प्रति संवेदनाएं 5 मार्च से लेकर 9 मार्च तक प्रकट की।
राष्ट्र प्रेस
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