3 अक्टूबर 2026
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आईपीयू की 153वीं महासभा: हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल तंजानिया रवाना

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आईपीयू की 153वीं महासभा: हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल तंजानिया रवाना

सारांश

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में 9 सांसदों का भारतीय दल तंजानिया के अरूशा पहुँचेगा, जहाँ 5 से 9 अक्टूबर तक आईपीयू की 153वीं महासभा में जलवायु परिवर्तन, एआई, आतंकवाद और लोकतंत्र जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा जाएगा।

मुख्य बातें

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल 3 अक्टूबर 2026 को तंजानिया के अरूशा के लिए रवाना हुआ।
प्रतिनिधिमंडल 5 से 9 अक्टूबर 2026 के बीच आईपीयू की 153वीं महासभा में भाग लेगा।
दल में लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, संजय जायसवाल सहित 9 सांसद शामिल हैं।
महासभा का विषय 'समावेशिता, विश्वास और सुशासन के ज़रिए समुदायों का सशक्तीकरण' है।
एजेंडे में एआई, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोध और महिला भागीदारी जैसे विषय शामिल हैं।
हरिवंश आईपीयू की गवर्निंग काउंसिल और अध्यक्ष पद उम्मीदवारों से होने वाली बैठक में भाग लेंगे।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को तंजानिया के अरूशा शहर के लिए रवाना हुआ। यह प्रतिनिधिमंडल 5 से 9 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित होने वाली अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा तथा उससे संबद्ध बैठकों और चर्चाओं में भाग लेगा। राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, यह भागीदारी वैश्विक संसदीय कूटनीति के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा उपसभापति हरिवंश कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, संजय जायसवाल, कमलजीत सहरावत, लता वानखेड़े, बिजुली कलिता मेधी और एन.के. प्रेमचंद्रन, तथा राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा शामिल हैं।

यह प्रतिनिधिमंडल विविध दलों के सांसदों को समाहित करता है, जो बहुपक्षीय मंचों पर भारत की समावेशी संसदीय आवाज़ को प्रतिबिंबित करता है।

महासभा का विषय और एजेंडा

इस वर्ष की आईपीयू महासभा का केंद्रीय विषय है — 'समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के ज़रिए सुशासन को बढ़ावा देना और समुदायों को सशक्त बनाना।' राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक, महासभा में दुनियाभर के सांसद एकत्रित होंगे और वैश्विक महत्व के बहुआयामी मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

गौरतलब है कि आईपीयू वैश्विक संसदों का सबसे पुराना और व्यापक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, और इसकी महासभा में पारित प्रस्ताव बहुपक्षीय नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी

हरिवंश आईपीयू की गवर्निंग काउंसिल, सामान्य चर्चा, आपातकालीन विषय पर होने वाली विशेष चर्चा और आईपीयू अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के साथ होने वाली बैठक में व्यक्तिगत रूप से भाग लेंगे।

प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य लोकतंत्र और मानवाधिकार, शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, सतत विकास, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आतंकवाद-रोध, स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और काम का भविष्य, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा पर्वतीय व समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण जैसे विषयों पर होने वाली समिति चर्चाओं और कार्यशालाओं में हिस्सा लेंगे।

संसदीय कूटनीति में भारत की प्रतिबद्धता

राज्यसभा सचिवालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी आईपीयू के साथ भारत के निरंतर जुड़ाव और संसदीय कूटनीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाती है।' सचिवालय ने यह भी रेखांकित किया कि यह भागीदारी वैश्विक शांति, विकास, लोकतंत्र और समुदायों के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर बहुपक्षीय संवाद और संसदों के बीच सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को और मज़बूत करने की कोशिश में है — चाहे वह G20 की अध्यक्षता रही हो या संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर निरंतर सक्रियता। 9 अक्टूबर 2026 को महासभा की समाप्ति के बाद प्रतिनिधिमंडल स्वदेश लौटेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार एजेंडे में एआई, महत्वपूर्ण खनिज और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों की मौजूदगी बताती है कि वैश्विक संसदीय मंच अब परंपरागत शांति-विमर्श से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए यह अवसर है कि वह वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं — जलवायु न्याय, तकनीकी संप्रभुता और सतत विकास — को बहुपक्षीय संसदीय विमर्श के केंद्र में लाए। असली परीक्षा यह होगी कि अरूशा में रखे गए भारत के पक्ष किस हद तक ठोस प्रस्तावों में बदलते हैं और घर लौटकर नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईपीयू की 153वीं महासभा कब और कहाँ हो रही है?
आईपीयू की 153वीं महासभा 5 से 9 अक्टूबर 2026 के बीच तंजानिया के अरूशा शहर में आयोजित हो रही है। इसमें दुनियाभर के सांसद वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एकत्रित होंगे।
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन कर रहा है?
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश कर रहे हैं। उनके साथ लोकसभा और राज्यसभा के कुल 8 अन्य सांसद शामिल हैं।
इस महासभा में किन विषयों पर चर्चा होगी?
महासभा में लोकतंत्र, मानवाधिकार, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोध, सतत विकास और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा होगी। महत्वपूर्ण खनिज और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी एजेंडे में है।
अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) क्या है?
अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) विश्व की राष्ट्रीय संसदों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो वैश्विक शांति, लोकतंत्र और सतत विकास के मुद्दों पर संसदीय सहयोग को बढ़ावा देता है। यह दुनिया का सबसे पुराना संसदों का अंतरराष्ट्रीय मंच है।
इस महासभा में हरिवंश किन विशेष बैठकों में हिस्सा लेंगे?
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश आईपीयू की गवर्निंग काउंसिल, सामान्य चर्चा, आपातकालीन विषय पर होने वाली चर्चा और आईपीयू अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के साथ होने वाली बैठक में भाग लेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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