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राघव चड्ढा समरकंद में IPU युवा सांसद सम्मेलन में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व, उपराष्ट्रपति ने किया नामित

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राघव चड्ढा समरकंद में IPU युवा सांसद सम्मेलन में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व, उपराष्ट्रपति ने किया नामित

सारांश

भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा उपराष्ट्रपति के नामांकन पर 4-6 सितंबर को समरकंद में 12वें IPU युवा सांसद वैश्विक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। थीम है — 'अशांत समय में मानवाधिकार, न्याय और गरिमा की पुनर्स्थापना।'

मुख्य बातें

राघव चड्ढा को उपराष्ट्रपति ने 12वें IPU ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियंस के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में नामित किया।
सम्मेलन 4 से 6 सितंबर तक समरकंद, उज्बेकिस्तान में आयोजित होगा।
इस वर्ष की थीम 'अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा की पुनर्स्थापना' है।
IPU की स्थापना 1889 में हुई थी; इसमें 180 सदस्य संसदें और 15 एसोसिएट सदस्य शामिल हैं।
यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की हालिया उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को संसदीय स्तर पर आगे बढ़ाएगी।

भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा 4 से 6 सितंबर के बीच उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद में आयोजित होने वाले 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियंस में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत के उपराष्ट्रपति ने उन्हें इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में आधिकारिक रूप से नामित किया है।

नामांकन और राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया

चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे अपने लिए सम्मान का विषय बताया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने का यह अवसर उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

IPU क्या है और इसका महत्व

इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) की स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा में है। यह विश्व की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संसदीय संस्था है, जिसमें 180 सदस्य संसदें और 15 एसोसिएट सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि IPU वैश्विक संसदीय कूटनीति और बहुपक्षीय संवाद का एक प्रमुख मंच रहा है।

सम्मेलन की थीम और एजेंडा

इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा की पुनर्स्थापना' रखी गई है। तीन दिवसीय इस आयोजन में दुनिया भर के युवा सांसद निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे — युवाओं के अधिकार, संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवाधिकार, डिजिटल अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु न्याय एवं लचीलापन, तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसर।

भारत की भूमिका और वैश्विक दृष्टिकोण

चड्ढा ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ दुनिया की सबसे युवा आबादी निवास करती है। उनके अनुसार, इन सभी मुद्दों पर भारतीय संसद के पास साझा करने योग्य समृद्ध अनुभव हैं, साथ ही अन्य देशों से सीखने का भी अवसर है।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों का संसदीय विस्तार

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध नई ऊँचाइयों पर हैं। चड्ढा ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को संसदीय स्तर पर और मज़बूत करने में सहायक होगी। यह सम्मेलन न केवल वैश्विक संसदीय संवाद को बल देगा, बल्कि भारत की युवा नेतृत्व क्षमता को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय उल्लेखनीय है — यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के ठीक बाद हो रहा है, जो द्विपक्षीय संबंधों को संसदीय धरातल पर संस्थागत रूप देने की कोशिश को दर्शाता है। हालाँकि, यह देखना होगा कि सम्मेलन में भारत की स्थिति — विशेषकर डिजिटल अधिकार और जलवायु न्याय जैसे विषयों पर — वैश्विक युवा सांसदों की अपेक्षाओं से किस हद तक मेल खाती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा IPU सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व क्यों करेंगे?
भारत के उपराष्ट्रपति ने राघव चड्ढा को 12वें IPU ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियंस के लिए आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल में नामित किया है। यह सम्मेलन 4 से 6 सितंबर तक समरकंद, उज्बेकिस्तान में आयोजित हो रहा है।
IPU क्या है और इसमें कितने देश शामिल हैं?
इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) वर्ष 1889 में स्थापित विश्व की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संसदीय संस्था है, जिसका मुख्यालय जिनेवा में है। इसमें 180 सदस्य संसदें और 15 एसोसिएट सदस्य शामिल हैं।
2026 के IPU युवा सांसद सम्मेलन की थीम क्या है?
इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा की पुनर्स्थापना' है। सम्मेलन में युवाओं के अधिकार, डिजिटल सुरक्षा, जलवायु न्याय और आर्थिक अवसर जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
इस यात्रा का भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों पर क्या असर होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद यह संसदीय प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को संसदीय स्तर पर और मज़बूत करने का काम करेगा। राघव चड्ढा के अनुसार, यह यात्रा कूटनीतिक संवाद को नई दिशा देगी।
सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा होगी?
तीन दिवसीय सम्मेलन में युवाओं के अधिकार, संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवाधिकार, डिजिटल अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु न्याय एवं लचीलापन, तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसर जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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