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इंडो-पैसिफिक में तनाव क्यों बढ़ रहा है? अमेरिका और जापान का संयुक्त अभ्यास

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इंडो-पैसिफिक में तनाव क्यों बढ़ रहा है? अमेरिका और जापान का संयुक्त अभ्यास

सारांश

चीन और रूस के संयुक्त सैन्य अभ्यास के बीच, अमेरिका ने जापानी जेट्स के साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। क्या यह पूर्वी एशिया में बढ़ते तनाव का संकेत है? जानिए इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे की कहानी और जापानी रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

अमेरिकी बी-52 और जापानी जेट्स का संयुक्त अभ्यास पूर्वी एशिया में तनाव को दर्शाता है।
चीन और रूस के सैन्य मनोबल में वृद्धि से क्षेत्रीय सुरक्षा में खतरा बढ़ा है।
जापान और अमेरिका ने यथास्थिति को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन हमेशा गंभीर परिणाम ला सकता है।

टोक्यो, 11 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। चीन और रूस के संयुक्त अभ्यास के दौरान, अमेरिकी बी-52 बॉम्बर ने भी जापानी जेट्स के साथ उड़ान भरी। यह पूर्वी एशिया में बढ़ते तनाव का एक स्पष्ट संकेत है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने इस संयुक्त अभ्यास की पुष्टि की।

जापान के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जापान और अमेरिका ने "एकतरफा प्रयासों" को रोकने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (एसडीएफ) और अमेरिकी सेना की तत्परता को प्रदर्शित किया। स्थानीय मीडिया आउटलेट जापान टुडे ने इसकी रिपोर्ट की है।

10 दिसंबर को दो अमेरिकी बी-52 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर ने जापानी सागर के ऊपर उड़ान भरी, जिसमें तीन जापानी एफ-35 स्टेल्थ फाइटर और तीन एफ-15 एयर सुपीरियॉरिटी जेट शामिल थे। यह पहला अवसर था जब चीन के क्षेत्रीय अभ्यास शुरू होने के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति का ऐसा प्रदर्शन किया।

जापानी रक्षा मंत्रालय ने 11 दिसंबर को जारी तस्वीरों में बी-52 को एफ-15 के साथ दिखाया, जो जापान के छठे एयर विंग से थे।

9 दिसंबर को, दो रूसी टु-95 बॉम्बर ने दो चीनी एच-6 बॉम्बर के साथ संयुक्त उड़ान भरी, जिसके जवाब में जापान ने अपने लड़ाकू विमान उतारे।

पिछले सप्ताह, चीन ने जापान के दक्षिण में विमानवाहक अभ्यास किया, जिसमें जापानी जेट्स पर रडार लॉक-ऑन का आरोप लगा। जापान ने इसे "खतरनाक" बताया और कहा कि उनके जेट विमानों को रडार बीम से निशाना बनाया गया था, जबकि चीन ने जापानी विमानों को "अनधिकृत घुसपैठ" करार दिया।

जापान के चीफ ऑफ स्टाफ, जॉइंट स्टाफ जनरल हिरोकी उचिकुरा ने कहा कि चीनी और रूसी बॉम्बर विमानों की संयुक्त उड़ान स्पष्ट रूप से जापान के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन था।

इस घटना की वाशिंगटन ने भी आलोचना करते हुए कहा कि यह "क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अच्छा नहीं है" और इस बात की पुष्टि की कि जापान के साथ उसका गठबंधन "अटूट" है।

जापान और दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सेनाएं तैनात हैं। जापान में अमेरिका का एक विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप और एक अमेरिकी मरीन अभियान दल उपस्थित है।

इस बीच, जापानी सरकार के शीर्ष प्रवक्ता, मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक चर्चा जारी रखने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, "जापानी सरकार की नीतियों और रुख के बारे में अन्य देशों की समझ हासिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने कहा कि जापान ने "समय पर और उचित तरीके से" अन्य देशों को टोक्यो की स्थिति समझाने के लिए "लगातार विभिन्न अवसरों" का लाभ उठाया है और ऐसा करना जारी रखेगा।

रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने बुधवार शाम को अपने इतालवी समकक्ष और नाटो प्रमुख के साथ अलग-अलग बातचीत की।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तनाव को बढ़ा सकती हैं। हमें यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन हमेशा गंभीर परिणाम ला सकता है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन और रूस का संयुक्त अभ्यास क्या है?
चीन और रूस का संयुक्त अभ्यास एक सैन्य गतिविधि है जिसमें दोनों देशों की सेनाएँ मिलकर प्रशिक्षण करती हैं।
अमेरिकी बी-52 बॉम्बर की विशेषताएँ क्या हैं?
बी-52 बॉम्बर एक लंबी दूरी का रणनीतिक बमवर्षक विमान है, जो बड़े पैमाने पर बमबारी के लिए जाना जाता है।
जापान की सुरक्षा नीति में क्या बदलाव हो रहे हैं?
जापान ने अपनी सुरक्षा नीति को मजबूत करने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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