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गुआम में 20 दिन का सी ड्रैगन अभ्यास: भारत और अमेरिका की शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन

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गुआम में 20 दिन का सी ड्रैगन अभ्यास: भारत और अमेरिका की शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन

सारांश

गुआम में आयोजित 'एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026' ने भारत, अमेरिका और चार अन्य देशों के बीच एंटी-सबमरीन युद्ध कौशल को प्रदर्शित किया। इस अभ्यास ने समुद्र के भीतर खतरों को पहचानने और उन्हें निष्क्रिय करने की सामूहिक क्षमता को मजबूत किया।

मुख्य बातें

अभ्यास ने भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत किया।
साझेदार देशों ने समुद्री सुरक्षा के लिए साझा निगरानी की।
अभ्यास में जटिल समुद्री माहौल में संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता का परीक्षण किया गया।
जापान ने इस बार 'ड्रैगन बेल्ट' पुरस्कार जीता।
यह अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वाशिंगटन, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर 20 दिन का एंटी-सबमरीन युद्ध अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभ्यास 'एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026' के तहत गुआम में आयोजित किया गया, जो 28 मार्च को एंडरसन वायु सेना बेस पर समाप्त हुआ।

इस अभ्यास में अमेरिका और भारत के साथ-साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र में मौजूद खतरों की पहचान करना और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को और बेहतर बनाना था।

अभ्यास की मेज़बानी कमांडर टास्क फोर्स 72 ने की। इसमें अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक पी-8ए पोसाइडन विमान के साथ भारतीय नौसेना, जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स और रॉयल न्यूजीलैंड एयर फोर्स के विमानों ने हिस्सा लिया। सभी देशों ने मिलकर जटिल समुद्री माहौल में संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता का परीक्षण किया।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य देशों के बीच तालमेल को बढ़ाना और समुद्री गतिविधियों की साझा निगरानी को मजबूत करना था। अभ्यास के दौरान 'एमके-30' नामक मोबाइल एंटी-सबमरीन ट्रेनिंग टारगेट का उपयोग कर ट्रैकिंग ड्रिल का संचालन किया गया। इसके अलावा, एक सक्रिय नौसेना पनडुब्बी को खोजने और उस पर कार्रवाई करने का लाइव अभ्यास भी किया गया।

इस वर्ष अभ्यास साइपन के आसपास भी हुआ, जहाँ प्रतिभागी देशों ने रिकवर किए जा सकने वाले एक्सरसाइज टॉरपीडो का उपयोग किया। इससे उनकी ऑपरेशनल क्षमता में और वृद्धि देखने को मिली।

अभ्यास में एक प्रतिस्पर्धात्मक पहलू भी शामिल था, जिसमें हर देश के प्रदर्शन को वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर आंका गया। इस बार जापान की पैट्रोल एंड रिकॉनिसेंस स्क्वाड्रन 3 ने 'ड्रैगन बेल्ट' अवार्ड जीता, जो पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के पास था।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे साझेदार देशों की ताकत और तैयारी दोनों में वृद्धि होती है और इंडो-पैसिफिक में किसी भी संभावित खतरे को रोकने में मदद मिलती है।

2019 से हर साल आयोजित हो रहा यह अभ्यास अब इंडो-पैसिफिक में सैन्य सहयोग का एक मजबूत मंच बन चुका है। इसमें भारत की भागीदारी क्षेत्र में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका और समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी सक्रिय नीति को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें भाग लेने वाले देशों का तालमेल और साझा निगरानी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्र में खतरों की पहचान करना और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को बेहतर बनाना था।
कौन-कौन से देश इस अभ्यास में शामिल हुए?
इस अभ्यास में अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हुए।
अभ्यास का संचालन किसने किया?
अभ्यास की मेज़बानी कमांडर टास्क फोर्स 72 ने की।
इस बार किस देश ने 'ड्रैगन बेल्ट' पुरस्कार जीता?
इस बार जापान की पैट्रोल एंड रिकॉनिसेंस स्क्वाड्रन 3 ने 'ड्रैगन बेल्ट' पुरस्कार जीता।
यह अभ्यास कब से आयोजित हो रहा है?
यह अभ्यास 2019 से हर साल आयोजित हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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