ईरान संघर्ष ट्रंप कार्यकाल के बाद भी जारी रह सकता है: पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी ब्रेट मैकगर्क की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
व्हाइट हाउस में मिडिल ईस्ट मामलों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ब्रेट मैकगर्क ने 5 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी है कि ईरान के साथ चल रहा टकराव न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेष कार्यकाल तक, बल्कि अगली अमेरिकी सरकार के दौर तक भी खिंच सकता है। उनके अनुसार, इस संघर्ष का कोई शीघ्र और व्यापक समाधान अभी दृष्टिगोचर नहीं है।
मैकगर्क की मुख्य चेतावनी
राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के कोऑर्डिनेटर रहे मैकगर्क ने सीएनएन के फरीद जकारिया से बातचीत में कहा, "अगर मुझे अनुमान लगाना हो, तो यह मामला ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिर तक चलता रहेगा और फिर अगले राष्ट्रपति को भी ईरान की इस पुरानी समस्या से निपटना होगा।" उन्होंने कहा कि जिमी कार्टर के समय से ही लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति इस चुनौती का सामना करता आया है।
मैकगर्क ने लंबे समय तक आर्थिक दबाव, बीच बीच में सैन्य टकराव और अंतरिम सीजफायर की संभावना को सबसे संभावित परिदृश्य बताया। उन्होंने कहा, "एक बार जब आप इस रास्ते पर आगे बढ़ जाते हैं, तो फिर यह तय करना बहुत मुश्किल हो सकता है कि इस टकराव को आखिर खत्म कैसे किया जाए।"
मिडिल ईस्ट में बदला ताकत का संतुलन
मैकगर्क के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद से मिडिल ईस्ट में ताकत का संतुलन 'बुनियादी तौर पर' बदल गया है। उन्होंने दो प्रमुख सैन्य अभियानों का उल्लेख किया — ईरान के परमाणु ठिकानों के विरुद्ध 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' और इस वर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ मौजूदा संघर्ष।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत ऐसे उद्देश्य से हुई, जिसमें सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य खुला रखा गया था — और यही बात इस टकराव को असामान्य रूप से जटिल बनाती है। उनके अनुसार, जब तक ईरान की राजनीतिक व्यवस्था अपने तौर तरीकों में बड़ा बदलाव नहीं लाती, तब तक इस संघर्ष का कोई स्पष्ट अंत नहीं दिखता।
परमाणु मुद्दे पर समझौता और भी कठिन
मैकगर्क ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी बड़े समझौते की संभावना को लेकर भी गहरी चिंता जताई। उनका मानना है कि तेहरान के नीति निर्माता परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंचने की स्थिति को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी मान सकते हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए परमाणु मुद्दे पर समझौता हासिल करना बेहद मुश्किल होने वाला है।"
ट्रंप प्रशासन का रुख
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सीबीएस न्यूज़ के 'फेस द नेशन' कार्यक्रम में कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के मामले में कूटनीतिक और सैन्य दोनों रास्ते खुले रखे हुए है। राइट ने कहा, "राष्ट्रपति ने साफ और कड़ा रुख अपनाया है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता और उसे इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी।" उन्होंने यह भी कहा, "हम अगली सरकार के लिए परमाणु हथियारों से लैस ईरान छोड़कर नहीं जा सकते।"
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका खाड़ी देशों में तेल ढांचे की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त रक्षा उपकरण भेज रहा है और एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। राइट ने राष्ट्रपति की आगे की योजनाओं के बारे में कुछ भी बताने से इनकार किया।
ऊर्जा कीमतें और राजनीतिक असर
इस संघर्ष ने ट्रंप प्रशासन के सामने ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ी चुनौती खड़ी की है। अमेरिकी मीडिया के ताज़ा सर्वेक्षण के मुताबिक, हर 10 में से 9 मतदाताओं का मानना है कि ईरान संघर्ष की वजह से अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। क्विनिपियाक सर्वे के अनुसार, केवल 28 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन किया, जबकि 66 प्रतिशत ने इसे नापसंद किया।
न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने कहा कि बढ़ती कीमतों और ईरान युद्ध का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर पड़ रहा है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में महज एक महीना शेष रहने के कारण यह संघर्ष राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील हो गया है।
राइट ने हालांकि आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद जताई — होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई बढ़ने, अमेरिका में रिकॉर्ड उत्पादन और मांग में मौसमी गिरावट को इसका कारण बताते हुए। गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे में व्यवधान की गारंटी न होने की बात राइट ने स्वयं स्वीकार की — "संघर्ष में कोई गारंटी नहीं होती।"